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समग्र स्वास्थ्य की संजीवनी है ‘योग’

योग केवल प्राणायाम और शरीर को लचीला बनाने वाले आसनों तक सीमित नहीं है बल्कि यह व्यक्ति को चिंता से मुक्त कर आत्मचिंतन की राह सुझाता है। योग आपको वहां पहुंचा सकता है जहां केवल ताकत नहीं पहुंचा सकती है।

Written byपूनम नेगीपूनम नेगी — edited by Mahak Singh
Jun 21, 2026, 10:00 am IST
in भारत
International Yoga Day 2026

International Yoga Day 2026

समाज का हर व्यक्ति स्वस्थ और फिट रहना चाहता है। निःसंदेह फिटनेस बहुत अच्छी बात है; लेकिन सवाल यह है कि क्या फिट और मजबूत दिखने वाला शरीर स्वस्थ और सफल-सार्थक जीवन की गारंटी है! क्या अच्छी फिजिक से तनाव, चिंता और अवसाद खत्म हो जाता है! वर्तमान की कड़वी सच्चाई यह है कि आज समाज का हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में है। कॅरियर का तनाव, रिलेशनशिप की उलझनें और उदासी, सोशल मीडिया पर तुलना, नौकरी की चिंता और भविष्य का डर। बाहर से मुस्कुराते दिखने वाले चेहरे भीतर से टूटे हुए हैं। इस समस्या का सर्वाधिक कारगर समाधान है ‘योग’। ‘योग’ अर्थात वैदिक भारत की ऋषि मनीषा द्वारा विकसित एक समग्र जीवन पद्धति।

जीवन को सर्वश्रेष्ठ ढंग से जीने की कला है योग

श्रीमद्भगवद्गीता में योगेश्वर (योग के ईश्वर) श्रीकृष्ण कहते हैं – ‘योग: कर्मसु कौशलम्।’ अर्थात जीवन को सर्वश्रेष्ठ ढंग से जीने की कला है। योग केवल प्राणायाम और शरीर को लचीला बनाने वाले आसनों तक सीमित नहीं है बल्कि यह व्यक्ति को चिंता से मुक्त कर आत्मचिंतन की राह सुझाता है। योग आपको वहां पहुंचा सकता है जहां केवल ताकत नहीं पहुंचा सकती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘एकाग्रता ही ज्ञान का रहस्य है।’ योग व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ाता है। जब मन शांत होता है तो निर्णय बेहतर होते हैं, लक्ष्य स्पष्ट दिखते हैं और सफलता की संभावना बढ़ जाती है। संस्कृत शब्द ‘योग’ का मूल अर्थ है जोड़’- आत्मा का परमात्मा से। भगवदगीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जिस दिव्य यौगिक ज्ञान का उपदेश दिया था, इस वैश्विक ग्रन्थ में उसकी अनुपम व्याख्या कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग के रूप में मिलती है। यह भारत की वह देन है जिसने पूरे विश्व को स्वस्थ जीवन जीने का मार्ग दिखाया। गीता का एक और महत्वपूर्ण श्लोक है-‘समत्वं योग उच्यते।’ अर्थात सुख-दु:ख, लाभ-हानि और सफलता-विफलता में संतुलित बने रहना ही योग है। आज की युवा पीढ़ी के लिए इससे बड़ा जीवन मंत्र शायद कोई नहीं हो सकता।

योग में निहित है ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ का दिव्य भाव

भारत हमेशा से ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया’ की जीवनदृष्टि का पोषक रहा है और योग इस जीवनदृष्टि को पुष्ट करता है। वैदिक मनीषियों के अनुसार शरीर, मन और आत्मा को संतुलन में लाने की एक वैज्ञानिक पद्धति है योग। यह मानसिक तनाव को कम करता है, शरीर को स्वस्थ रखता है और आत्मा को शांति प्रदान करता है। नियमित योग अभ्यास से व्यक्ति ज्यादा अनुशासित, केंद्रित और सकारात्मक बनता जाता है। भारत में योग की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने योग के माध्यम से ध्यान, समाधि और आत्मज्ञान प्राप्त किया था। महर्षि पतंजलि ने ‘योगसूत्र’ लिखकर योग विज्ञान को एक व्यवस्थित रूप दिया। महर्षि पतंजलि योग को परिभाषित करते हुए कहते हैं- ‘योगश्चित्तवृत्ति निरोध:’ अर्थात मन की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित करना ही योग है।

शरीर के साथ मन और आत्मा को सशक्त बनाता है योग

समझना होगा कि जिम की कसरतों से केवल शरीर मजबूत होता है, लेकिन भारत की पुरातन योग परंपरा शरीर के साथ मन और आत्मा को भी सशक्त बनाती है। जिम में आप केवल कैलोरी बर्न करते हैं, जबकि योग शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूती देने के साथ तनाव और नकारात्मकता को बर्न करता है। वर्तमान समय में लोग जिम में तो घंटों बिता लेते हैं लेकिन पांच मिनट भी शांत व स्थिर मन से ध्यान व प्राणायाम नहीं कर पाते। परिणाम सामने है- शरीर तो फिट दिखते हैं लेकिन मन बेचैन ही रहता है। आज जब मोबाइल स्क्रीन हमारे मन को हर सेकंड विचलित कर रही है, तब महर्षि पतंजलि का यह सूत्र तदयुग से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। गौरतलब हो कि मानसिक स्वास्थ्य आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो चुका है। आज लोग सिर्फ शरीर को तराशने में जुटे हैं, मन को मजबूत बनाने की कला से वे दूर होते जा रहे हैं। आज लोग भूलते जा रहे हैं कि जीवन की सबसे बड़ी लड़ाइयां मांसपेशियों की मजबूती से नहीं, बल्कि सुदृढ़ मनोबल से ही जीती जा सकती हैं।

भारत के योग विज्ञान की अभूतपूर्व वैश्विक लोकप्रियता

हर्ष का विषय है कि विगत एक दशक से अधिक समय में भारत की यह पुरातन योग पद्धति केवल व्यायाम ही नहीं अपितु जीवन को संतुलित करने के अनूठे ज्ञान विज्ञान के रूप में पूरी दुनिया में बहुत तेजी से लोकप्रिय हुई है। मनुष्य के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाने वाले सर्वाधिक कारगर अस्त्र के रूप में भारत के योग विज्ञान ने आज अभूतपूर्व रूप में वैश्विक लोकप्रियता हासिल की है। देश-दुनिया के अनेक अभिनेता, राजनेता और कॉर्पोरेट लीडर्स ध्यान और योग को अपनी सफलता का आधार मानते हैं। क्योंकि नेतृत्व केवल शारीरिक ऊर्जा से नहीं, बल्कि मानसिक स्पष्टता और संतुलन से विकसित होता है। आज के युवाओं के पसंदीदा कई सितारे योग को अपनी सफलता का रहस्य मानते हैं। बालीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी वर्षों से योग का प्रचार कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभिनेत्री जेनिफर एनिस्टन और कई हॉलीवुड सितारे भी योग को तनावमुक्त जीवन का आधार मानते हैं।

भारत की सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर है योग

आज पूरी दुनिया माइंडफुलनेस, मेडिटेशन और वेलनेस इंडस्ट्री पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है। ज्ञात हो कि जिस यौगिक ज्ञान को आज की दुनिया नई खोज समझ रही है, वह भारत हजारों वर्षों से जानता है। योग केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व, अनुशासन और सकारात्मक सोच का भी आधार है। यह भारत की सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर बन चुका है। याद रखिए, दुनिया आपको आपके शरीर से पहले आपकी सोच और व्यक्तित्व से पहचानती है। भारत की यह प्राचीन धरोहर आज भी युवाओं के लिए उतनी ही प्रासंगिक है जितनी हजारों वर्ष पहले थी। जरूरत केवल इसे समझने और अपनाने की है।

यही योग का संदेश है और यही स्वस्थ और सफल भारत का सुपथ। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज विश्व में योग का जो स्वरूप दिखाई देता है, वह अपने आप में एक करिश्मा है।

21 जून और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

21 जून को जब सूरज आसमान में सबसे ऊंचा होता है, तब पूरी दुनिया योग की ऊर्जा से भर जाती है। यह दिन है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस। एक ऐसा दिन जो न सिर्फ तन को मजबूत करता है, बल्कि मन को भी शांत करता है। भारतभूमि की इस हजारों साल पुरानी देन को आज दुनिया सिर झुकाकर स्वीकार कर रही है। बताते चलें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह प्रस्ताव रखा था कि योग को एक अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता दी जाए और 177 देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया था। भारत की योग विद्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की इस पहल के सार्थक सुपरिणाम आज सबके सामने हैं। वर्तमान में विश्व के अनेक देश इस सत्य से भली भांति परिचित हो चुके हैं कि योग जीवन संचालन की एक ऐसी शक्ति है, जिसके सहारे तनाव मुक्त जीवन की कल्पना की जा सकती है। अब विश्व एक ऐसे मार्ग पर कदम बढ़ा चुका है, जिसका संबंध सीधे तौर पर व्यक्तिगत तथा सामूहिक उत्थान से है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की आधिकारिक थीम

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है- ‘स्वस्थ उम्र बढ़ाने के लिए योग’ । यह थीम इस बात पर जोर देती है कि योग केवल फिटनेस का माध्यम नहीं, बल्कि बढ़ती उम्र में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य बनाए रखने का प्रभावी तरीका भी है। बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र के साथ होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियों के बीच इस बार की थीम लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवन की दिशा में प्रेरित करने का संदेश देती है।

Topics: Yoga and FitnessScience of Yogayogaimportance of yogabenefits of yogaIndian Yoga TraditionInternational Yoga Day 2026Yoga Day 2026Yoga and Mental Health
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