ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा के निकट मलकानगिरि में फिर मिला बड़ा माओवादी हथियार जखीरा, 8 दिनों में चार गुप्त ठिकानों का खुलासा
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होम भारत ओडिशा

ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा के निकट मलकानगिरि में फिर मिला बड़ा माओवादी हथियार जखीरा, 8 दिनों में चार गुप्त ठिकानों का खुलासा

ओडिशा के प्रमुख उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों से माओवादी प्रभाव समाप्त होने के बावजूद सुरक्षा बलों को अब भी वर्षों से छिपाकर रखे गए हथियारों, विस्फोटकों और अन्य परिचालन सामग्री के भंडार मिल रहे हैं।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jun 17, 2026, 01:47 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: ओडिशा के प्रमुख उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों से माओवादी प्रभाव समाप्त होने के बावजूद सुरक्षा बलों को अब भी वर्षों से छिपाकर रखे गए हथियारों, विस्फोटकों और अन्य परिचालन सामग्री के भंडार मिल रहे हैं। इसी कड़ी में मलकानगिरि जिले के वन क्षेत्र से एक और बड़ा माओवादी हथियार एवं विस्फोटक जखीरा बरामद किया गया है। पिछले आठ दिनों में राज्य के पूर्व माओवादी गढ़ों से इस तरह की यह चौथी बड़ी बरामदगी है।

हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद
यह बरामदगी एक समय माओवादी संगठनों द्वारा विकसित व्यापक लॉजिस्टिक नेटवर्क की ओर संकेत करती है, साथ ही यह भी दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियां राज्य में लाल आतंक के किसी भी पुनरुत्थान को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह बरामदगी मलकानगिरि जिले के पड़िया क्षेत्र में जिला स्वयंसेवी बल (डीवीएफ) द्वारा चलाए गए खुफिया सूचना आधारित अभियान के दौरान हुई। यह अभियान आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से प्राप्त जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था, जिन्होंने क्षेत्र में छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटकों के ठिकानों की जानकारी दी थी।
खुफिया सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने पड़िया थाना क्षेत्र के सिलाकोटा, पेरवई और केस्कागुड़ा गांवों के जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। यह क्षेत्र ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा के निकट स्थित है तथा सुकमा जिले से सटा हुआ है, जो लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों और आवाजाही का प्रमुख गलियारा रहा है।

तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों ने जमीन के भीतर छिपाकर रखे गए एक बड़े गुप्त भंडार का पता लगाया, जिसमें भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और तकनीकी उपकरण रखे गए थे।
बरामद सामग्री में तीन स्टेन कार्बाइन, एक देशी पिस्तौल, एक एसबीएमएल बंदूक, एक क्षतिग्रस्त 12 बोर बंदूक, पांच आईईडी, 20 अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (यूबीजीएल) ग्रेनेड तथा 53 राउंड 12 बोर कारतूस शामिल हैं। इसके अलावा एक स्नाइपर टेलीस्कोप, बैटरियां, सोलर पैनल, मल्टीमीटर, वेल्डिंग मशीन, वायर कटर तथा विभिन्न प्रकार के विद्युत तार और सहायक उपकरण भी बरामद किए गए। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन सामग्रियों का उपयोग विस्फोटक उपकरणों के निर्माण, रखरखाव और तैनाती के साथ-साथ संचार एवं फील्ड संचालन में किया जाना था।

पुलिस को संदेह है कि यह जखीरा भाकपा (माओवादी) की आंध्र-ओडिशा सीमा विशेष जोनल समिति (एओबीएसजेडसी) से संबंधित था, जो ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय सबसे प्रभावशाली माओवादी इकाइयों में से एक रही है। अधिकारियों के अनुसार हथियारों और विस्फोटकों को बेहद सावधानी से जमीन के नीचे दबाकर रखा गया था ताकि वे सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच सकें। प्रारंभिक जांच से संकेत मिला है कि इनका इस्तेमाल भविष्य में नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए किया जाना था।

खुफिया आधारित अभियानों से मिल रही सफलता
जिला पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मलकानगिरि के पुलिस अधीक्षक विनोद पाटिल ने इस अभियान को जिले में माओवादियों के बचे-खुचे ढांचे को ध्वस्त करने की दिशा में बड़ी सफलता बताया।
उन्होंने कहा कि इस बड़े माओवादी डंप की बरामदगी लगातार चल रहे खुफिया आधारित अभियानों की प्रभावशीलता और आत्मसमर्पण कर चुके कैडरों से प्राप्त सूचनाओं के महत्व को स्पष्ट करता है । ऐसी बरामदगियां नागरिकों और सुरक्षा बलों के लिए संभावित खतरों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करती हैं।

आठ दिनों में चार बड़ी बरामदगियां
यह बरामदगी उस घटना के महज एक सप्ताह बाद हुई है जब मलकानगिरि जिले के माठीली थाना क्षेत्र के किर्मिट्टी और कटुआपदार जंगलों से एक अन्य माओवादी जखीरा बरामद किया गया था। पिछले आठ दिनों में मलकानगिरि, कंधमाल और रायगढ़ा जिलों से चार अलग-अलग माओवादी हथियार एवं विस्फोटक भंडार बरामद किए जा चुके हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन लगातार हो रही बरामदगियों से स्पष्ट होता है कि माओवादियों ने उग्रवाद के चरम दौर में ओडिशा के दूरदराज के वन क्षेत्रों में गुप्त भंडारण केंद्रों का व्यापक नेटवर्क विकसित कर रखा था। इनमें से कई ठिकाने माओवादी गतिविधियों के कमजोर पड़ने के बाद भी वर्षों तक दबे और अनदेखे रहे।

मलकानगिरि का माओवादी गढ़ से बदलाव
मलकानगिरि जिले को 31 मार्च 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप इसे आधिकारिक रूप से माओवादी मुक्त जिला घोषित किया गया था । कभी ओडिशा के सबसे अधिक माओवादी प्रभावित जिलों में शामिल मलकानगिरि में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच दो माओवादियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 23 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों ने इस सफलता का श्रेय लगातार सुरक्षा अभियानों, मजबूत खुफिया तंत्र, विकासात्मक पहलों तथा पुनर्वास कार्यक्रमों को दिया है।

हालांकि जिले को माओवादी मुक्त घोषित किए जाने के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अवशिष्ट नेटवर्क के पुनर्गठन की आशंका को लेकर सतर्क हैं। विशेष अभियान समूह (एसओजी), जिला स्वयंसेवी बल (डीवीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और अभियान तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में नियमित सर्च एवं कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी रहेंगे, ताकि छिपे हुए हथियारों और विस्फोटकों के भंडारों का पता लगाया जा सके तथा किसी भी शेष उग्रवादी ढांचे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

रायगढ़ा और कंधमाल में भी हुई थी बड़ी बरामदगी
13 जून को रायगढ़ा जिले के अंबादला थाना क्षेत्र स्थित धेपागुड़ा आरक्षित वन से डीवीएफ और एसओजी की संयुक्त टीम ने एक .303 राइफल, 37 जिंदा कारतूस, मैगजीन, चार्जर क्लिप, कॉर्डेक्स वायर, बारूद, विस्फोटक सामग्री, माओवादी साहित्य और अन्य सामान बरामद किया था। वहीं 11 जून को कंधमाल जिले के बालिगुड़ा थाना क्षेत्र के तेंगेरी गांव के निकट संयुक्त एसओजी-डीवीएफ अभियान में एक एसएलआर राइफल, दो एसबीजीएल बंदूकें, एक देशी हथियार, ग्रेनेड, डेटोनेटर, विस्फोटक सामग्री और अन्य रसद सामग्री बरामद की गई थी।

9 जून को मलकानगिरि में हुई थी सबसे बड़ी बरामदगी
इससे पहले 9 जून को मलकानगिरि जिले में ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा के निकट जंगलों से हाल के महीनों की सबसे बड़ी माओवादी बरामदगियों में से एक की गई थी। इसमें हथियार, आईईडी, ग्रेनेड, एके-47 मैगजीन, एलएमजी गोला-बारूद, डेटोनेटर और माओवादी प्रचार सामग्री बरामद हुई थी।

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