पिछले 100 वर्षों से RSS केवल भारत के कल्याण और भलाई के लिए काम कर रहा है- डॉ. मोहन भागवत जी
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पिछले 100 वर्षों से RSS केवल भारत के कल्याण और भलाई के लिए काम कर रहा है- डॉ. मोहन भागवत जी

सरसंघचालक जी ने कहा कि विविधता मानवीय जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है, और विविधता के बीच लोगों को जोड़ने वाला तत्व धर्म है। उन्होंने समझाया कि हिंदू धर्म में मानवीय मूल्य शामिल हैं जो दुनिया के कल्याण में योगदान करते हैं।

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Mahak Singh
Jun 15, 2026, 05:14 pm IST
inभारत
RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि RSS राजनीतिक सत्ता पाने या किसी के खिलाफ काम नहीं कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह संगठन न तो राजनीतिक सत्ता के लिए और न ही किसी व्यक्ति, समूह या धर्म के खिलाफ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले सौ सालों से RSS सिर्फ़ भारत के कल्याण और भलाई के लिए, और उसके ज़रिए दुनिया के कल्याण के लिए काम कर रहा है।

हिंदुत्व: विविधता में एकता का सांस्कृतिक दृष्टिकोण

RSS धर्म, जाति, क्षेत्र या भाषा के आधार पर किसी को भी बाहरी नहीं मानता। उसका नज़रिया है कि सब एक हैं। उन्होंने कहा कि “हिंदुत्व” शब्द भारत की जीवंत परंपरा को बताता है, और उस अर्थ में, हम सभी हिंदू हैं। जो लोग किसी भी धर्म या ईश्वर के किसी भी रूप में विश्वास करते हैं, वे भी इस सांस्कृतिक अर्थ में हिंदू ही हैं। वे “RSS के 100 साल” विषय पर आमंत्रित लोगों के सामने बोल रहे थे। सरसंघचालक जी ने कहा कि विविधता मानवीय जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है, और विविधता के बीच लोगों को जोड़ने वाला तत्व धर्म है। उन्होंने समझाया कि हिंदू धर्म में मानवीय मूल्य शामिल हैं जो दुनिया के कल्याण में योगदान करते हैं। ये मूल्य ही सभी अंतरों के बावजूद भारत की ताकत और एकता का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि सत्य, करुणा, पवित्रता और संयम धर्म के आधार हैं। धर्म पूजा के किसी खास तरीके से नहीं जुड़ा है। सकारात्मक सामाजिक बदलाव तब आता है जब समाज में ऐसे मूल्यों को अपनाने वाले लोग हों। उन्होंने कहा कि RSS के काम का मकसद हर गाँव में ऐसे लोगों को तैयार करना है। उन्होंने आगे कहा कि RSS की मुख्य गतिविधि अपनी रोज़ाना की शाखाएँ चलाना है। इन गतिविधियों से तैयार हुए लोग आगे चलकर अलग-अलग क्षेत्रों में सामाजिक बदलाव के लिए काम करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में गतिविधियाँ पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से की जाती हैं, और RSS उन पर नियंत्रण नहीं रखता। उन्होंने कहा कि सेवा भारती जैसे संगठन भी स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। RSS से मिलने वाली वैचारिक प्रेरणा के अलावा, अलग-अलग संगठनों में किसी पर भी कोई और नियंत्रण नहीं रखा जाता।

RSS: अनुभव और सेवा के आधार पर समझने का आह्वान

डॉ. मोहन भागवत जी ने अपना भाषण यह कहते हुए समाप्त किया कि RSS को सिर्फ़ दूर से देखकर और आलोचना करके नहीं समझा जा सकता। कोई भी आकर इसे देख सकता है और अंदर से समझ सकता है। ऐसा करने में कोई रुकावट नहीं है। उन्होंने कहा कि RSS को उसकी गतिविधियों और उसके स्वयंसेवकों के जीवन के ज़रिए समझा जाना चाहिए। हिंदुत्व भारत की एक जीवित सभ्यतागत परंपरा है, न कि सिर्फ़ एक धर्म। हिंदवी ईसाई और हिंदवी मुसलमान इस परंपरा का अहम हिस्सा हैं। संघ अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के बीच कोई फ़र्क नहीं करता; वह सभी को एक समान मानता है। हमारी संस्कृति राज्य-केंद्रित नहीं, बल्कि समाज-केंद्रित है। जो कोई भी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ रहता है और सभी के भले के लिए निस्वार्थ भाव से काम करता है, वह स्वयंसेवक है। RSS में सदस्यता की कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा RSS के रजिस्ट्रेशन पर ज़ोर दिए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन पिछले सौ सालों से बिना रजिस्ट्रेशन के काम कर रहा है और आगे भी ऐसा ही करता रहेगा। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन की मांग पूरी तरह से राजनीतिक है और ज़्यादा समय तक नहीं टिकेगी। RSS को लेकर फैली कई गलतफहमियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “आइए, हमें देखिए, हमें समझिए और फिर हमारे बारे में अपनी राय बनाइए।” उन्होंने कहा कि संगठन को केवल इसके काम और स्वयंसेवकों के जीवन के प्रत्यक्ष अनुभव से ही समझा जा सकता है।

Topics: what is hindutvaMohan Bhagwat's speechthe objective of the SanghRSS and politicsrole of the RSS in Indiawhat is an RSS Shakhathe true meaning of HindutvaRSSideology of the RSS organizationRSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी
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