वृंदावन (ब्रज प्रांत) । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का भव्य प्रकट (समापन) समारोह अत्यंत गरिमामय और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। इस आवासीय प्रशिक्षण वर्ग में ब्रज प्रांत के विभिन्न जिलों से आए स्वयंसेवक शिक्षार्थियों ने कड़े अनुशासन के बीच राष्ट्र सेवा और संगठन कौशल की बारीकियों को सीखा।
प्रकट समारोह के दौरान स्वयंसेवकों के अनुशासित कदमताल और शारीरिक कौशल के प्रदर्शन को देखकर कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय मंत्रमुग्ध हो उठा।

संघ शिक्षा वर्ग का स्वरूप
15 दिनों तक चले इस सघन प्रशिक्षण वर्ग की मुख्य सांख्यिकी और सीखे गए सांगठनिक व शारीरिक विषयों का विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| प्रशिक्षण का आयाम | विवरण एवं मुख्य गतिविधियाँ |
|---|---|
| शिक्षार्थियों की संख्या | 146 स्वयंसेवक शिक्षार्थी |
| प्रशिक्षण की अवधि | 15 दिवसीय सघन आवासीय वर्ग |
| शारीरिक विधाएं (Physical) | योग, व्यायाम, आसन, दण्ड संचालन, नियुद्ध (आत्मरक्षा तकनीक) और विभिन्न व्यूह रचनाओं का व्यावहारिक अभ्यास। |
| बौद्धिक विकास (Intellectual) | प्रातः जागरण के बाद एकात्मता स्रोत, अमृत वचन तथा प्रतिदिन राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने के लिए होने वाली संघ प्रार्थना के माध्यम से राष्ट्र सेवा के भाव को सुदृढ़ करना। |

समारोह का शुभारंभ घोष (बैंड) की सुमधुर ध्वनि के साथ परम पवित्र भगवा ध्वज के आरोहण से हुआ। इसके पश्चात शिक्षार्थियों ने योग, व्यायाम, आसन, नियुद्ध और दण्ड प्रहार की विधाओं का उत्कृष्ट सामूहिक प्रदर्शन किया।
“जैसे बिना खाए गुड़ का स्वाद नहीं जाना जा सकता, वैसे ही बिना शाखा आए संघ को नहीं समझा जा सकता”
प्रकट समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी ने स्वयंसेवकों और प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित किया। उन्होंने संघ की कार्यपद्धति को बहुत ही सरल उदाहरण के माध्यम से समझाया-
“संघ को अगर समझना है तो संघ की शाखा में आना ही पड़ेगा। ठीक वैसे ही जैसे गुड़ और चीनी दोनों का स्वाद मीठा होता है, लेकिन बिना खाए कोई व्यक्ति उनके बारीक अंतर को नहीं बता सकता। आज पूरे देश में 96 हजार स्थानों पर संघ का कार्य चल रहा है, लेकिन भारत के प्रत्येक गाँव तक पहुँचने के लिए हमें अभी और राष्ट्रभक्तों की आवश्यकता है। संघ का कार्य 100 वर्ष के बाद भी युवा है, क्योंकि हमारी कार्यपद्धति ‘नित नूतन, चिर पुरातन’ है।” – श्री महेंद्र जी, क्षेत्र प्रचारक

उन्होंने भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता पर बल देते हुए कहा कि हिंदू कभी भी सांप्रदायिक नहीं हो सकता, क्योंकि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट किया है कि हिंदू धर्म को किसी एक पूजा पद्धति में नहीं बांधा जा सकता। दुनिया जब भी दर्शनशास्त्र का अध्ययन करना चाहेगी, उसे भारत की शरण में आना ही होगा। भारत मूलतः हिंदुओं का देश है, इसे ‘मिश्रित देश’ कहना सर्वथा अनुचित है।
शताब्दी वर्ष में ‘पंच परिवर्तन’ और नागरिक कर्तव्यों का संकल्प
क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी ने संघ के समाज सुधार एजेंडे के अंतर्गत ‘पंच परिवर्तन’ के विषयों को विस्तार से समाज के सामने रखा:
- पर्यावरण संरक्षण: प्रत्येक नागरिक को पेड़ लगाने और पॉलीथिन (प्लास्टिक) के उपयोग से पूरी तरह दूर रहने का संकल्प लेना होगा।
- स्वदेशी और मातृभाषा: दैनिक जीवन में अपनी मातृभाषा का गौरव गान करने और स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जिसे आज की युवा पीढ़ी को अपनाना होगा।
- नागरिक कर्तव्य: राष्ट्र की संपत्ति की सुरक्षा और संरक्षण का भाव रखते हुए अनुशासित जीवन जीना होगा।
- सामाजिक समरसता: समाज के भीतर से जाति-पांति के संकीर्ण भेदभाव को पूरी तरह मिटाकर एकात्म भाव से कार्य करना होगा।
“सेना और संघ दोनों में राष्ट्र सेवा और दृढ़ता समान” : लेफ्टिनेंट जनरल मनोज यादव
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मनोज के. एस. यादव ने स्वयंसेवकों के अनुशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यहाँ आकर वे अत्यंत गर्व का अनुभव कर रहे हैं। संघ के स्वयंसेवकों ने देश में राष्ट्र सेवा और समाज में उच्च अनुशासन स्थापित करने का अनुकरणीय कार्य किया है।

उन्होंने देश की रक्षा, दृढ़ता और निस्वार्थ राष्ट्र सेवा के मोर्चे पर भारतीय सेना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक समानता पर विशेष प्रकाश डाला।
मंच पर प्रतिष्ठित जनों एवं पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति
इस प्रकट समारोह में मंच पर मुख्य वक्ता और मुख्य अतिथि के साथ वृंदावन जिले के जिला संघचालक दास बिहारी जी और वर्ग सर्वाधिकारी राजकुमार जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिकों, मातृशक्ति और प्रबुद्ध जनों ने सहभागिता की।

विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र के पूज्य संतों का सानिध्य और आशीर्वाद इस कार्यक्रम को प्राप्त हुआ, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
- स्वामी देव स्वरूपानन्द जी
- जगतगुरु भैया दास जी महाराज
- आचार्य शैल बिहारी दास जी महाराज
- विज्ञानाचार्य जी महाराज
- आचार्य अनुराग दास जी महाराज
- कृष्णानंद जी महाराज
- ब्रज रसिक बिहारी दास जी महाराज
प्रशासनिक एवं सांगठनिक सहयोगियों की उपस्थिति
समारोह को सफल बनाने में वर्ग पालक महावीर जी, प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र जी, संस्कृत भारती के राष्ट्रीय पदाधिकारी बांके लाल गौड़ जी, प्रांत प्रचार प्रमुख कीर्ति जी, प्रांत प्रचारक प्रमुख प्रीतम जी, प्रांत बौद्धिक प्रमुख नरेंद्र जी, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी, मंत्री हरिशंकर जी, विधायक पूरन प्रकाश, ठाकुर कारिंदा सिंह, विभाग प्रचारक पारस पार्थ जी, विभाग कार्यवाह छैल बिहारी जी, डॉ. संजय जी, विभाग प्रचार प्रमुख एवं समापन कार्यक्रम प्रमुख डॉ. कमल कौशिक जी, अरुण दीक्षित, कुश अवतार, कुश चाहर, ब्रजेश, शिवकुमार, राम पाठक और अजय अग्रवाल सहित सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।














