‘टोप कट्यो सर धड़ कट्यो, जीणा जामण साथ। असी धरा ऐसी धसी, जो नागण जोड़े हाथ।’
उदयपुर । हल्दीघाटी युद्ध में मुगल सेनापति बहलोल खां को उसके घोड़े सहित दो टुकड़ों में काट देने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की शूरवीरता को बयां करती डॉ. देवकरण सिंह राठौड़ की ये पंक्तियां आज भी रोंगटे खड़े कर देती हैं। यह इतिहास गवाह है कि हल्दीघाटी के युद्ध में शूरवीरों की हुंकार ने मुगल सेना को पीछे भागने पर मजबूर कर दिया था।
इसी ऐतिहासिक विजय की गौरव गाथा को मेवाड़-वागड़ के घर-घर तक पहुंचाने का महाअभियान शुरू हो चुका है।
आयोजन का संक्षिप्त विवरण (Event Overview)
हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले (राष्ट्र चेतना संकल्प सभा) इस भव्य कार्यक्रम की रूपरेखा आप नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं-
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कार्यक्रम का नाम | विशाल राष्ट्र चेतना संकल्प सभा (हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु:शती समारोह) |
| मुख्य वक्ता | डॉ. मोहन भागवत जी (सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) |
| दिनांक और समय | 17 जून, प्रातः 09:30 बजे से |
| मुख्य आयोजन स्थल | महाराणा भूपाल स्टेडियम (गांधी ग्राउंड), उदयपुर |
मेवाड़-वागड़ के गांव-गांव में गूंज रहा ‘राणा की जय-जय’ का उद्घोष
प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत संचालित ‘प्रताप गौरव केन्द्र राष्ट्रीय तीर्थ’ के कार्यकर्ता इन दिनों हल्दीघाटी गौरव गाथा के पत्रक बांटने के साथ ही लोगों को 17 जून की सभा में आने का न्योता दे रहे हैं।
उदयपुर शहर के साथ-साथ संभाग के विभिन्न गांवों और कस्बों में कार्यकर्ताओं की टोलियां निकल रही हैं। पत्रक वितरण के दौरान पूरा माहौल ‘राणा की जय—जय, शिवा की जय—जय’ के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो रहा है।
उदयपुर के बेदला क्षेत्र स्थित समता नगर में पुष्कर जोशी, केसूलाल जोशी, अशोक कोठारी, सुभाष जोशी, कमल सोनी, कनिष्क जोशी और मातृशक्ति सहित कई कार्यकर्ताओं ने जनसंपर्क कर सभा का आमंत्रण दिया।
ग्रामीणों की मांग : “नए परिसीमन में हो ‘हल्दीघाटी विधानसभा’ का नाम”
इस गौरवशाली अवसर पर स्थानीय स्तर पर एक अनोखी मांग भी उठने लगी है। हल्दीघाटी-बड़गांव क्षेत्र के समीपवर्ती गांवों के ग्रामीणों और युवाओं ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को एक पत्र सौंपा है।
क्षेत्र के समाजसेवी शंभू सिंह गमेती ने बताया कि क्षेत्रवासियों की यह तीव्र इच्छा है कि आगामी नए परिसीमन में हल्दीघाटी क्षेत्र जिस भी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत शामिल किया जाए, उस पूरी सीट का नाम स्थायी रूप से ‘हल्दीघाटी विधानसभा’ रखा जाए, ताकि यह ऐतिहासिक नाम सदा के लिए राजनीतिक पटल पर अंकित हो सके।

पार्किंग से कार्यक्रम स्थल तक चलेगी ई-रिक्शा सेवा
समारोह के संयोजक सीए महावीर चपलोत ने बताया कि संभाग और बाहरी जिलों से आने वाले वाहनों के कारण शहर में यातायात व्यवस्था सुचारू रहे, इसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं:
- मुख्य पार्किंग स्थल: बाहर से आने वाले सभी वाहनों की पार्किंग विद्या भवन और फतह स्कूल प्रांगण में की जाएगी।
- ई-रिक्शा की सुविधा: पार्किंग स्थलों से मुख्य कार्यक्रम स्थल (गांधी ग्राउंड) तक श्रद्धालुओं और आगंतुकों को लाने-ले जाने के लिए विशेष रूप से ई-रिक्शा (E-Rickshaw) लगाने की तैयारी की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य वाहनों का भी प्रबंध रहेगा।
भारत के कोने-कोने में पहुंची हल्दीघाटी की पावन माटी
निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि हल्दीघाटी की शौर्य गाथा को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ द्वारा एक विशेष प्रयास किया गया है। इसके तहत हल्दीघाटी की पावन माटी को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया गया है।

हाल ही में डॉ. भारत भूषण के नेतृत्व में हल्दीघाटी की माटी नागपुर ले जाई गई थी, जहां चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ में उपस्थित देश भर के शिक्षार्थियों, शिक्षकों और प्रबंधकों सहित 1100 से अधिक राष्ट्रभक्तों को हल्दीघाटी की पावन माटी के विशेष पाउच भेंट किए गए।


















