भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (आईएलओ) के 114वें श्रम सम्मेलन में भारत की ओर से श्रमिकों का पक्ष रखा। साथ ही भारत के 64 प्रतिशत श्रमिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में आने का दावा किया है।बीएमएस ने कहा श्रम कोई वस्तु नहीं, बल्कि मानव पूंजी है।आईएलओ के 114वें श्रम सम्मेलन में भारत के श्रमिक प्रतिनिधि के रुप में भारतीय मजदूर संघ (BMS) के संगठन मंत्री बोज्जी सुरेंद्रन भी शामिल हैं। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
उन्होंने यहां वैश्विक श्रमिक समुदाय के समक्ष भारत की उपलब्धियों और श्रमिक कल्याण संबंधी दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की लगभग पांचवें हिस्से की आबादी का घर होने के साथ वैश्विक आर्थिक परिवर्तन का अग्रणी देश बनकर उभरा है। देश के लाखों श्रमिकों के परिश्रम, कौशल और समर्पण ने राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि भारत को श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है।

वर्तमान में देश के लगभग 64 प्रतिशत श्रमिक विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में हैं, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (आईएसएसए) ने भारत को सम्मानित किया है। बीएमएस ने कहा कि केवल रोजगार सृजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण रोजगार, सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा तथा कौशल विकास के अवसर भी समान रूप से आवश्यक हैं। प्रतिनिधि ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इनका प्रभाव श्रमिकों की आवाजाही, विदेशी रोजगार, प्रेषण राशि, आपूर्ति श्रृंखला तथा लघु एवं मध्यम उद्योगों पर पड़ रहा है। उन्होंने शांति, संवाद और स्थायी समाधान में श्रमिक संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
बीएमएस ने आईएलओ के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ हाउंगबो की रिपोर्ट ए मोमेंट ऑफ चॉइस : हार्नेसिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर डिसेंट वर्क का स्वागत करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानव श्रमिकों की सहायता करना होना चाहिए, उनका स्थान लेना नहीं। संगठन ने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने की भारत सरकार तथा विभिन्न राज्य सरकारों की पहलों की सराहना की। इसके साथ ही प्रवासी श्रमिकों के लिए सुरक्षित प्रवासन, सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी और समान व्यवहार सुनिश्चित करने पर बल दिया।बीएमएस ने दोहराया कि श्रम कोई वस्तु नहीं, बल्कि मानव पूंजी है। संगठन ने लेबर मार्केट के स्थान पर लेबर फोर्स जैसे सम्मानजनक शब्द के प्रयोग की वकालत की। अंत में भारतीय मजदूर संघ ने न्यायपूर्ण, समावेशी, मानवीय और सुरक्षित कार्य संस्कृति के निर्माण के लिए सभी देशों, सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों से सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित गतिविधियों में 9 जून 2026 को हुई चर्चाओं और उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकों की श्रृंखला में भागीदारी के माध्यम से एक मजबूत और समन्वित राजनयिक उपस्थिति रही। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने जिनेवा में नेपाल के श्रम मंत्री रामजी यादव से मुलाकात कर कौशल विकास, श्रम गतिशीलता और डिजिटल तकनीक साझा करने पर चर्चा की। साथ अंगोला की श्रम मंत्री टेरेसा रोड्रिग्स डियास के साथ बैठक में रोजगार सेवाओं, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल प्रशासन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।मॉरीशस के श्रम मंत्री मुहम्मद रजा कासम उतीम ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की सराहना की, जबकि फ्रांस, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और कनाडा के प्रतिनिधियों के साथ कुशल श्रमिकों के कानूनी प्रवास और कौशल मान्यता पर चर्चा हुई।

















