लखनऊ / अयोध्या धाम। प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और कथित दान प्रकरण को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसआईटी ने इस मामले में आरोप लगाने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को आधिकारिक तौर पर तलब किया है।
सांसद संजय सिंह को आज (बृहस्पतिवार) लखनऊ स्थित मंडलायुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर इस प्रकरण से जुड़े अपने दावों के पक्ष में प्रामाणिक साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया है।
राम मंदिर दान प्रकरण जांच का पूरा खाका
इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन स्तर पर चल रही हलचल और एसआईटी की प्रशासनिक कड़ियों का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| जांच और प्रशासनिक आयाम | SIT एवं शासन स्तर का आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| जांच का मुख्य विषय | अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में कथित दान/चढ़ावा विसंगति प्रकरण |
| SIT के प्रमुख सदस्य | विजय विश्वास पंत (आयुक्त, लखनऊ मंडल) |
| प्रारंभिक रिपोर्ट की तिथि | 23 जून को गृह विभाग को रिपोर्ट सौंपी गई |
| रिपोर्ट प्राप्तकर्ता अधिकारी | संजय प्रसाद (अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, उ.प्र.) |
| साक्ष्य हेतु तलब जनप्रतिनिधि | संजय सिंह (राज्यसभा सांसद, आम आदमी पार्टी) |
| साक्ष्य प्रस्तुतीकरण का स्थल | मण्डलायुक्त कार्यालय, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) |
गृह विभाग को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट, हर पहलू की बारीकी से जांच
बता दें कि इस कथित दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने बीते 23 जून को ही अपनी पहली प्रारंभिक रिपोर्ट (Preliminary Report) सूबे के गृह विभाग को सौंप दी थी। एसआईटी प्रमुख व लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद से मुलाकात कर यह प्रतिवेदन सौंपा था।
मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने मीडिया को स्पष्ट किया था कि यह अभी केवल प्रारंभिक प्रतिवेदन है। विशेष जांच दल इस पूरे प्रकरण से संबंधित सभी तकनीकी, वित्तीय और व्यावहारिक पहलुओं की गहराई से जांच कर रहा है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
“15 दिन का इंतजार करें, रामजन्मभूमि को अपमानित करने वालों के बहकावे में न आएं” : सीएम योगी
हाल ही में अयोध्या में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे विवाद पर विपक्ष और रामभक्तों को बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया था। उन्होंने मर्यादा का स्मरण कराते हुए भावुक अपील की थी:
“मेरी अपील होगी सभी रामभक्तों से, अयोध्या के बारे में जो समाचार पत्रों में सुनने को मिला, हम लोगों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बिठाई है। मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि यह एसआईटी जांच दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी। मैं सभी पक्षों से कहूंगा कि सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर कोई भी ऐसी अनर्गल टिप्पणी व बातें न हों जो दुनिया भर के रामभक्तों की भावनाओं को आहत करती हों। अगर किसी के पास कोई पुख्ता डॉक्यूमेंट या सबूत है, तो वह सीधे एसआईटी को उपलब्ध करवा दे, एसआईटी पूरी निष्पक्षता से जांच करेगी। प्रभु राम ने हमें मर्यादा का पाठ पढ़ाया है, हमने उसी मर्यादा का पालन करते हुए 500 वर्षों तक प्रभु राम के स्थान को वापस लेने के लिए अनवरत संघर्ष किया है; 15 दिन और देख लें, इंतज़ार कर लें, चिंता न करें। रामजन्मभूमि को अपमानित करने वाले लोगों के बहकावे में कतई न आएं, ये लोग कभी नहीं चाहेंगे कि अयोध्या को वैश्विक स्तर पर वह सम्मान पाए जो उसका अधिकार है!”
संजय सिंह के पास सबूतों की परीक्षा, टिकी सबकी नजरें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस कड़े रुख के बाद ही एसआईटी ने त्वरित एक्शन लेते हुए आप नेता संजय सिंह को साक्ष्य देने के लिए बुलाया है। राजनीतिक गलियारों में इस समन के बाद हलचल बढ़ गई है, क्योंकि अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आम आदमी पार्टी के सांसद एसआईटी के सामने कौन से विधिक दस्तावेज और साक्ष्य पेश करते हैं।
शासन का स्पष्ट रुख है कि यदि किसी भी स्तर पर कोई विसंगति पाई गई तो कड़ी वैधानिक कार्रवाई होगी, अन्यथा धार्मिक नगरी और राम मंदिर की छवि को भ्रामक खबरों के जरिए धूमिल करने की कोशिश करने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा।











