
पंजाब में कानून व्यवस्था इतनी लचर है कि किसान चोरों से परेशान हो कर उनसे अपील कर रहे हैं कि वे उनसे पैसे ले लें परंतु ट्यूबवैलों से मोटरें चोरी न करें। पुलिस से चोरों को पकडऩे की गुहार लगाने की बात तो सुनी होगी, लेकिन फरीदकोट व बठिंडा में चोरी से परेशान किसान खुद चोरों को यूपीआइ से पैसे देने की अपील कर रहे हैं।
दरअसल, फरीदकोट के गांव पक्कीकलां में एक रात में चोर खेतों से ट्यूबवेल की 25 मोटरें चोरी कर ले गए। इसके बाद परेशान किसानों ने पोस्टर जारी कर चोरों से भावुक अपील की कि वे उनकी खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली ट्यूबवेल की मोटरें न चुराएं, पैसे चाहिए तो वह उन्हें यूपीआइ के माध्यम से भुगतान करने को तैयार हैं। किसान बेअंत सिंह, मि_ू सिंह, गुरविंदर सिंह और प्रीतम सिंह ने बताया कि धान की रोपाई का सीजन में मोटरें चोरी होने से मानसिक तनाव भी झेलना पड़ रहा है।
किसानों ने चोरों से अपील की है कि यदि उन्हें पैसे चाहिए तो वह ट्यूबवेल के स्थान पर एक पर्ची छोड़ दें, जिसमें यूपीआइ क्यूआर कोड या बैंक खाते की जानकारी हो। वह मोटर की कीमत के बराबर पैसे यूपीआइ से पेमेंट कर देंगे। बस शर्त यह है कि मोटरें चोरी न करें।
किसानों के विरोध का यह व्यंग्यात्मक तरीका इंटरनेट मीडिया पर छाया हुआ, लेकिन पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना है। बठिंडा के गांव कोठे कौर सिंह वाला के किसान भी ट्रांसफार्मर और उसमें भरे तेल की चोरी से परेशान हैं। यहां के किसानों का कहना है कि ट्रांसफार्मर चोरी होने से सिंचाई के बिना उनकी फसल सूख रही है।
इन किसानों ने भी चोरों से अपील की है कि वे ट्रांसफार्मर और तेल की चोरी करने के बजाय उनसे हर महीने कुछ राशि ले लें, ताकि उनकी खेती को नुकसान न पहुंचे। किसान गुरचरण सिंह और महिंदर सिंह ने बताया कि ट्रांसफार्मर चोरी होने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल होने में 15 से 20 दिन तक लग जाते हैं। इस दौरान धान की पनीरी और अन्य फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पाता।
बठिंडा के किसानों का कहना है कि जब वे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने जाते हैं, तो उनसे चोरों के नाम पूछे जाते हैं। यदि वे नाम नहीं बता पाते, तो एफआइआर दर्ज नहीं की जाती। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि क्षेत्रों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि ट्रांसफार्मर चोरी को रोका जा सके।