जसपाल भट्टी का 'फ्लॉप शो' याद है? मनोरंजन और समाज का आईना है कॉमेडी, अश्लीलता नहीं
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जसपाल भट्टी का ‘फ्लॉप शो’ याद है? मनोरंजन और समाज का आईना है कॉमेडी, अश्लीलता नहीं

अभी जो कॉमेडी शो के माध्यम से अश्लीलता फैल रही है, वह हैरान करने वाली है क्योंकि यह विकृत है। कला का उद्देश्य अश्लीलता या विकृत सोच का विस्तार नहीं होता है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Jun 15, 2026, 08:25 pm IST
inमनोरंजन
आज के कॉमेडी शो में मनोरंजन के नाम पर फैलाई जा रही अश्लीलता

आज के कॉमेडी शो में मनोरंजन के नाम पर फैलाई जा रही अश्लीलता

भारत में साहित्य की समृद्ध परंपरा है। रंगमंच का इतिहास हमें महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भी प्राप्त होता है। यह भारत ही है जहां नाट्यशास्त्र में काव्य की परिभाषा प्रदान की गई और यह भारत ही है जहां शृंगार से भरे संस्कृत काव्य भी रचे गए। भारत में विदूषकों को भी सम्मान मिला। हास्य से मनोरंजन करने वाले भी अपनी कला का परिचय देते थे और समाज में सम्मान प्राप्त करते थे।

परंतु इस परंपरा में कॉमेडी शो का तड़का लगते ही ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ छिन्न-भिन्न हो गया। अभी जो कॉमेडी शो के माध्यम से अश्लीलता फैल रही है, वह हैरान करने वाली है क्योंकि यह विकृत है। कला का उद्देश्य अश्लीलता या विकृत सोच का विस्तार नहीं होता है। कला अपने आप में एक स्वस्थ समाज का निर्माण करती है।

हालांकि लोग यह कह सकते हैं कि कॉमेडी शो में गलत क्या है, जो हो रहा है वही तो बता रहे हैं। मगर 370 रुपए की बिरयानी वाले हिमांशु की बात सुननी चाहिए, जिसमें उन्होंने कहा कि सब लोग ऐसी बातें बोल रहे थे, तो उन्होंने भी एक घटना को बढ़ा-चढ़ाकर बोल दिया, हालांकि वह पूरी तरह से सच नहीं था। पिछले कुछ वर्षों से कॉमेडी के नाम पर फूहड़ता का विस्तार हो रहा है। समय रैना से लेकर अपूर्व मखीजा और उससे पहले एआईबी जैसे शो में जो अश्लीलता फैलाई गई, उसने लोगों को इसके लिए जैसे प्रेरित किया कि वे एक कदम और अश्लील हों और अश्लीलता पर लोग हँसे!

Social Media Double Standard Sejal Pawar 370 Biryani Controversy
आजकल के कॉमेडी शो में मनोरंजन के नाम पर फैलाई जा रही अश्लीलता

जब ये कॉमेडी शो आयोजित किये जाते हैं, तो क्या इसमें कंटेंट पर बात नहीं होती? क्या आयोजक यह नहीं देखते कि जो भी कॉमेडी करने आ रहा है, वह क्या बोलेगा या फिर केवल भीड़ जुटाना ही उद्देश्य होता है?

India’s Got Latent में अपूर्वा मखीजा ने एक प्रतियोगी की मां को लेकर जो अश्लील टिप्पणी की थी, वह भी लोगों को याद ही होगी। उस समय वहां समय रैना, जसप्रीत सिंह और आशीष चंचलानी भी मौजूद थे। एआईबी ने गालियों और यौन मजाक को सहज बनाया, जिससे पारिवारिक दर्शक असहज हुए हैं।

भारत में स्वस्थ हास्य और जसपाल भट्टी

जब भी हास्य की बात होती है तो जसपाल भट्टी को कौन भूल सकता है। टीवी पर उनके आते ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान फैल जाती थी। वे सूक्ष्मता से हास्य और समाज एवं सरकार की विसंगतियों को एक साथ लाते थे। उनका शो “फ्लॉप शो” आज तक लोगों को हंसाता और गुदगुदाता है। बिजली विभाग, अस्पताल, सरकारी दफ्तर और यहाँ तक कि विज्ञापनों तक पर भी उन्होनें चोट की, मगर उनके शोज मे गरिमा रही। पूरा परिवार आज भी उसे देखता है।

ऐसे तमाम शो भारत में हुए हैं और लगातार होते रहे हैं। हास्य कवियों की लंबी परंपरा रही है। काका हाथरसी की कविताओं को कैसे कोई भूल सकता है। काका कहते –

हँसी वही जो सबको भाए,
व्यंग्य वही जो सच दिखाए।

मगर क्या आज हंसी वह है जो सबको भा रही है? ऐसा नहीं था कि उन्होनें चोट नहीं की। पत्रकारों पर उन्होंने कितनी जबरदस्त चोट की है-

पत्रकार दादा बने, देखो उनके ठाठ।
काग़ज़ का कोटा झपट, करें एक के आठ॥

करे एक के आठ, चल रही आपाधापी।
दस हज़ार बतलाय, छपें ढाई सौ कापी॥

विज्ञापन दे दो तो, जय-जयकार कराए।
मना करो तो उल्टी-सीधी न्यूज़ छपाए॥

सुरेन्द्र शर्मा की चुटीली कविताएं कौन भूल सकेगा? पति और पत्नी पर उन्होंने खूब लिखा।

घराली बोली-
‘एजी!
ऊपर की बर्थ पे कैंया जाऊं
डर लागै है, गिर जाऊंगी।’

मैं बोल्यो- ‘री भागवान!
थै ऊपर नै तो जाओ,
थारे जाते ही
बर्थ नीचै आ जावेगी।’

भारत की हास्य परंपरा में अश्लीलता नहीं थी। प्राचीन काल से लेकर वर्तमान में सुरेन्द्र शर्मा तक हास्य एवं व्यंग्य की एक धारा रही है, जिसने समाज को स्वस्थ हास्य दिया है। परंतु भारत जैसे कला प्रेमी देश में, कला संरक्षक समाज में और मूल्यों वाली कला का सम्मान करने वाले समाज में अश्लील कॉमेडी ने कैसे घर-घर में स्थान बना लिया है, यह बात हैरान करने वाली है और ठहर कर सोचने वाली भी।

 

Topics: कॉमेडी शोजसपाल भट्टीसुरेंद्र शर्माकाका हाथरसी370 रुपये की बिरयानीहिमांशु
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