जमशेदपुर: संघ शिक्षा वर्ग समापन में डॉ. मोहन सिंह ने दिया 'पंच परिवर्तन' का मंत्र
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जमशेदपुर: संघ शिक्षा वर्ग का भव्य समापन, डॉ. मोहन सिंह बोले- “संगठित समाज से ही संभव है सशक्त राष्ट्र का निर्माण”

जमशेदपुर के आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 'संघ शिक्षा वर्ग' का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. मोहन सिंह ने स्वयंसेवकों के चरित्र निर्माण, संघ के इतिहास और शताब्दी वर्ष में 'पंच परिवर्तन' के संकल्प पर ओजस्वी विचार रखे।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jun 11, 2026, 03:48 pm IST
inभारत, संघ को जानें, पंच परिवर्तन, संघ @100, झारखण्‍ड
RSS Sangha Shiksha Varg Jamshedpur Dr Mohan Singh

पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर)। पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर स्थित आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रांगण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित ‘संघ शिक्षा वर्ग’ (RSS Sangha Shiksha Varg Jamshedpur) का समापन समारोह गरिमामय और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने अपनी शारीरिक और सांगठनिक क्षमता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बिहार- झारखंड के क्षेत्र कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह और मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी ईश्वर प्रेमानन्द महाराज उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में मुरलीधर केडिया, इस वर्ग के सर्वाधिकारी महादेव मुंडा, महानगर संघचालक रामचंद्र राम और जमशेदपुर विभाग संघचालक इंदर अग्रवाल ने भी मंच साझा किया।

आंकड़ों में समझिए: संघ शिक्षा वर्ग का व्यापक स्वरूप

इस शिक्षण वर्ग में विभिन्न प्रांतों और नगरों से आए शिक्षार्थियों ने कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ग की सांख्यिकीय भागीदारी को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है-

प्रशिक्षण वर्ग का प्रकारशिक्षार्थियों की संख्याव्यापक सांगठनिक प्रतिनिधित्व
घोष वर्ग 72 शिक्षार्थीयह वर्ग कुल मिलाकर 55 खण्डों, 44 नगरों, 24 जिलों, 4 महानगरों और 8 विभागों का प्रतिनिधित्व कर रहा था।
सामान्य वर्ग (172 स्थानों से)226 विद्यार्थी

इस भव्य वर्ग के सफल संचालन में प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, सह प्रांत प्रचारक राजीव कान्त, शारीरिक प्रमुख कुणाल, मुख्य शिक्षक आकाश और सह मुख्य शिक्षक देवेंद्र सहित शारीरिक, बौद्धिक एवं सर्वव्यवस्था विभाग के कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन वर्ग कार्यवाह विजय ने किया।

“स्वप्रेरणा और स्वव्यय से चरित्र निर्माण”

मुख्य वक्ता डॉ. मोहन सिंह ने संघ की ओटीसी (पूर्व नाम) (OTC) यानी संघ शिक्षा वर्ग की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ का प्राथमिक वर्ग, साप्ताहिक वर्ग और 15 दिवसीय शिक्षा वर्ग स्वयंसेवकों के भीतर राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध जगाता है।

“आरएसएस का प्रत्येक स्वयंसेवक अपनी स्वप्रेरणा और स्वव्यय (स्वयं के खर्च) से इन वर्गों में प्रशिक्षण प्राप्त करता है। यह साधना किसी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तिगत चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण के लिए की जाती है। आज जब संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है, तो संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी का रामराज्य की अवधारणा को साकार करने का संकल्प और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।”

– डॉ. मोहन सिंह

उन्होंने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रीय जागरण, शिकागो धर्म संसद में भारत की प्रतिष्ठा और समाज में राष्ट्रभक्ति के पुनर्जागरण के अमर संदेशों का भी स्मरण कराया।

इतिहास के झरोखे से स्वयंसेवकों का राष्ट्र को समर्पण

डॉ. सिंह ने अपने व्याख्यान में इतिहास के उन कठिन मोड़ों का भी उल्लेख किया जहाँ स्वयंसेवकों ने देश की एकता के लिए सर्वस्व दांव पर लगा दिया था-

  • देश विभाजन की त्रासदी: विभाजन के समय स्वयंसेवकों ने विस्थापितों की सुरक्षा और सहायता में अग्रणी भूमिका निभाई।
  • प्रतिबंधों का सामना: गांधीजी की हत्या के बाद संघ पर अन्यायपूर्ण प्रतिबंध लगा, जिसका स्वयंसेवकों ने शांतिपूर्ण और दृढ़ता से मुकाबला किया।
  • युद्ध काल में सहयोग: 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय स्वयंसेवकों ने देश की सेना की मदद की और यातायात व आंतरिक सुरक्षा संभाली, जिससे प्रभावित होकर देश ने उन्हें 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का ऐतिहासिक सम्मान दिया।
  • लोकतंत्र की रक्षा: आपातकाल (Emergency) के काले दौर में स्वयंसेवकों ने जेलें भरीं और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष किया। इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या आंदोलन को आधुनिक भारत के सबसे बड़े समाज जागरण के रूप में रेखांकित किया।

शताब्दी वर्ष में ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान

डॉ. मोहन सिंह ने समाज परिवर्तन और राष्ट्र को पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन करने के लिए संघ द्वारा दिए गए ‘पंच परिवर्तन’ के संकल्प को विस्तार से समझाया:

  • 1. कुटुंब प्रबोधन: परिवारों में संवाद बढ़ाना ताकि नई पीढ़ी को संस्कारित और आदर्श बनाया जा सके।
  • 2. सामाजिक समरसता: जाति-पांति के भेदभाव से ऊपर उठकर संपूर्ण समाज में एकात्म भाव का विकास करना।
  • 3. पर्यावरण संरक्षण: बड़े पैमाने पर पौधारोपण करना, जल का संरक्षण करना और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना।
  • 4. स्वदेशी का आचरण: अपनी मातृभाषा का सम्मान करना और दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देना।
  • 5. नागरिक कर्तव्य: देश के कानूनों का पालन करते हुए एक अनुशासित और उत्तरदायी समाज का निर्माण करना।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय और स्वयंसेवकों को भारत को फिर से वैभवशाली बनाने के लिए निरंतर पुरुषार्थ, निस्वार्थ सेवा और पूर्ण समर्पण के साथ समाज जीवन में सक्रिय होने का संदेश दिया।

Topics: स्वामी ईश्वर प्रेमानन्दJamshedpur RSS Newsशताब्दी वर्ष संघPanchjanya newsपंच परिवर्तन संघRSS Sangha Shiksha Vargजमशेदपुर संघ समाचारडॉ. मोहन सिंह
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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