लद्दाख

लद्दाख का युरु काबग्यात उत्सव: आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक बौद्ध विरासत का अनूठा महापर्व

लद्दाख के ऐतिहासिक लामायुरु मठ में दो दिवसीय भव्य 'युरु काबग्यात' उत्सव का आयोजन किया गया। द्वितीय बुद्ध गुरु पद्मसंभव को समर्पित इस महापर्व में छाम (मुखौटा) नृत्य मुख्य आकर्षण रहा।

Published by
अभय कुमार

हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसा लद्दाख केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध बौद्ध विरासत के लिए भी जाना जाता है। युरु काबग्यात लद्दाख के सबसे प्रमुख और भव्य मठवासी त्योहारों में से एक है, जो हर साल जून-जुलाई में लेह से लगभग 127 किमी दूर स्थित ऐतिहासिक लामायुरु मठ (युरु गोम्पा) में मनाया जाता है।

लामायुरु मठ में आयोजित होता है भव्य उत्सव

लद्दाख के ऐतिहासिक लामायुरु मठ में हर वर्ष आयोजित होने वाला युरु काबग्यात आध्यात्मिकता, आस्था, संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम है। 11वीं शताब्दी में स्थापित यह मठ “मूनलैंड ऑफ लद्दाख” के नाम से प्रसिद्ध है। यह दो दिवसीय बौद्ध उत्सव गुरु पद्मसंभव और धर्म के रक्षकों को समर्पित माना जाता है।

गुरु पद्मसंभव को समर्पित है यह पर्व

यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि लद्दाख की सदियों पुरानी परंपराओं, कला, संस्कृति और आध्यात्मिक दर्शन का भी अनूठा संगम है। यह उत्सव मुख्य रूप से गुरु पद्मसंभव और धर्म के रक्षकों को समर्पित माना जाता है। बौद्ध मान्यता के अनुसार गुरु पद्मसंभव ने हिमालयी क्षेत्रों में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उन्हें द्वितीय बुद्ध के रूप में सम्मान दिया जाता है।

छाम नृत्य बनता है आकर्षण का केंद्र

उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण छाम नृत्य है, जो सबका मन मोह लेता है। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और विशाल मुखौटों से सुसज्जित भिक्षु धार्मिक नृत्य प्रस्तुत करते हैं। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक तिब्बती वाद्य यंत्रों की धुन पर होने वाला यह नृत्य अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश देता है।

धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थनाओं का विशेष महत्व

उत्सव के दौरान विशेष प्रार्थनाएं, मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं। इसमें श्रद्धालु प्रार्थना चक्र घुमाकर शांति, समृद्धि और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु

युरु काबग्यात उत्सव में भारत से ही नहीं, बल्कि भूटान, जापान, कोरिया और अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह उत्सव लद्दाख के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा देता है।

लद्दाख की जीवंत पहचान का उत्सव

आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को संजोए युरु काबग्यात केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि लद्दाख की जीवंत पहचान का उत्सव है।

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