शनिवार को दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने अपना पहला विरोध प्रदर्शन किया। संसद भवन के नजदीक जंतर-मंतर पर हुए इस विरोध प्रदर्शन के सूत्रधार ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके थे। अभिजीत बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र हैं और आम आदमी पार्टी से भी जुड़े रहे हैं। वह शुक्रवार को अमेरिका से नई दिल्ली आए। आभासी दुनिया में उनके 2 करोड़ फॉलोअर्स में से जंतर-मंतर पर महज 2000 लोग ही जुटे।
जैसा कि पहले से ही अंदाजा था कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के इस आंदोलन को विदेशी मीडिया पूरी तरह से कवर करेगी और उसने किया भी। कई विदेशी मीडिया ने इसे श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के हालिया जेन ज़ी आंदोलनों जैसा बताया। आइये देखते हैं कि किसने किस तरह का प्रोपेगेंडा फैलाया…
विदेशी मीडिया का प्रोपेगेंडा
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने आश्चर्य जताया कि कैसे सीजेपी ने एक महीने के भीतर देश की राजनीति में अपनी जगह बना ली। साथ ही इसे उसने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में इसे भारतीय युवाओं के आक्रोश के रूप में दिखाया। अखबार ने लिखा कि भारत की आबादी के 25 फीसदी से अधिक युवा हैं और वो अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के जरिए व्यवस्था के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। विदेशी पत्रकारों के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों द्वारा हाथ में तिरंगा और एक किताब लेकर आना यह दर्शाता है कि यह आंदोलन बेहद रचनात्मक तरीके से शिक्षा के अधिकार और समान अवसरों की मांग को वैश्विक मंच पर उठा रहा है।
दक्षिण एशिया में हुए युवा आंदोलनों से की तुलना
NYT ने लिखा है कि भारत का यह युवा आंदोलन दक्षिण एशिया के उस व्यापक ट्रेंड का हिस्सा है, जहां सोशल मीडिया से शुरु होने वाले युवा आंदोलनों ने बड़ी-बड़ी सत्ताओं को उखाड़ फेंका है। श्रीलंका में हुआ जन-विद्रोह, बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार का तख्तापलट और नेपाल में हुआ हालिया राजनीतिक संकट। ये सभी आंदोलन सोशल मीडिया के जरिए ही खड़े हुए थे। AFP ने लिखा कि युवाओं को इस आंदोलन का समर्थन मिल रहा है, लेकिन उतनी संख्या में नहीं जितनी संख्या में सोशल मीडिया पर सीजेपी के फॉलोअर्स हैं। यहां पर मौजूद लोग चाहते हैं कि उनकी बात सुनी जाए और युवाओं की बात संसद में भी रखने वाला कोई हो। साथ ही उन्होंने भी इस आंदोलन की तुलना दक्षिण एशिया में हुए कुछ युवा आंदोलनों से की। उन्होने सीजेपी के समर्थक से बात की उसने कहा, ‘यह पूरी तरह से ‘यूथ-फर्स्ट’ यानी युवाओं का आंदोलन है। युवा ही इस देश का भविष्य हैं और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारा भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो।’
आंदोलन के समाप्त होने की जताई आशंका
France 24 ने लिखा भारतीय जेन-जी इस आंदोलन को सपोर्ट करने तो आए थे, लेकिन सोशल मीडिया की तुलना में भीड़ बहुत कम देखने को मिली। साथ ही उसने इस आंदोलन के जल्द खत्म होने की भी आशंका जताई। इसका तर्क देते हुए उसने लिखा कि भारत में पिछले एक दशक में बहुत कम ही आंदोलन सरकार के खिलाफ खड़े हो पाए हैं। उदाहरण के लिए उसने सीएए और किसान आंदोलन की बात की, जिसे किसी न किसी वजह से खत्म होना पड़ा।
विदेशी मीडिया का कहना है कि सरकार के आलोचकों और प्रदर्शनकारियों को भारत में अक्सर कड़े कानूनों और गिरफ्तारियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘यूथ-फर्स्ट’ आंदोलन इस तरह के कूटनीतिक और प्रशासनिक दबावों के आगे खुद को कैसे सुरक्षित रखता है।
CJP समर्थकों ने मांगा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
बता दें कि, शनिवार देर रात ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए मोदी सरकार को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया। सीजेपी ने कहा कि या तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान खुद अपने पद से इस्तीफा दें या फिर पीएम नरेंद्र मोदी उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त करें। यदि सात दिनों के भीतर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो यह आंदोलन दिल्ली से निकलकर पूरे देश के कोने-कोने में फैल जाएगा।

















