क्या दीपक जलाना भी विवाद का कारण बन सकता है? भारत में, जहां हर कार्य का शुभारंभ दीपक जलाकर किया जाता है, एक मुस्लिम महिला विधायक को केवल इसलिए निंदा का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्होंने इस भारतीय परंपरा का पालन किया था। यह सब उस केरल में हो रहा है, जो कहने के लिए सबसे साक्षर है।
क्या है मामला?
केरल की पराम्ब्रा सीट से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से पहली महिला विधायक फातिमा इन दिनों कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। हालांकि जब वे जीती थीं, तो उनके नाम की काफी चर्चा हुई थी और लोगों ने इसे बहुत प्रगतिशील कदम बताया था। यह भी कहा था कि हिजाब में पहली मुख्यमंत्री केरल देगा और उनके नाम पर सोशल मीडिया में चर्चा हुई थी कि वे मुख्यमंत्री बनेंगी।
लेकिन, इस बार वह आलोचना के केंद्र में हैं क्योंकि उन्होंने एक स्थानीय रेस्टोरेंट के उद्घाटन के अवसर पर एक दीपक जलाया था। प्रगतिशील मुस्लिम संगठन उनसे खफा हैं। मुस्लिम व्याख्याकारों की दृष्टि में फातिमा ने ठीक नहीं किया। समस्त केरल जमियतुल उलमा ने फातिमा का विरोध किया। वह भी तब जब मुस्लिम व्याख्याकारों का यह समूह फातिमा की पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का विशेष समर्थक माना जाता है।
गौरतलब है कि मुसलमानों की संस्था समस्त के एक कट्टरपंथी धड़े ने उनकी विधानसभा में उम्मीदवारी का भी विरोध किया था। उन पर “मजहब की मर्यादाओं” को तोड़ने का भी आरोप कई लोगों ने लगाया था। फिर भी उन्होंने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। वह वर्ष 2021में भी विवादों में आई थीं, जब उन्होंने महिला नेताओं द्वारा पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कहा था कि आरोपों की जांच होनी चाहिए।
दीप जलाने पर विवाद
अब आते हैं कि अभी क्यों फातिमा विवादों के केंद्र में हैं। दरअसल समस्त केरल जमीयतुल उलमा (Samasta Kerala Jamiyyathul Ulama) का कहना है कि फातिमा को दीप नहीं जलाना चाहिए था क्योंकि यह गैर इस्लामिक है। उनका कहना है कि यह हिन्दू मान्यता और हिन्दू धार्मिक परंपरा है। उन्होंने यह तर्क दिया कि मुस्लिम नेताओं को ऐसे हिन्दू धार्मिक प्रतीकों से दूरी बनानी चाहिए। उन्होंने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेतृत्व से यह भी आग्रह किया कि वे पार्टी की पहली मुस्लिम विधायक फातिमा ताहिलिया की ऐसी गतिविधियों को रोकें।
क्या यह मुस्लिम महिला का विरोध है?
समस्त केरल जमीयतुल उलमा के बयान को देखें तो ऐसा लगता है कि यह मात्र दीपक जलाने को लेकर विरोध नहीं है, यह कहीं न कहीं एक मुस्लिम महिला के नेता बनने का विरोध है, क्योंकि फातिमा आज से नहीं बल्कि पहले से ही निशाने पर हैं। हालांकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कई मुस्लिम नेता दीपक जलाने के पक्ष में नहीं हैं और कई नेता खुलेआम इसका विरोध कर चुके हैं। यह पार्टी का आधिकारिक स्टैंड है कि वे लोग सार्वजनिक कार्यक्रमों में दीप प्रज्ज्वलन नहीं करेंगे।
इसे लेकर वर्ष 2015 में विवाद हुआ था, जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री पी के अब्दु रब ने एक आयोजन में दीप प्रज्ज्वलित करने से इनकार कर दिया था, और तब अभिनेता ममूटी ने मंच से ही यह कहा था कि वे खुद मुसलमान होकर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को दीप प्रज्ज्वलन को लेकर यह असहिष्णुता छोड़नी होगी। मगर जब भी कोई नेता इस असहिष्णुता को छोड़ने का प्रयास करता है तो वह फिर से कट्टरपंथियों के निशाने पर आ जाता है और इस बार तो एक मुस्लिम महिला निशाने पर है।
कांग्रेस चुप क्यों
गौरतलब है कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग कांग्रेस के साथ वर्तमान में केरल में सत्ता में है और यह वही कांग्रेस है, जिसके युवराज यह कहते हुए पूरी दुनिया में भारत सरकार की निंदा करते हैं कि भाजपा शासन में देश में असहिष्णुता बढ़ गई है और मुसलमान खतरे में हैं।
काश कि उनकी नजर अपने शासन वाले केरल में जाती तो उन्हें पता चलता कि कहां महिला सुरक्षित नहीं है, और कहां पर केवल दीप जलाने को लेकर ही कोई महिला कट्टरपंथियों के निशाने पर आ जाती है। मगर इस असहिष्णुता के प्रति मोहब्बत की दुकान वाले राहुल चुप रहेंगे! वहीं इसे लेकर सोशल मीडिया पर यह कहकर पोस्ट कर रहे हैं कि “क्या यही है सबसे साक्षर प्रदेश?” क्या सबसे साक्षर प्रदेश में इसी प्रकार की असहिष्णुता और कट्टरता है?

















