भोपाल । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में कई मदरसों में आज भी हिंदू बच्चों को दीनी तालीम दी जा रही है। मदरसा मोईन (गोपालपुर हाल, केशव कॉलोनी) में पांच, मदरसा रहीम उर्दू प्राथमिक (इस्लामपुरा) में आठ और मदरसा अंजुमन इस्लामिया आलिया (पुराना जौरा) में 24 हिंदू बच्चे पढ़ रहे हैं। बच्चों से पूछताछ में स्पष्ट हुआ कि उन्हें कुरान मजीद, हदीस और तालीमुल इस्लाम की शिक्षा दी जा रही है, जबकि आधुनिक शिक्षा पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
मुरैना जिले में मदरसों की स्थिति
जिले के कुल 55 मान्यता प्राप्त मदरसों में 2,514 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें से 1,958 मुस्लिम और 556 हिंदू हैं। गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या इससे अलग है। फीस कम होने के कारण हिंदू माता-पिता भी अपने बच्चों को मदरसों में भेज देते हैं। नियमों के बावजूद, बच्चों को बिना अभिभावक की अनुमति दीनी तालीम दी जा रही है और इस्लामी तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं।
स्कूली शिक्षा विभाग की चेतावनी और अनदेखी
पिछले साल अगस्त में शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चों को अभिभावक की अनुमति के बिना धार्मिक शिक्षा नहीं दी जानी चाहिए। आदेश में कहा गया था कि नियम उल्लंघन करने पर मदरसों की मान्यता रद्द की जाएगी और आर्थिक सहायता रोकी जाएगी। बावजूद इसके, मुरैना और प्रदेश भर के कई मदरसों में हिंदू बच्चों की दीनी तालीम जारी है।
बाल संरक्षण आयोग की आपत्ति
मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) ने इस पर आपत्ति जताई है। आयोग के सदस्यों ने सवाल उठाया कि हिंदू बच्चे दीनी तालीम क्यों लें, विशेषकर कुरान, हदीस और तालीमुल इस्लाम जैसी किताबें क्यों पढ़ें, जिनमें साफ लिखा है कि अल्लाह से बड़ा कोई नहीं। सदस्यों का कहना है कि बच्चों के माता-पिता से पूछताछ कर यह जानना आवश्यक है कि उन्हें मदरसों में क्यों भेजा जा रहा है।
मदरसों में संचालन और वित्तीय शिकायतें
बाल संरक्षण आयोग ने यह भी जानकारी दी कि मप्र में कई मदरसों का संचालन बिना मान्यता के हो रहा है। इसमें हिन्डू बच्चों को पढ़ाना, स्कॉलरशिप की राशि हड़पना और मध्यान्न भोजन जैसी सुविधाओं में गड़बड़ी जैसी शिकायतें शामिल हैं। आयोग ने अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है और शासन को आवश्यक कदम उठाने के लिए अवगत कराया जाएगा।

















