राहुल गाांधी छात्रों को अपनी राजनीति का मोहरा बना रहे हैं। वैधानिक पद पर होते हुए भी बिना तथ्यों की पुष्टि किए लाखों छात्रों के बीच भ्रम फैलाया। नीट की परीक्षा से महज 48 घंटे पहले उन्होंने नागपुर के अभ्यर्थी को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने एनटीए द्वारा अबू धाबी सेंटर अलॉट किए जाने का भ्रम फैलाया, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।
एनटीए के सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अबू धाबी विकल्प का चयन अभ्यर्थी के स्वयं के registered login से किया गया। इसमें एक ही यूजर द्वारा लगातार एक्सेस किया गया। अभ्यर्थी की login जानकारी के माध्यम से परीक्षा वाले शहर का चयन करने के साथ ही प्रिव्यू भी किया गया।
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा ने नागपुर के एक कैंडिडेट को अबू धाबी में नीट परीक्षा का केंद्र आवंटित करने के मामले में लाखों विद्यार्थियों में अफवाह फैला कर माहौल को खराब करने का प्रयास किया है। एनटीए(NTA) के रिकॉर्ड के अनुसार उस विद्यार्थी द्वारा केंद्र के तौर पर सिंगल-यूज़र एक्सेस पैटर्न से अबू धाबी को अपने रजिस्टर्ड लॉगिन से चुना गया था।
औपचारिक अनुरोध पर 19 जून एनटीए अधिकारी तुरंत हरकत में आए
विद्यार्थी द्वारा परीक्षा केंद्र एग्जामिनेशन सिटी को एक बार अबू धाबी में बदला गया और विद्यार्थी के क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके दो बार प्रीव्यू किया गया। इसके बावजूद 19 जून की शाम को परीक्षा से दो दिन पहले महज एक अनौपचारिक अनुरोध पर NTA अधिकारियों ने तुरंत हरकत में आते हुए विद्यार्थी के पिता से सम्पर्क साधते हुए परीक्षा केंद्र को नागपुर बदल दिया गया।
राहुल गांधी का बयान देखिये
इसके बाद बिना तथ्यों को जाने राहुल गांधी ने 20 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली। इसमें उन्होंने लिखा – 19 जून को सारी बातें तय होने नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था। कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला – अबू धाबी। न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है – क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है? आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है। जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है – उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं। कोटा में मैंने यही कहा था – यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है। हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं – और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
यह है सच्चाई
जबकि सच्चाई यह है कि परीक्षा से केवल दो दिन पहले जब एक अनौपचारिक अनुरोध प्राप्त हुआ तो एनटीए के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने अभ्यर्थी के पिता से संपर्क किया। इसके साथ ही केंद्र को नागपुर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। एनटीए ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि अभ्यर्थियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो इसलिए शहर को करेक्ट करने का विंडो भी खोला। खास बात यह रही कि तीन लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने इसकी सुविधा ली और 99.5 प्रतिशत लोगों को उनके अनुसार शहर मिल गया।
क्या वैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को भ्रम फैलाना चाहिए
इन तथ्यों के जाने बिना ही राहुल गांधी ने अभ्यर्थियों के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश की। किसी वैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को क्या तथ्य जाने बिना भ्रम फैलाना चाहिए। राहुल गांधी कभी जेन जी के नाम पर तो कभी अभ्यर्थियों के नाम पर अपनी राजनीति को चमकाने की कोशिश करते हैं। कम से कम उन्हें युवाओं के सपनों से तो नहीं खेलना चाहिए।
















