सरकार अगले महीने परिसीमन (सीटों की सीमा तय करने) की प्रक्रिया शुरू करने वाली है। उसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने एक वर्किंग पेपर में कहा है कि पूरे देश में एक समान तरीके से नहीं, बल्कि टारगेटेड (लक्षित) तरीके से 170 बड़ी लोकसभा सीटों को बांटा जाए। इससे लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 824 हो जाएंगी।
परिषद की सदस्य शमिका रवि और भारतीय सांख्यिकी संस्थान के मुदित कपूर ने यह पेपर लिखा है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि 59 सीटों को दो-दो हिस्सों में बांटा जाए और 111 सीटों को तीन-तीन हिस्सों में बांटने की सिफारिश की गई है। इस बदलाव से अगले आम चुनाव में वोटर टर्नआउट 0.3 से 2.3 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। यानी 90 लाख से 2.3 करोड़ अतिरिक्त लोग वोट डाल सकते हैं।
किस राज्य में कितनी सीटें बंटेंगी?
दो-दो हिस्सों वाली 59 सीटों में से 22 सीटें केरल और तमिलनाडु की हैं। जबकि तीन-तीन हिस्सों वाली 111 सीटों में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश (17), महाराष्ट्र (12), बिहार (10) और पश्चिम बंगाल (10) शामिल हैं।
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नए राज्यों में सीटों की संख्या
दक्षिण के राज्य:
तेलंगाना: 17 से बढ़कर 26
आंध्र प्रदेश: 25 से बढ़कर 38
कर्नाटक: 28 से बढ़कर 42
तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 59
केरल: 20 से बढ़कर 30
उत्तर और पश्चिम के राज्य:
- महाराष्ट्र: 48 से बढ़कर 72
- राजस्थान: 25 से बढ़कर 38
- उत्तर प्रदेश: 80 से बढ़कर 120
- मध्य प्रदेश: 29 से बढ़कर 44
- गुजरात: 26 से बढ़कर 39
- बिहार: 40 से बढ़कर 60
संतुलन कैसे बनेगा?
इस फॉर्मूले से दक्षिण राज्यों का लोकसभा में हिस्सा लगभग वही रहेगा — 23.6% से 23.7%। वहीं उत्तर और पश्चिम के राज्यों का हिस्सा 45.2% से 45.6% के आसपास रहेगा। यानी बड़े बदलाव के बावजूद दक्षिण और उत्तर का संतुलन बना रहेगा।
दिक्कत कहां है?
2024 के चुनाव में औसत लोकसभा क्षेत्र में 18.2 लाख मतदाता थे। कुछ सबसे बड़ी सीटों पर 32 लाख से ज्यादा मतदाता थे। इतने बड़े क्षेत्र में हर वर्ग की आवाज ठीक से नहीं पहुंच पाती। आदिवासी (ST) वाली सीटों पर वोटिंग सबसे ज्यादा हो रही है।
बड़े शहरों वाली सीटों पर टर्नआउट कम हो रहा है, खासकर महिलाओं का।
क्या उपाय सुझाए गए?
पेपर में शहरों में महिलाओं के लिए अलग मतदान केंद्र बनाने, मतदान का समय शाम तक बढ़ाने और परिवहन की बेहतर व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है।












