मनुष्य केवल ज्ञान, तप, यज्ञ आदि से ब्राह्मी-स्थिति को प्राप्त नही कर सकता। उसे वह ‘सयंम’ अर्थात ‘इन्द्रियनिग्रह’ से ही प्राप्त कर सकता है।