यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम् ।
ततस्ततो नियम्येत आत्मन्येव वशं नयेत् ॥ (गीता)
हिन्दी अर्थ-
अस्थिर एवं चंचल मन को, जो इधर-उधर दौड़ता रहता है, पकड़ कर आत्मा के वशीभूत करना चाहिये। चंचल मन का नियमन ही ‘दम’ है।

















