नई दिल्ली/ कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद और कानूनी विशेषज्ञ कल्याण बनर्जी ने भी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी का केस लड़ने से इनकार कर दिया है और इस मामले में स्वयं को पूरी तरह से अलग कर दिया है। इसके साथ ही कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी के सामने शर्त रख दी है कि पार्टी में या तो अभिषेक बनर्जी रहेंगे या फिर वो।
कल्याण बनर्जी की दो टूक- पार्टी में या तो अभिषेक बनर्जी या मैं…
कल्याण बनर्जी श्रीरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद हैं। उनका कहना है कि अभिषेक बनर्जी का व्यवहार लगातार अहंकारी बना हुआ है। पार्टी की हार के बावजूद उनके रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया कि वो पार्टी में अभिषेक बनर्जी के साथ नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी से आग्रह करेंगे कि या तो अभिषेक को रखें और हमें छोड़ दें या हमें रखें और अभिषेक को हटाएं। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी के कारण पार्टी को क्षति हुई है। लेकिन बावजूद इसके उनका रवैया नहीं बदला है।
अभिषेक बनर्जी का अहंकार अब बर्दाश्त नहीं….
कल्याण बनर्जी का कहना है कि मैं पिछले 45 वर्षों से वकालत कर रहा हूं। अभिषेक बनर्जी का अहंकार अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मैं ममता बनर्जी से कहूंगा कि वह तय करें कि उन्हें अभिषेक बनर्जी चाहिए या वे लोग जो आज भी उनके प्रति निष्ठावान हैं।
क्या है अभिषेक बनर्जी केस?
अभिषेक बनर्जी का केस विधायक हस्ताक्षर विसंगति प्रकरण से जुड़ा है। इस मामले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को समन जारी किया था। जिसके बाद अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पुलिस कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण की मांग की है। इस मामले की पैरवी कल्याण बनर्जी कर रहे थे। वो अदालत में उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने खुद को मामले से अलग कर लिया। इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए है।
कल्याण बनर्जी का कहना है कि उन्होंने न केवल इस मामले बल्कि भविष्य में भी अभिषेक बनर्जी से जुड़े किसी भी कानूनी प्रकरण से स्वयं को अलग करने का फैसला किया है।
















