लंदन/पीटरबरो। पूर्वी इंग्लैंड (East of England) में रहने वाले सनातन धर्मावलंबियों के मुख्य पूजा स्थल को लेकर ब्रिटिश प्रशासनिक तंत्र का एक पक्षपातपूर्ण और दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय सामने आया है।
पीटरबरो सिटी काउंसिल द्वारा ‘भारत हिंदू समाज’ (Bharat Hindu Samaj) मंदिर की जमीन का मालिकाना हक (फ्रीहोल्ड) एक इस्लामिक संगठन को बेचे जाने के फैसले को ब्रिटिश हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
अदालत को बताया गया है कि काउंसिल का यह कदम पूरी तरह से ‘अवैध’ था और इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त (Quash) किया जाना चाहिए। वर्ष 1986 से इस स्थान पर स्थापित यह ऐतिहासिक मंदिर अब प्रशासनिक उदासीनता और गलत नीतियों के कारण अपने ही घर से बेदखल होने के कगार पर खड़ा है।
इस्लामिक संगठन के पक्ष में हुआ संदेहास्पद सौदा
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पीटरबरो सिटी काउंसिल की कैबिनेट ने इसी वर्ष फरवरी में रॉक रोड स्थित इस मंदिर परिसर की फ्रीहोल्ड जमीन को ‘यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन’ (UKIM) नामक संगठन को बेचने का फैसला कर लिया। मंदिर प्रबंधन का आरोप है कि काउंसिल की इस पूरी निर्णय प्रक्रिया में “गंभीर कमियां और विसंगतियां” थीं।
अदालत में हिंदू मंदिर का पक्ष रख रहे बैरिस्टर टोबी फिशर (Toby Fisher) ने लिखित दलीलों में स्पष्ट किया कि वे इस्लामिक संगठन या उसकी बोली की आलोचना नहीं कर रहे हैं, बल्कि काउंसिल की भेदभावपूर्ण और दोषपूर्ण प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने अदालत के सामने काउंसिल और इस्लामिक मिशन के बीच हुए सौदे के कुछ चौंकाने वाले तथ्य रखे-
“भारत हिंदू समाज मंदिर प्रबंधन वर्ष 2017 से ही इस साइट के हस्तांतरण को लेकर काउंसिल के साथ लगातार बातचीत कर रहा था। लेकिन पिछले साल, काउंसिल ने अचानक इस साइट के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ और अंतिम’ बोलियां आमंत्रित कर लीं।
यह कदम तब उठाया गया जब काउंसिल को एक साल पहले यूकेआईएम (UKIM) से एक प्रस्ताव मिला था।
इस प्रस्ताव में इस्लामिक संगठन ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि वह ‘किसी भी मौजूदा नकद प्रस्ताव को 5% तक मात दे देगा’ और यह भी साफ कर दिया था कि ‘वहाँ प्रस्तावित एकमात्र धार्मिक सुविधाएं केवल मुस्लिम समुदाय के लिए होंगी।’“
काउंसिल पर ‘अवैध’ फैसले और कानून के उल्लंघन का आरोप
बैरिस्टर फिशर ने कोर्ट को बताया कि पीटरबरो काउंसिल के अधिकारियों के तर्क बेहद दोषपूर्ण थे, जिनका कैबिनेट ने “आंखें मूंदकर” पालन किया। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक शक्तियों का अवैध हस्तांतरण है।
इसके अतिरिक्त, यह दलील भी दी गई कि काउंसिल का यह कदम ब्रिटेन के ‘इक्वालिटी एक्ट 2010’ (समानता अधिनियम) का सीधा उल्लंघन है। क्योंकि इस फैसले के कारण हिंदुओं के इस इकलौते मुख्य मंदिर के बंद होने का समाज पर “विनाशकारी प्रभाव” पड़ेगा।
दोनो पक्षों की स्थिति का तुलनात्मक विवरण:
- भारत हिंदू समाज मंदिर: पूर्वी इंग्लैंड के इस पूरे क्षेत्र में हिंदुओं का यह एकमात्र मुख्य और ऐतिहासिक पूजा स्थल है। जमीन छिन जाने की स्थिति में स्थानीय हिंदू समाज के पास पूजा-अर्चना के लिए कोई भी वैकल्पिक परिसर या स्थान उपलब्ध नहीं है।
- यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन (UKIM): इसके विपरीत, जमीन खरीदने वाले इस संगठन के पास पहले से ही पूरे ब्रिटेन में लगभग 40 केंद्र और 60 से अधिक शाखाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।
काउंसिल का बचाव और अदालत का रुख
दूसरी तरफ, पीटरबरो सिटी काउंसिल और यूकेआईएम (UKIM) इस कानूनी चुनौती का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। स्थानीय प्राधिकरण के वकीलों का कहना है कि मंदिर के तर्कों में कोई दम नहीं है और इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए।
काउंसिल की ओर से पेश बैरिस्टर कैथरीन रोलैंड्स (Catherine Rowlands) ने अदालत में दलील दी कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित करे कि कैबिनेट को गुमराह किया गया था।
उन्होंने कहा कि यह संपत्ति हिंदू समुदाय के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, इसका काउंसिल को पूरा अहसास था और कई वर्षों के संवाद तथा एक पारदर्शी, निष्पक्ष और कानूनी निविदा (Bidding) प्रक्रिया के बाद ही यह निर्णय लिया गया है।
उनके अनुसार, काउंसिल ने कानून के दायरे में रहकर और सभी संवेदनशीलताओ को ध्यान में रखकर ही यह कदम उठाया है।
इस पूरे गंभीर मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के न्यायाधीश मिस्टर जस्टिस मॉरिस (Mr Justice Morris) की अदालत में चल रही है।
अदालत इस सप्ताह के अंत तक दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद अपना लिखित फैसला सुरक्षित रख सकती है, जिसके बाद ही तय होगा कि पूर्वी इंग्लैंड के हिंदू समाज को न्याय मिलेगा या उनकी आस्था प्रशासनिक हठधर्मिता की भेंट चढ़ जाएगी।















