जम्मू-कश्मीर के पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) शेष पॉल वैद ने PoJK में हुई हिंसा की कड़ी निंदा की और पाकिस्तानी सिक्योरिटी फोर्स पर आम लोगों और शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ़ बहुत ज़्यादा बल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
वैद ने कहा, “PoJK में हालात बहुत गंभीर हैं। अंधाधुंध गोलीबारी में कई लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान रेंजर्स, पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस ने गोलीबारी की है, जिससे कई लोगों की जान गई है।” उन्होंने कहा कि चल रही अशांति ने जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के “झूठे नैरेटिव” की पोल खोल दी है, क्योंकि PoJK के लोग खुद अब इस्लामाबाद की नीतियों को चुनौती दे रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव पर जताई चिंता
वैद ने कहा, “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसी है।” उन्होंने दावा किया कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे नागरिकों को बातचीत के बजाय गोलियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान ने कभी भी कश्मीरियों की भलाई की सच्ची परवाह नहीं की है और असहमति को दबाने के लिए बार-बार बल का प्रयोग किया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच बढ़ते टकराव और उनमें हुई मौतों की खबरों पर पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने गहरी चिंता जताई है। HRCP ने X पर एक बयान में कहा कि वह “पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में बढ़ते टकराव और प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों, दोनों की जान जाने की घटनाओं से बहुत चिंतित है।” आयोग ने तनाव को तुरंत कम करने और सभी मौतों व घायलों के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मानवाधिकार संस्था ने यह भी चेतावनी दी कि “लोकप्रिय आंदोलनों पर रोक लगाने से लोकतांत्रिक दायरे के सिमटने का खतरा हमेशा बना रहता है।” संस्था ने जोर देकर कहा कि संवैधानिक बदलाव की मांगें टकराव और हिंसा के बजाय शांतिपूर्ण, प्रतिनिधि और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के जरिए पूरी की जानी चाहिए।
इससे पहले, HRCP ने 9 जून को होने वाले प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) पर प्रतिबंध लगाने के PoJK सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। आयोग ने कहा कि इस कदम से शांतिपूर्ण सभा और असहमति जताने के लिए जगह कम होने को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। आयोग ने गौर किया कि JAAC राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक मांगों को लेकर लोगों को एकजुट कर रहा था और उसने सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। HRCP ने इस बात पर भी जोर दिया कि जुलाई में होने वाले क्षेत्रीय चुनावों को देखते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संगठन बनाने और शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकारों सहित मौलिक स्वतंत्रता की रक्षा करना बहुत जरूरी है।
PoJK में चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ा
क्षेत्रीय चुनावों से पहले बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच PoJK के रावलकोट में हिंसक अशांति देखी गई। यह संकट PoJK सरकार द्वारा आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगाने और पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधायी सीटों को लेकर हुए विवाद के कारण पैदा हुआ। JAAC, जो राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहा है, ने आरक्षित सीटों की व्यवस्था का विरोध किया। उनका तर्क है कि इससे स्थानीय प्रतिनिधित्व कमजोर होता है। आलोचकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह प्रतिबंधात्मक कानूनों, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और अभिव्यक्ति व सभा की स्वतंत्रता पर रोक लगाकर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में राजनीतिक असहमति को दबाता है।
( इनपुट एएनआई)













