दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 जून 2026 को CJP द्वारा कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन का घोषित उद्देश्य छात्रों के भविष्य, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के अधिकारों से जुड़ा था। लेकिन प्रदर्शन के दौरान लगे “आज़ादी” के नारों ने पूरे आंदोलन को एक नई बहस के केंद्र में ला दिया। सवाल उठ रहा है कि जब मुद्दा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और छात्रों के अधिकारों का था, तो फिर “आज़ादी” जैसे राजनीतिक और वैचारिक नारों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
कई लोगों का मानना है कि इससे मूल मुद्दा कमजोर पड़ता है और छात्रों की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकता है। जो प्रदर्शन पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर करने का दावा किया जा रहा हो, वहां आजादी के नारों को आप कैसे देखते हैं?















