भुवनेश्वर: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के साथ ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का देश की अखंडता का सपना साकार हुआ है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर मंगलवार को भुवनेश्वर स्थित जयदेव भवन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन माझी ने यह बात कही ।
इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए युवाओं से उनके ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) के आदर्शों से प्रेरित होकर समृद्ध ओडिशा और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत माता के महान सपूत थे, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को डॉ. मुखर्जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के शिक्षा क्षेत्र में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि मात्र 33 वर्ष की आयु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने और उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ पूर्ण एकीकरण के लिए डॉ. मुखर्जी का संघर्ष भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी द्वारा दिया गया नारा—“एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे”—देश की एकता और अखंडता का प्रतीक बन गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 और 35(ए) जैसे प्रावधानों के खिलाफ डॉ. मुखर्जी ने आजीवन संघर्ष किया और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को समाप्त कर डॉ. मुखर्जी के ‘अखंड भारत’ के सपने को साकार किया गया। उन्होंने इसे डॉ. मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक संविधान और एक तिरंगा देश की एकता का प्रतीक बनकर लहरा रहा है।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी द्वारा 21 अक्टूबर 1951 को स्थापित भारतीय जनसंघ आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में विकसित हो चुका है, जिसका मूल दर्शन सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रहित है।

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर डॉ. मुखर्जी के योगदान की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार उनके बलिदान दिवस को राष्ट्रीय कर्तव्य के रूप में मना रही है। उन्होंने लोगों से देशविरोधी, भ्रष्टाचार और परिवारवाद की राजनीति करने वाली शक्तियों के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने में डॉ. मुखर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने उन्हें सच्चे राष्ट्रभक्त का प्रतीक बताया। इस अवसर पर पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत कुमार गौतम, भुवनेश्वर (एकाम्र) से विधायक बाबू सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमंत शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। इससे पूर्व सुबह सत्संग विहार स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी, राज्यसभा सांसद मनमोहन सामल, विधायक बाबू सिंह तथा अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
















