पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर (PoJK) में हालात काफी बिगड़ गए हैं। हजारों की संख्या में लोग पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। ताजा संघर्षों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें करीब 120 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने तथा सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबर है। 4 पुलिसकर्मियों की मौत की भी खबर है। यह नया हिंसक मोड़ न केवल पाकिस्तान सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है बल्कि इस्लामाबाद के खिलाफ पनप रहे गहरे असंतोष को भी उजागर करता है। क्या है इस खूनी संघर्ष की वजह, विस्तार से आपको बताते हैं।
पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे PoJK के लोग
दरअसल, PoJK की मशहूर पार्टी जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में नागरिक समाज और स्थानीय निवासियों ने पाकिस्तान प्रशासन द्वारा वादों से मुकर जाने के विरोध में 9 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम का एलान किया था। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को ब्लॉक करना शुरू किया, पाकिस्तानी सरकार ने JAAC को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और उसकी मान्यता रद्द कर दी। इसके तुरंत बाद सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस ने क्रूरतापूर्वक कार्रवाई और क्रैकडाउन शुरू कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फराबाद, मीरपुर और पुंछ सहित कई जिलों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इसके जवाब में भड़के स्थानीय युवाओं ने पुलिस पर पथराव किया। यह झड़प इतनी हिंसक हो गई कि गोलीबारी में 4 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई और कई नागरिक भी मारे गए हैं। इस खूनी संघर्ष ने पूरे इलाके को एक बार फिर युद्धक्षेत्र में बदल दिया है। इंटरनेट सेवाओं को सस्पेंड कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद विरोध की आग ठंडी नहीं हो रही है।
क्या है मुजफ्फराबाद समझौता जो बना विवाद की जड़?
इस पूरे बवाल की जड़ें पिछले साल के आंदोलनों से जुड़ी हैं। सितंबर और अक्टूबर 2025 में PoJK में बढ़ती महंगाई, आटे (गेहूं) की किल्लत और बिजली के भारी-भरकम बिलों के खिलाफ हफ्तों तक हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें कम से कम 10 लोगों की जान चली गई थी। उस अशांति को शांत करने के लिए 4 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तानी सरकार ने PoJK के स्थानीय प्रशासन और नागरिक समाज के गठबंधन (JAAC) के बीच अवैध रूप से समझौता किया। इसे ‘अक्टूबर 4 अकॉर्ड’ या ‘मुजफ्फराबाद समझौता’ भी कहा जाता है। यह समझौता पाकिस्तान नहीं कर सकता है क्योंकि पीओजेके भारत का हिस्सा है।
अवैध समझौते की 25 शर्तें और वादे
- मुजफ्फराबाद समझौते में कुल 25 बिंदु शामिल थे, जिनमें 12 मुख्य प्रावधान और 13 अतिरिक्त प्रतिबद्धताएं थीं। पाकिस्तान सरकार ने कागजों पर इन सभी मांगों को मान लिया था। इनमें से कुछ मुख्य मांगें थीं:
- 2025 के प्रदर्शनों के दौरान मारे गए नागरिकों के परिवारों को शहीद जवानों के समान आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा गोली लगने से घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को 10 लाख रुपये की सहायता राशि और हिंसा की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग के गठन की बात कही गई थी।
- इसमें बिजली के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 10 अरब रुपये आवंटित करने, गेहूं (आटे) और बिजली पर स्थायी रूप से सब्सिडी जारी रखने और स्थानीय निवासियों पर लगे भारी टैक्स को हटाने का वादा किया गया था।
- PoJK की जंबो कैबिनेट (मंत्रिमंडल) के आकार को छोटा करने, नौकरशाही के विशेषाधिकारों और फिजूलखर्ची को कम करने तथा कई सरकारी विभागों को आपस में मर्ज करने की बात स्वीकार की गई थी
- मुजफ्फराबाद और पुंछ में पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड से संबद्ध दो नए शिक्षा बोर्ड बनाने, सभी जिलों में मुफ्त सरकारी हेल्थ कार्ड जारी करने और अस्पतालों में एमआरआई व सीटी स्कैन जैसी आधुनिक मशीनें लगाने का वादा किया गया था।
- नीलम घाटी जैसे सुदूर इलाकों में टनल (सुरंगों) के निर्माण की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करना, नए जलापूर्ति प्रोजेक्ट्स, मंगला बांध की जमीनों का नियमितीकरण और मीरपुर में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की संभावना तलाशने की बात हुई थी।
- सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा 12 आरक्षित विधानसभा सीटों की समीक्षा करना था, जो जम्मू-कश्मीर से आए तथाकथित शरणार्थियों के नाम पर आवंटित हैं और जिनके साथ भारी फंड और राजनीतिक वीआईपी विशेषाधिकार जुड़े हुए हैं।
पाकिस्तानी सरकार के झूठे दावे
JAAC के नेताओं का कहना है कि समझौते के 8 महीने बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान सरकार ने इनमें से अधिकांश वादों को या तो ठंडे बस्ते में डाल दिया है या केवल आंशिक रूप से ही पूरा किया है। बुनियादी ढांचा जस का तस है, स्वास्थ्य और शिक्षा के वादे केवल फाइलों में दफन हैं और राजनीतिक अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों में कोई कटौती नहीं की गई है। इसी वादाखिलाफी से तंग आकर युवाओं और नागरिकों को दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
भारत में विकास देखकर भड़का PoJK के युवाओं का गुस्सा
इस पूरे आंदोलन का एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण पहलू सोशल मीडिया से जुड़ा है। PoJK के युवा निवासी आज के समय में सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। वे अक्सर टिकटॉक, यूट्यूब और एक्स (X) पर वीडियो पोस्ट कर रहे हैं, जिनमें एक तरफ पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर की बदहाली, टूटी सड़कें, बिजली की किल्लत और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दिखाई जाती है। तो वहीं दूसरी तरफ भारत के जम्मू और कश्मीर में हो रहे ऐतिहासिक विकास को दिखाया जाता है।
भारतीय कश्मीर में बने आधुनिक एम्स (AIIMS) अस्पताल, चिनाब नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज, चमचमाती टनल, विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान और वहां के नागरिकों को मिल रही मुफ्त स्वास्थ्य बीमा (आयुष्मान भारत कार्ड) की सुविधाएं देखकर PoJK के युवाओं के भीतर यह अहसास गहरा गया है कि पाकिस्तान ने पिछले 78 सालों से केवल उनका आर्थिक और प्राकृतिक शोषण किया है। इस कड़वी सच्चाई और जीवन स्तर में बड़े अंतर ने PoJK के नागरिकों के भीतर चल रहे विद्रोह को एक नई और वैचारिक धार दे दी है, जिसे दबा पाना अब पाकिस्तान सरकार के वश में नहीं दिख रहा है।
दुनियाभर में हो रही निंदा
PoJK में पाकिस्तानी सरकार के इस दमनकारी रवैये की दुनियाभर में निंदा हो रही है। ब्रिटेन के 50 सांसदों ने यूके की विदेश मंत्री यवेट कूपर को पत्र लिखकर PoJK में इंटरनेट पर लगे प्रतिबंध, आम लोगों की गिरफ्तारी और बढ़ते तनाव की खबरों पर चिंता जताई है। कई अन्य देश भी पाकिस्तान के इस व्यवहार की निंदा की है।
















