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होम भारत

परिसीमन और दक्षिणी राज्यों का बढ़ता प्रतिनिधित्व

परिसीमन पर विपक्ष की अफवाहों को अमित शाह ने आंकड़ों के साथ खारिज कर दिया। दक्षिण भारत के पांच राज्यों की लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। मोदी की गारंटी- कोई भेदभाव नहीं।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Apr 17, 2026, 09:33 am IST
in भारत
भारत की संसद

भारत की संसद

विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस पार्टी द्वारा परिसीमन के नाम पर दक्षिण भारत के राज्यों को लेकर बड़ी मनगढ़ंत आशंकाएं खड़ी की गई। इन दलों ने दक्षिण के राज्यों को सीट आवंटन के मामले में भड़काने की पूरी कोशिश की। लेकिन, विपक्ष के इस पूरे मंशा को प्रधानमंत्री  मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने धराशायी कर दिया है। मोदी ने अपनी गारंटी दी और कहा कि दक्षिण के राज्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने बकायदा आंकड़ों के साथ बताया कि नए परिसीमन के बाद दक्षिण के राज्यों की लोकसभा सीटें पहले से भी ज्यादा बढ़ेंगी।

दक्षिण के राज्यों को होगा लाभ

दक्षिण भारत के पांचों राज्यों को नए परिसीमन विधेयक पारित होने से अच्छा खासा लाभ मिलेगा। वर्तमान में 543 सीटों में दक्षिण के पांच राज्यों से 129 सांसद हैं, लेकिन परिसीमन के बाद ये बढ़कर 195 सीट हो जाएगी। अगर केंद्रशासित पुडुचेरी में एक से अधिक  सांसद होंगे।

पिछले कुछ दिनों से लगातार परिसीमन को लेकर विवाद पैदा किया जा रहा है। ऐसे में इस राजनीतिक विवाद के बीच आवश्यक है कि  देशवासी परिसीमन की प्रक्रिया को समझें और किसी बहकावे में ना आएं। आजादी के बाद से ही इस देश में परिसीमन की व्यवस्था रही है। दरअसल, परिसीमन समय-समय पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाओं को दोबारा से तय करने की एक प्रक्रिया है। भारत के इतिहास में परिसीमन आयोग का गठन चार बार 1952, 1963, 1973 और 2002 में किया जा चुका है।

आजादी के दशकों बाद लोकसभा की सीटों में होगी बढ़ोत्तरी

आजादी के बाद के दशकों में परिसीमन के परिणाम स्वरूप लोकसभा सीटों की संख्या में सीधे तौर पर बढ़ोतरी हुई। जैसे 1951 की जनगणना के बाद सीटों की संख्या 489 से बढ़कर 494 हो गई थी। 1961 की जनगणना के बाद यह संख्या बढ़कर 522 हो गई। 1971 की जनसंख्या के जो जनगणना हुई उसके बाद में बढ़कर मौजूदा संख्या 543 तक हो गई थी जो आज भी बरकरार है। 1976 में आपातकाल के दौरान जब देश में आपातकाल लगा था तब 42वें संवैधानिक संशोधन के जरिए एक बड़ा बदलाव किया गया। इंदिरा गाँधी सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देने के लिए 2001 तक लोकसभा सीटों की संख्या को बढ़ने पर रोक लगाने का फैसला किया। जिससे सीटें नहीं बढ़ाई जा सकती थी। 2001 में 84वें संशोधन के जरिए इस रोक को 2026 तक बढ़ा दिया गया था।  जनसंख्या अवश्य बढ़ती रही, मगर सीटों की संख्या में कोई भी बदलाव नहीं हुआ था।

मोदी सरकार संविधान में संशोधन कर परिसीमन आयोग बनाएगी। इसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे और परिसीमन आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र को दोबारा तय करेगा। सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी और नक्शे भी बदल जाएंगे।

Topics: अमित शाह परिसीमन बयानIncrease in Lok Sabha Seats.दक्षिण राज्यों की लोकसभा सीटेंमोदी गारंटी परिसीमन दक्षिण भारतकांग्रेस परिसीमन विवाद दक्षिणलोकसभा सीटें बढ़ोतरी2026 DelimitationSouth India Lok Sabha SeatsAmit Shah's Statement on DelimitationLok Sabha Seats of Southern Statesपरिसीमन 2026Modi's Guarantee on Delimitation in South Indiaदक्षिण भारत लोकसभा सीटेंCongress-Delimitation Controversy in the South
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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