उदयपुर। पर्यटकों की पहली पसंद और झीलों की नगरी लेकसिटी (उदयपुर) में सामान्य दिनों में भी ट्रेफिक जाम लगना एक आम बात है। लेकिन दो दिन पहले शहर ने एक ऐसा अभूतपूर्व नजारा देखा जिसने सबको हैरत में डाल दिया। शहर में एक ही दिन में बाहर से 25 हजार से अधिक लोग आए और कार्यक्रम संपन्न होने के बाद अनुशासित ढंग से चले भी गए, लेकिन मजाल है कि कहीं भी स्थानीय शहरवासियों को रेंगते ट्रेफिक या जाम से दो-चार होना पड़ा हो।
महाराणा भूपाल स्टेडियम (गांधी ग्राउंड) में आयोजित राष्ट्र चेतना संकल्प सभा के दौरान स्वयंसेवकों और जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया यातायात प्रबंधन (Traffic Management) आज पूरे देश के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया है।
शोभायात्रा और महासंगम एक साथ, फिर भी अभेद्य रही सुरक्षा व व्यवस्था
गौरतलब है कि प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के तत्वावधान में महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती समारोह के ऐतिहासिक अवसर पर 17 जून को गांधी ग्राउंड में विशाल राष्ट्र चेतना संकल्प सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी थे।
इस महाविशाल सभा में संपूर्ण उदयपुर संभाग सहित राजस्थान व पड़ोसी राज्यों के अन्य शहरों से 25 हजार से अधिक देशभक्त नागरिक पहुंचे थे। सुबह 9 बजे से ही गांधी ग्राउंड में जनसैलाब उमड़ना शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे बाद वापसी का क्रम शुरू हुआ। विशेष बात यह रही कि इसी समयावधि के दौरान शहर के पारंपरिक रूटों पर महाराणा प्रताप जयंती की भव्य और विशाल शोभायात्रा भी निकल रही थी, लेकिन प्रशासनिक सूझबूझ से दोनों आयोजनों के मार्ग बिल्कुल अलग रखे गए, जिससे वाहनों के फंसने जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
रूट चार्ट और पार्किंग व्यवस्था
प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना के अनुसार, बाहर से लगभग 300 बसों और 500 से अधिक छोटे चौपहिया वाहनों के आने का पूर्व अनुमान था। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर के भीतर 6 प्रमुख स्थानों को चिन्हित कर रणनीतिक पार्किंग जोन बनाए गए थे, जिनका विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| वाहनों का प्रकार / आगमन रूट | निर्धारित पार्किंग स्थल (Parking Zone) |
|---|---|
| नाथद्वारा और गोगुन्दा रूट की बसें | फतहपुरा-देवाली मार्ग पर स्थित विद्या भवन का मैदान |
| चित्तौड़, सलूम्बर व खेरवाड़ा रूट के वाहन | राजकीय फतह सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रांगण |
| दुपहिया वाहन (Two Wheelers) | सूचना केन्द्र, मोहता पार्क एवं एमबी अस्पताल मार्ग |
| स्थानीय व अन्य चौपहिया वाहन | फील्ड क्लब, मधुबन, लोक कला मंडल, भट्टजी की बाड़ी और दैत्यमगरी-रेलवे कॉलोनी मार्ग |
| विशिष्ट अतिथि (VIP / VVIP) | लवकुश स्टेडियम परिसर तथा झरिया मार्ग पार्किंग क्षेत्र |
जाम रोकने का अचूक फॉर्मूला: शटल सर्विस और रिवर्स पार्किंग
आयोजन समिति ने जाम की स्थिति से निपटने के लिए दो बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक फॉर्मूले लागू किए थे-
- रिवर्स पार्किंग (Turned Vehicles): सभी पार्किंग स्थलों पर तैनात प्रबंधकों को सख्त निर्देश थे कि गाड़ियों को पहले से ही घुमाकर (Backing/Reverse Face) पार्क कराया जाए। इसका लाभ यह हुआ कि कार्यक्रम समाप्ति के बाद एक साथ हजारों लोगों के निकलने पर किसी भी गाड़ी को मोड़ने में समय बर्बाद नहीं हुआ और गाड़ियां बिना अटके एक के पीछे एक सीधी निकलती चली गईं।
- निर्बाध शटल सेवाएं (Shuttle Services): मुख्य पार्किंग स्थलों (विद्या भवन व फतह स्कूल) से गांधी ग्राउंड तक आगंतुकों को लाने-ले जाने के लिए पर्याप्त अंतराल में शटल बसें व छोटे ई-वाहनों का चक्र चलाया गया। विद्या भवन रूट की शटल सहेलियों की बाड़ी, यूडीए सर्कल होते हुए तथा फतह स्कूल रूट की शटल कुम्हारों का भट्टा, दुर्गा नर्सरी रोड, शास्त्री सर्कल, कोठारी भवन व एमजी कॉलेज होते हुए सीधे आकाशवाणी कार्यालय (ड्रॉप पॉइंट) तक पहुँचीं।
- गोल्फ कार्ट और वाकिंग फ्री वीआईपी रूट: लम्बरदार स्कूल की तरफ से प्रवेश करने वाले गणमान्य जनों के वाहनों को सीधे झरिया मार्ग पार्किंग में ही रोक दिया गया। वहां से आयोजन स्थल के मुख्य द्वार तक बुजुर्गों व अतिथियों के लिए गोल्फ कार्ट (Golf Cart) की निरंतर व्यवस्था रही, जिससे मुख्य द्वार पर गाड़ियों का हुजूम एकत्रित नहीं हुआ।
स्वयंसेवकों के पूर्व-प्रबंधन से बना उदाहरण
इस पूरे यातायात तंत्र को सुचारू बनाए रखने के लिए आयोजन समिति के सवा सौ (125) विशेष प्रबंधक कार्यकर्ता और 60 से अधिक ट्रेंड सुरक्षा गार्ड्स धूप में मुस्तैदी से डटे रहे। पार्किंग स्थलों पर आने वाली हर एक बाहरी गाड़ी का बाकायदा डिजिटल पंजीकरण (Registration) भी किया गया तथा वहाँ पेयजल व बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम रहे।
निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि इस अभेद्य रूट प्लान को तैयार करने से लेकर क्रियान्वयन तक प्रत्येक स्तर पर जिला व पुलिस प्रशासन के साथ हर एक इनपुट साझा किया गया था। प्रशासन ने भी कुछ व्यावहारिक विकल्प सुझाए थे, जिनका पूर्ण सहयोग मिला। कार्यक्रम के सफल समापन के बाद शहर के कई शीर्ष प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से फीडबैक देते हुए कहा कि स्वयंसेवकों का पूर्व-प्रबंधन (Pre-planning) इतना सशक्त और वैज्ञानिक था कि पुलिस प्रशासन को ट्रेफिक व्यवस्था सुचारू रखने के लिए कोई अतिरिक्त मशक्कत नहीं करनी पड़ी। पूरे आयोजन के दौरान आगंतुकों को बैनर लगे वाहनों में कहीं से भी निःशुल्क चढ़ने की सुविधा थी, जिससे आम जनता को भी बेहद सहूलियत रही।

















