स्कूल की आड़ में आवासीय मदरसा! बालिकाएं गायब, रिकॉर्ड में 37 और रजिस्टर में 71, कमरों में 100 बच्चियों का सामान?
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स्कूल की आड़ में आवासीय मदरसा! बालिकाएं गायब, रिकॉर्ड में 37 और रजिस्टर में 71, कमरों में 100 बच्चियों का सामान?

आयोग ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए शिक्षा विभाग को विस्तृत जांच और आवश्यक कार्रवाई में संस्‍थान के खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश दिए हैं

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Jun 5, 2026, 09:40 am IST
inमध्य प्रदेश
स्कूल की आड़ में चल रहे मदरसे में मिली खामियां। पाल संरक्षण आयोग की टीम ने किया निरीक्षण

स्कूल की आड़ में चल रहे मदरसे में मिली खामियां। पाल संरक्षण आयोग की टीम ने किया निरीक्षण

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के बादाखेड़ी गांव में संचालित एक शैक्षणिक संस्थान के निरीक्षण के दौरान ऐसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन्होंने बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और संरक्षण को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा द्वारा किए गए निरीक्षण में रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच भारी अंतर, बिना अनुमति आवासीय व्यवस्था, छात्राओं के दस्तावेजों का अभाव तथा मान्यता से अधिक कक्षाओं का संचालन होना पाया गया है। स्कूल को मप्र शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, लेकिन वहां बहुत अधिक संख्या में दीनी तालीम की किताबें मिली हैं।

आयोग ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए शिक्षा विभाग को विस्तृत जांच और आवश्यक कार्रवाई में संस्‍थान के खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश दिए हैं।

कमरे में इस तरह रखा गया सामान

निरीक्षण में खुली व्यवस्थागत खामियां

मप्र बाल आयोग अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा एवं सदस्‍य सोनम नि‍नामा जब ग्राम बादाखेड़ी स्थित दारुल उलूम अहले सुन्नवत मोईनिया फैजान-ए-गरीब नवाज मदरसा एवं उसी परिसर में संचालित मोइनिया गर्ल्स स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचीं तो वहां के हालात देखकर हतप्रभ रह गईं । प्रारंभिक जांच में पाया गया कि संस्थान को मध्यप्रदेश बोर्ड से केवल कक्षा 6 से 8 तक संचालन की मान्यता प्राप्त है, लेकिन परिसर में इससे कहीं अधिक स्तर की शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होने के संकेत मिले हैं। निरीक्षण के दौरान कक्षा 3 से लेकर 12वीं तक की किताबें और अध्ययन सामग्री मिलने से यह आशंका मजबूत हुई कि संस्थान में स्वीकृत सीमा से बाहर की कक्षाएं भी संचालित की जा रही थीं।

रिकॉर्ड में बड़ा अंतर, वास्तविक संख्या पर सवाल

सबसे गंभीर तथ्य छात्राओं की संख्या को लेकर सामने आया। सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर जहां केवल 37 छात्राओं का पंजीयन दर्ज मिला, वहीं स्कूल के स्कॉलर रजिस्टर में 71 छात्राओं के नाम दर्ज पाए गए। इसके अलावा परिसर में बड़ी संख्या में स्कूल बैग, लगेज, बक्से और अन्य निजी सामान मिला। उपलब्ध सामग्री के आधार पर लगभग 100 छात्राओं के वहां रहने की संभावना व्यक्त की गई, क्‍योंकि इतने अलग-अलग नाम वाले स्‍कूल बेग गिने जा चुके थे, जबकि आश्‍चर्य है कि निरीक्षण के दौरान परिसर में एक भी छात्रा मौजूद नहीं मिली।

यह स्थिति कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करती है, यदि छात्राएं वहां रह रही थीं तो निरीक्षण के समय वे कहां थीं? वास्तविक संख्या क्या है? और संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर क्यों है?

बिना अनुमति आवासीय व्यवस्था के संकेत

आयोग की जांच में यह भी सामने आया कि परिसर में बालिकाओं के रहने की व्यवस्था थी। विभिन्न कमरों में छात्राओं का सामान मिला, जिससे यह संकेत मिला कि यहां आवासीय व्यवस्था संचालित की जा रही थी। संस्थान को विद्यालय संचालन की मान्यता प्राप्त है, जबकि परिसर में एक आवासीय मदरसा संचालित होने के संकेत मिले हैं। विशेष बात यह भी है कि इस आवासीय व्यवस्था अथवा मदरसा संचालन की वैधानिक मान्यता से संबंधित कोई स्पष्ट दस्तावेज मौके पर प्रस्तुत नहीं किए गए। इतना ही नहीं बाल संरक्षण के दृष्टिकोण से सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि निरीक्षण दल को छात्राओं से संबंधित मूलभूत दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं कराए गए।

आयोग ने छात्राओं की व्यक्तिगत फाइलें, अभिभावकों की जानकारी, पहचान पत्र, प्रवेश संबंधी रिकॉर्ड और आवासीय व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, लेकिन संस्थान प्रबंधन उन्हें प्रस्तुत नहीं कर सका, जबकि किसी भी आवासीय या शैक्षणिक संस्थान में बच्चों की पहचान, अभिभावक संपर्क विवरण और प्रवेश संबंधी रिकॉर्ड का व्यवस्थित संधारण अनिवार्य होता है। ऐसे दस्तावेजों का उपलब्ध नहीं होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।

प्रबंधन और स्टाफ की जानकारी भी नहीं दी गई

निरीक्षण के दौरान संस्थान के संचालन से जुड़े कई बुनियादी प्रश्नों के उत्तर भी नहीं मिल सके। आयोग को यह जानकारी नहीं दी गई कि संस्थान का वास्तविक प्रबंधन किसके हाथ में है, प्राचार्य कौन है, संचालन समिति और प्रबंधन समिति में कौन-कौन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त स्टाफ, वार्डन, कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन, वेतन भुगतान, फीस संरचना तथा ऑडिट रिपोर्ट जैसी आवश्यक जानकारियां भी उपलब्ध नहीं कराई गईं।बालिकाओं के साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन न होना या उसकी जानकारी उपलब्ध न कराना भी सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।

कमरे नहीं खोले गए, बढ़ा संदेह

निरीक्षण के दौरान सामने आया कि स्कूल कार्यालय और भवन की ऊपरी मंजिल पर स्थित लगभग 10 कमरों को खोलने के लिए बार-बार कहा गया, लेकिन संस्थान प्रबंधन ने उन्हें नहीं खोला। बाल आयोग का कहना है कि यदि सभी रिकॉर्ड और गतिविधियां नियमों के अनुरूप थीं तो कमरों को खोलने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी? इसके साथ ही स्कूल को जब मप्र शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, तब फिर वहां बहुत अधिक मात्रा में दीनी तालीम की (इस्‍लामिक) किताबें क्‍या कर रही हैं?

बालिकाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : डॉ. निवेदिता शर्मा

इस संबंध में डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा, “बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और संरक्षण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मदरसा निरीक्षण के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। संस्थान की मान्यता से लेकर परिसर में कक्षाओं और छात्राओं की संख्या रिकॉर्ड में बड़ा अंतर और अनियमितताएं हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि बालिकाओं से संबंधित आवश्यक दस्तावेज, अभिभावकों की जानकारी और आवासीय व्यवस्था का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। आयोग का दायित्व है कि प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए। पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

मानव तस्करी सहित अन्य पहलुओं पर भी नजर

बाल संरक्षण आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच सिर्फ शैक्षणिक मान्यता तक सीमित नहीं रहेगी। छात्राओं की वास्तविक संख्या, उनकी उपस्थिति, आवासीय व्यवस्था और दस्तावेजों में पाई गई विसंगतियों को देखते हुए अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच की जाएगी।

बिना अनुमति के हॉस्टल भी चलाया जा रहा था?

मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी टेरेसा मिंज का कहना है कि बाल आयोग के अध्यक्ष के साथ वे भी निरीक्षण में साथ रहीं। मंदसौर के बादाखेड़ी गांव में निरीक्षण के दौरान बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। यहां मोइनिया एजुकेशन सोसायटी के नाम से स्कूल की जगह मदरसे और हॉस्टल का संचालन किया जा रहा है। अवैध रूप से मदरसे का संचालन करने के साथ पाया गया कि बिना अनुमति के हॉस्टल भी चलाया जा रहा था। यह स्कूल गोपनीय तरीके से बिना शिक्षा विभाग को सूचित किए संचालित किया जा रहा था। जल्द आगे की कार्रवाई करवाई जाएगी।

इसके साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी टेरेसा मिंज ने यह भी स्वीकार किया है कि निरीक्षण के दौरान कक्षा 12 वीं तक की किताबें मिली हैं, जबकि संस्थान को कक्षा 6 से 8 तक संचालन की मान्यता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्‍होंने बताया कि बाल आयोग ने शिक्षा विभाग सहित संबंधित प्रशासनिक विभागों को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बालिकाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता राज्‍य में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

 

Topics: बाल संरक्षण आयोगमंदसौर न्यूजनिवेदिता शर्मामदरसा में अनियमितता
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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