वास्तव में “प्रॉब्लम ऑफ प्लेन्टी” कितनी बड़ी समस्या है, इसका उदाहरण भारतीय क्रिकेट शनिवार को देने वाला है। युवा प्रतिभाशाली क्रिकेटरों की नयी पौध सिद्धहस्त व अनुभवी खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती पेश कर रही है, जबकि क्रिकेट के तीनों प्रारूपों (टेस्ट, वनडे और टी20) के विशेषज्ञ खिलाड़ियों के अलग-अलग कॉम्बिनेशन तैयार करने की जिम्मेदारी उठा रहे भारतीय चयनकर्ताओं के सामने विकट स्थिति पैदा हो गयी है।
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम को इस माह ही इंग्लैंड और आयरलैंड के दौरे पर जाना है। दौरे की शुरुआत टी20 फॉर्मेट से होगी, जबकि वनडे और टेस्ट सीरीज जुलाई-अगस्त माह में खेली जाएगी। इसलिए टी20 टीम का चयन सबसे पहले किया जाएगा। जिस तरह की खबरें छन-छन कर बाहर आ रही हैं, उसमें साफ दिख रहा है कि भारतीय क्रिकेट जगत एक भीड़भाड़ वाले चौराहे पर खड़ा है। उनमें से सर्वश्रेष्ठ 15 खिलाड़ियों का चयन करना कतई आसान नहीं होगा। उस पर से चीफ कोच गौतम गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर के सख्त रवैये ने पिछले दो-तीन वर्षों से भारतीय क्रिकेट जगत में भूचाल सी स्थिति पैदा कर दी है।
ऐसा नहीं है कि गंभीर-अगरकर की जोड़ी के कारण टीम का नुकसान हुआ है, लेकिन टीम की रूपरेखा और विभिन्न क्रिकेटरों की जिम्मेदारी को लेकर असमंजस की स्थिति जरूर बनी रहती है। वो तो भला हो आईपीएल का, जिसके कारण प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का विशाल समूह किसी भी समय किसी भी प्रतिद्वंद्वी का सामना करने को तैयार रहता है।
क्या सूर्यकुमार यादव से छिनेगी कप्तानी
इस बार भी कहानी कुछ अलग नहीं होगी। वर्ष की शुरुआत में ही टीम इंडिया टी20 विश्व विजेता बन फूले नहीं समा रही। लेकिन घोर आश्चर्य की बात यह है कि विश्व विजेता टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव से न केवल उनकी कप्तानी छीने जाने की संभावना है, बल्कि खराब फॉर्म के कारण उन्हें टीम में भी जगह नहीं मिलने की बात की जा रही है। यह आसानी से हजम होने वाली बात नहीं है। एक आला दर्जे का क्रिकेटर जो देश को लगातार दो बार (2024 विश्व कप और 2026 विश्व कप) विश्व विजेता बनाने में खिलाड़ी या कप्तान के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, फॉर्म अच्छी न होने के कारण अचानक टीम से बाहर कर दिया जाए, यह सिर्फ भारत में ही हो सकता है। या फिर कुछ समय पीछे गौर करेंगे तो पाएंगे कि सूर्या से पहले विराट कोहली और रोहित शर्मा से भी कप्तानी कुछ इसी अंदाज में छीनी गयी थी।
श्रेयस अय्यर पर नजर
बहरहाल, इस मुद्दे पर चर्चा काफी लंबे समय तक चलेगी। अभी एक अच्छी खबर यह है कि आईपीएल की तीन-तीन फ्रेंचाइजी टीमों (कोलकाता, दिल्ली व पंजाब) को फाइनल तक पहुंचाने वाले श्रेयस अय्यर को अंतत: भारतीय टीम में शामिल कर उन्हें टीम की कमान भी सौंपी जा सकती है। चूंकि श्रेयस काफी अच्छी फॉर्म में चल रहे हैं और उनमें चतुर कप्तानी के बल पर टीम को आगे ले जाने का माद्दा है तो उनका नए रूप में अवतरित होना शुभ संकेत माना जा सकता है।
वैभव सूर्यवंशी बनी चुनौती बनकर उभरे
श्रेयस के अलावा तिलक वर्मा और ईशान किशन भी कप्तानी की दौड़ में शामिल हैं यानि इन दोनों धुरंधर बल्लेबाजों का टीम में बने रहना तय है। संजू सैमसन चूंकि विश्व कप विजेता टीम के स्टार ओपनर थे तो उनका भी टीम में बने रहना तय है। हां, संजू का ओपनिंग जोड़ीदार कौन होगा, इस पर लंबी चर्चा हो सकती है। आईपीएल 2026 में धूमकेतु की तरह उभरे 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी अपने सीनियर अभिषेक शर्मा और यशस्वी जायसवाल के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। 237.30 की स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाने वाले वैभव की जितनी तारीफ की जाए कम है। उन्हें महज उम्र के लिहाज से टीम से बाहर रख पाना चयनकर्ताओं के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी।
वैभव न केवल सर्वाधिक रन बनाने के कारण ऑरेंज कैप विजेता बने, बल्कि सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाशाली खिलाड़ी और चौकों-छक्कों की बरसात कर बल्लेबाजी में आईपीएल 2026 के करीबन सभी पुरस्कार जीत ले गए। इनके अलावा रजत पाटीदार, रितुराज गायकवाड़ सहित तूफानी तेज गेंदबाज प्रिंस यादव व हर्ष दूबे जैसे युवा खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का मौका मिल सकता है।
















