6 जून को जंतर-मंतर पर मैं सिर्फ एक दर्शक नहीं था, बल्कि इस पूरे घटनाक्रम का प्रत्यक्ष साक्षी था। मैंने न केवल इस आंदोलन को करीब से देखा, बल्कि अपने कैमरे में इसके अनेक दृश्य भी रिकॉर्ड किए। पेपर लीक और शिक्षा सुधार के नाम पर शुरू हुई यह मुहिम कैसे धीरे-धीरे अपने मूल मुद्दों से भटकती चली गई, कैसे डफलियों की थाप पर पुराने आन्दोलनजीवी चेहरे सक्रिय होते दिखाई दिए और कैसे छात्रों के प्रश्न नारों के शोर में दबते चले गए। यह वीडियो उसी आँखों देखी का एक दस्तावेज़ है। Crane Brinton की The Anatomy of Revolution के दृष्टिकोण से मैं उस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण कर रहा हूँ, जिसे कुछ लोग ‘युवा क्रांति’ कह रहे थे, लेकिन जो मेरी आँखों के सामने जंतर-मंतर की धरती पर एक अलग ही कहानी लिख रहा था।

















