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‘केंद्र शासित प्रदेश’ की मांग

पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा है झारखंड का संथाल परगना प्रमंडल। इस प्रमंडल में छह जिले हैं— दुमका, साहिबगंज, गोड्डा, देवघर, पाकुड़ और जामताड़ा।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 8, 2026, 02:45 pm IST
inपश्चिम बंगाल
साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड का यह मुस्लिम होटल वहां की बदलती जनसांख्यिकीय की ओर इशारा कर रहा है

साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड का यह मुस्लिम होटल वहां की बदलती जनसांख्यिकीय की ओर इशारा कर रहा है

पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा है झारखंड का संथाल परगना प्रमंडल। इस प्रमंडल में छह जिले हैं— दुमका, साहिबगंज, गोड्डा, देवघर, पाकुड़ और जामताड़ा। पहले इस प्रमंडल में केवल दुमका जिला हुआ करता था। सरकारों की तुष्टीकरण नीति ने इस प्रमंडल को बांग्लादेशी घुसपैठियों का अड्डा बना दिया है। सिद्धो-कान्हू और बाबा तिलका मांझी के बलिदान के लिए जाना जाने वाला संथाल परगना क्षेत्र आज एक गंभीर जनसांख्यिकीय और सुरक्षात्मक संकट के मुहाने पर खड़ा है।

बांग्लादेशी घुसपैठियों ने इस क्षेत्र को अशांत कर दिया है। सरकार चलाने वाले नेताओं को छोड़कर हर व्यक्ति देख रहा है कि लव जिहाद, जमीन जिहाद, हत्या, चोरी, पशु तस्करी जैसी घटनाओं के पीछे बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। वर्तमान राज्य सरकार मानती ही नहीं है कि झारखंड में कोई घुसपैठिया है। उसे लगता है ऐसा कहने से उसका वोट बैंक नाराज हो जाएगा और उसकी कीमत उसे चुनाव में चुकानी पड़ेगी।

सरकार की इस नीति का दुष्प्रभाव वहां के स्थानीय निवासियों पर पड़ रहा है, वे अल्पसंख्यक हो रहे हैं। दूसरी ओर पूरे संथाल परगना में मुसलमानों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार पिछले कुछ दशकों में साहिबगंज, पाकुड़ और आसपास के जिलों में जनजातियों की आबादी में अप्रत्याशित गिरावट आई है। घुसपैठियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्थानीय लोगों की पैतृक जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया है।

संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) के कड़े नियमों के बावजूद पिछले दरवाजे से जमीन हड़पी जा रही है। एक सोची-समझी रणनीति के तहत जनजाति बहू-बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है। उनसे विवाह रचाकर न केवल उनकी जमीन पर कानूनी हक जमाया जाता है, बल्कि पंचायत चुनावों में उन्हें मोहरा बनाकर स्थानीय सत्ता और राजनीतिक प्रभाव पर भी कब्जा किया जा रहा है। इसे स्थानीय लोग ‘चुनाव जिहाद’ का नाम दे रहे हैं, जिसके कारण मूल निवासियों का राजनीतिक अस्तित्व खतरे में है।

‘हिंदू धर्म रक्षा मंच’ और क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि राज्य सरकार की तुष्टीकरण की राजनीति और स्थानीय प्रशासनिक शिथिलता के कारण स्थिति अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। ऐसे में केवल ‘केंद्र शासित प्रदेश’ का गठन ही इस क्षेत्र को बचा सकता है। यही कारण है कि हाल ही में ‘हिंदू धर्म रक्षा मंच’ के केंद्रीय अध्यक्ष संत कुमार घोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर संथाल परगना और गौड़ बंगा के सीमावर्ती जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए।

 

 

 

Topics: संथाल परगनाक्षेत्रीय पहचानपश्चिम बंगाल सीमागौड़ बंगा सीमावर्ती जिलेझारखंडदेवघरजामताड़ासाहिबगंजपाञ्चजन्य विशेषपाकुड़
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