नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में पिछले कई दिनों से चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ का 4 जून को भव्य समापन हुआ। नागपुर में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति भवन के स्मृति मंदिर परिसर के समीप रेशिमबाग मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह में देश के दिग्गज उद्योगपति और पद्मभूषण से सम्मानित श्री कुमार मंगलम बिरला ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

इस अवसर पर संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने स्वयंसेवकों और समाज को अपना पाथेय (मार्गदर्शन) प्रदान किया, जिसे वर्तमान राष्ट्रीय और वैश्विक परिस्थितियों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का मार्गदर्शन
अपने विस्तृत उद्बोधन में डॉ. भागवत ने भारत के इतिहास, वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और हिन्दू समाज के संगठन पर गहराई से चर्चा की। उनके उद्बोधन के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:
हिन्दू समाज और संघ का शताब्दी वर्ष –
“संघ के शताब्दी वर्ष के दो तिहाई कालखंड के बीच यह कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग सम्पन्न हो रहा है। इस बीच समाज जीवन के संपर्क अभियान का बहुत अच्छा अनुभव हो रहा है। भारत का भविष्य जिस कंधे पर है, वह हिन्दू समाज संगठित हो रहा है और जागृत हो रहा है।”
दुनिया को भारत की आवश्यकता-
“दुनिया को भारत की आवश्यकता है, क्योंकि सभी को साथ में जोड़ कर विकास की कल्पना केवल भारत ही कर सकता है। हमारा देश धर्मप्राण देश है। अपने धर्म का संरक्षण करते हुए अपने राष्ट्र को परम वैभव-संपन्न बनाना है।”
गुलामी के कारणों पर आत्ममंथन
भारत के अतीत का स्मरण कराते हुए सरसंघचालक जी ने कहा-
“संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान-विज्ञान होने के बाद भी यह परिस्थिति क्यों आई कि हमने 1000 वर्षों की गुलामी झेली? जिन्होंने हमें गुलाम बनाया, वे कोई हमसे श्रेष्ठ नहीं थे। संख्या में भी वे हमसे अधिक नहीं थे। किसी मामले में वे हमसे बेहतर नहीं थे, हमसे बदतर ही थे। लेकिन कुछ बातें हमारी थीं, जिन्हें हमने संभालकर नहीं रखा; हम उन्हें भूल गए। हमने अपनी तैयारी को खो दिया। उस तैयारी को हमें पुनः करना पड़ेगा।”
वर्तमान वैश्विक संघर्ष और भारत की भूमिका
वैश्विक अस्थिरता पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा,
“हम देखते हैं कि बल सम्पन्न देश मनमानी करते हैं। चाहे तो किसी देश को हथिया लो, चाहे तो किसी देश पर बम मार दो या दुनिया के तेल की सप्लाई बंद कर दो। भारत के बारे में यह विचार बने कि वह शक्ति सम्पन्न होकर ऐसा नहीं करेगा बल्कि सबको साथ लेकर चलेगा।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध ईरान और अमेरिका के बीच में होता है, लेकिन तेल की कीमतें हमारे यहां बढ़ रही हैं। दुनिया के स्वार्थ के संघर्षों में उन देशों को भी पीसा जा रहा है, जिनका उस संघर्ष से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि परिस्थिति में संकट है, लेकिन परिस्थिति में अपने पास भी अनुकूलता है, जिस पर हमें विचार करना चाहिए।

11 मई से चल रहा था प्रशिक्षण वर्ग
गौरतलब है कि यह अखिल भारतीय स्तर का ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ पिछले 11 मई से नागपुर में निरंतर चल रहा था। संघ की प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत आयोजित इस वर्ग में देशभर के अलग-अलग प्रान्तों से चयनित स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। कड़े अनुशासन और वैचारिक मंथन के बीच चले इस वर्ग में स्वयंसेवकों को संगठन कार्य और समाज सेवा के विभिन्न आयामों का सघन प्रशिक्षण दिया गया।

समापन कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथि
इस भव्य समापन समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से कई गणमान्य हस्तियां उपस्थित रहीं:
- पद्मभूषण श्री कुमार मंगलम बिड़ला जी (मुख्य अतिथि, दिग्गज उद्योगपति)
- श्री गोपालभाई मावजी गोरासिया (भुज-कच्छ, गुजरात)
- श्री दिव्यम जी त्रिपाठी (दिल्ली)
- पद्मश्री भारतभूषण जी त्यागी (बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश)
- महामहिम महाराजा गज सिंह जी (जोधपुर)
- पूजनीय श्री योगी भावनाथ जी महाराज (श्री रविकुंज आश्रम, हरमाड़ा, जयपुर)



















