ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी युग का अंत? बागी गुट ने 'दीदी' को अध्यक्ष पद से हटाया, जानिय क्यों हुआ TMC का ये हाल?
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ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी युग का अंत? बागी गुट ने ‘दीदी’ को अध्यक्ष पद से हटाया, जानिय क्यों हुआ TMC का ये हाल?

पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बागी गुट ने अब तक का सबसे घातक कदम उठाया।

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता
Jun 22, 2026, 10:07 pm IST
inभारत, पश्चिम बंगाल
Mamta Banerjee

ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में 22 जून 2026 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद संकटों से घिरी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब पूरी तरह से बिखर चुकी है। आज के दिन पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बागी गुट ने अब तक का सबसे घातक कदम उठाया।

कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में स्थित एक आलीशान फाइव स्टार होटल में बुलाई गई एक विशेष बैठक में बागी धड़े ने ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष (चेयरपर्सन) के पद से हटा दिया। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी पार्टी से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया। खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने वाले इस धड़े ने वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को अपना नया बॉस चुन लिया है। TMC में आए इस भूचाल के बारे में चलिए विस्तार से जानते हैं कि कब, क्यों और क्या-क्या हुआ?

फाइव स्टार होटल में लिखी गई स्क्रिप्ट

कुछ समय पहले हुए विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की आग सुलग रही थी। यह आखिरकार सोमवार को एक ज्वालामुखी की तरह फट पड़ी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक 5 स्टार होटल में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई। इस बैठक में बागी विधायकों, पार्षदों और राज्य के विभिन्न जिलों से आए पूर्व निर्वाचित प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर ममता बनर्जी को शीर्ष पद से बेदखल कर दिया गया और हावड़ा मध्य से वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को असली टीएमसी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया। बैठक का मंच भी पूरी तरह से बदला हुआ नजर आया। मंच पर तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिन्ह तो लगा हुआ था, लेकिन वहां से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें पूरी तरह गायब थीं। उनके स्थान पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्रों को लगाया गया था।

TMC की नई राष्ट्रीय संगठनात्मक समिति

खुद को असली टीएमसी बताने वाले इस बागी धड़े ने तुरंत प्रभाव से अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की घोषणा कर दी जो इस प्रकार है:

1. राष्ट्रीय अध्यक्ष: अरूप रॉय
2. राष्ट्रीय महासचिव: ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और सांदीपन साहा
3. उपाध्यक्ष: फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मिन
4. कोषाध्यक्ष:अखरुज्जमां अंसारी

पार्टी के आंतरिक नियमों और संविधान का दिया हवाला

इस बैठक के दौरान बगावत का झंडा बुलंद करने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने ममता और अभिषेक बनर्जी को हटाने के पीछे पार्टी के आंतरिक नियमों और संविधान का ही हवाला दिया। ऋतब्रत गुट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के लिखित संविधान के मुताबिक हर 3 साल में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का लोकतांत्रिक पुनर्गठन होना अनिवार्य है।

पार्टी की आखिरी आधिकारिक कमेटी का गठन फरवरी 2022 में किया गया था, जिसका कानूनी कार्यकाल फरवरी 2025 में ही समाप्त हो चुका था। तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी पार्टी के राष्ट्रीय ढांचे को रिन्यु नहीं किया गया। बागी खेमे का तर्क है कि इसके कारण पिछले कई महीनों से संगठन पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक रूप से काम कर रहा था। इसी संवैधानिक गतिरोध को तोड़ने और पार्टी के अस्तित्व को बचाने के लिए नई राष्ट्रीय समिति का चुनाव करना अनिवार्य हो गया था।

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गुस्सा बना बगावत की वजह

पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं और विधायकों का एक बहुत बड़ा वर्ग लंबे समय से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली का विरोध कर रहा था। नेताओं का आरोप है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर अभिषेक बनर्जी को जबरन ममता बनर्जी का राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने की कोशिश की गई जिसके कारण पार्टी गर्त में चली गई।

इसी साल अप्रैल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को भाजपा के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी जिसके बाद भाजपा ने सूबे में पहली बार अपनी ऐतिहासिक सरकार बनाई। इस करारी हार के बाद टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 ने ममता कैंप के उम्मीदवार को खारिज करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुना था। अब बागी गुट का दावा है कि उनके साथ विधायकों की संख्या बढ़कर 65 के पार पहुंच चुकी है जो पार्टी के कुल विधायकों का दो-तिहाई से अधिक है।

तीन अलग-अलग टुकड़ों में बंटा संगठन

इस ताजा तख्तापलट के बाद 28 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस अब स्पष्ट रूप से तीन अलग-अलग हिस्सों में बिखर चुकी है:
पहला गुट: ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार नेताओं का धड़ा जो अब पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है।
दूसरा गुट: ऋतब्रत बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाला बागी धड़ा जो बंगाल विधानसभा और संगठन के भीतर बहुमत का दावा कर रहा है।

तीसरा गुट: काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले सांसदों का ग्रुप। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत करते हुए टीएमसी संसदीय दल से नाता तोड़ लिया और ‘नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नाम के दल में अपना विलय कर लिया है। इस गुट ने केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को अपना समर्थन भी दे दिया है।

440 करोड़ रुपये का बैंक फंड फ्रीज, सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी लड़ाई

राजनीतिक बिखराव के बाद अब असली जंग पार्टी के नाम, निशान और पैसों की तिजोरी पर आकर टिक गई है। टीएमसी के पास फिलहाल करीब 1100 करोड़ रुपए का विशाल पार्टी फंड मौजूद है। ऋतब्रत बनर्जी गुट के 10 विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है कि इन बैंक खातों में जमा धन का स्रोत संदिग्ध है और यह राशि पिछले कुछ वर्षों में हुए कथित घोटालों और कटमनी से जुटाई गई हो सकती है।

इस शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए टीएमसी के 3 मुख्य बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपए के फंड पर ‘डेबिट फ्रीज’ लगा दिया है यानी अब इन खातों से कोई पैसा नहीं निकाला जा सकेगा। बागी धड़े ने ऐलान किया है कि वे पार्टी के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह पर अपना कानूनी दावा ठोकने के लिए बहुत जल्द देश की सर्वोच्च अदालत मतलब सुप्रीम कोर्ट का रुख करने वाले हैं।

ये रहे सवालों के जवाब

अब ऐसे कई सवाल हैं जो लोगों के मन में उठ रहे हैं। उनका जवाब भी दे देते हैं आपको। जैसे क्या बागी गुट के पास ममता बनर्जी को हटाने का कानूनी अधिकार है? संसद में टीएमसी सांसदों की मौजूदा स्थिति क्या है? टीएमसी के बैंक खातों को क्यों फ्रीज किया गया है और इसका पार्टी पर क्या असर होगा?

पहले सवाल का जवाब ये है कि बागी गुट का दावा है कि फरवरी 2022 के बाद पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, इसलिए उन्होंने पार्टी संविधान के तहत नया ढांचा तैयार किया है। हालांकि, दल-बदल कानून असली टीएमसी और चुनाव चिन्ह किसका होगा, इसका अंतिम फैसला भारत के चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होगा।

दूसरे सवाल का जवाब है कि संसद में टीएमसी को बहुत बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बगावत करते हुए अपना अलग गुट बना लिया और ‘नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय करके केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार को समर्थन दे दिया है। इसके चलते तकनीकी रूप से ममता बनर्जी गुट के पास संसद में नाममात्र के सांसद बचे हैं।

अंतिम सवाल का जवाब यह है कि ऋतब्रत बनर्जी गुट के 10 विधायकों ने बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि टीएमसी के खातों में जमा पैसे का सोर्स संदिग्ध है और यह कथित घोटालों व कटमनी से आया हो सकता है। इसी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने करीब 440 करोड़ रुपये के फंड के लेन-देन (निकासी) पर रोक लगा दी है। इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के लिए पार्टी के दैनिक खर्चों और कानूनी लड़ाई को लड़ने के लिए वित्तीय संकट खड़ा हो गया है।

 

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जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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