अरे भाई, घर में मेहमान आया है! लेकिन ये वो मेहमान नहीं जो चाय-नाश्ता मांगे। ये तो वो है जो रात के अंधेरे में किचन में डिस्को डांस करता है, फ्रिज के पीछे छिपकर प्लान बनाता है और सुबह होते ही गायब। हां, बात हो रही है कॉकरोच की। वैज्ञानिक नाम ब्लैटोडिया ऑर्डर का ये जीव 300 मिलियन साल से धरती पर डटे हुए हैं। डायनासोर गए, इंसान आए, लेकिन ये? ये तो अभी भी हमारे घरों में राज कर रहे हैं।
कॉकरोच की सबसे बड़ी विशेषता है उसकी अद्भुत क्षमता। बिना सिर के ये एक हफ्ते तक जीवित रह सकता है! सिर कट जाए तो खून नहीं निकलता (उनका सर्कुलेटरी सिस्टम खुला होता है), और वो भूख से मरता है। सांस 40 मिनट तक रोक सकता है, पानी के नीचे घंटों रह सकता है। एक घंटे में 3 मील (लगभग 5 किमी) दौड़ सकता है – कुछ इस तरह दौड़ेगा जैसे आपके घर के कोनों में तो जैसे ओलंपिक ट्रेनिंग चल रही हो।
कॉकरोच की सबसे आम मानी जाने वाली प्रजाति-जर्मन कॉकरोच
कॉकरोच की सबसे आम मानी जाने वाली प्रजाति जर्मन कॉकरोच (ब्लाटेला जर्मेनिका) है, जिसका एक मादा अपने जीवन में 200-400 बच्चे पैदा कर सकती है। हालांकि, इसका नाम ‘जर्मन’ है, लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इसके असली पूर्वज हजारों साल पहले एशिया (मुख्य रूप से भारत और म्यांमार के आसपास) में उत्पन्न हुए थे। इनके एक ऊथेका’ (अंडे की थैली) में लगभग 30 से 50 अंडे होते हैं। और न्यूनतम 36 दिनों में नया कॉकरोच तैयार।
अमेरिकन कॉकरोच 1-2 साल जीवित रहता है। ये ठंड से लेकर गर्मी, सूखे से नम जगह – हर जगह एडाप्ट हो जाते हैं। भोजन? कुछ भी – खाना, गंदगी, मृत साथी, यहां तक कि गोंद भी। भारत में जर्मन, अमेरिकन और ओरिएंटल प्रजातियां आम हैं।
ये ‘मल्टीटैलेंट’ हैं – धावक, तैराक, छिपनेवाला, और ‘फूड क्रिटिक’। लेकिन इनकी ये विशेषताएं ही घर के लिए अभिशाप बन जाती हैं।
सफाई का दुश्मन है ‘कॉकरोच ‘
कॉकरोच की सबसे बड़ी ‘कमी’ (या हमारी बदकिस्मती) यह है कि ये सफाई का दुश्मन है। ये सीवर, कचरे, मल-मूत्र से घूमकर आता है और फिर आपके रोटी-दाल पर चलता है। 33 प्रकार के बैक्टीरिया, 6 पैरासाइटिक कीड़े, 7 अन्य पैथोजेंस कैरी करता है – सैल्मोनेला, ई.कोलाई, स्टेफिलोकोकस, यहां तक कि पोलियो वायरस और लेप्रोसी के जीवाणु।
इनकी पॉप, लार, गिरे हुए खोल (exoskeleton) हवा में एलर्जेंस फैलाते हैं। खासकर बच्चों और अस्थमा वाले लोगों के लिए घातक।
घर में कॉकरोच = फ्री हेल्थ इंश्योरेंस?
नहीं, बल्कि फ्री अस्पताल का टिकट। इसलिए अपने घर से कॉकरोचों को जितना दूर रखें, उतना ही अच्छा। ये खाने को दूषित करते हैं, फूड पॉइजनिंग, डायरिया, डिसेंट्री, टाइफाइड, कॉलेरा फैला सकते हैं। ये ‘मोबाइल बैक्टीरिया फैक्ट्री’ हैं जो बिना किसी सैलरी के 24×7 काम करती हैं।
घर में प्रेस कांफ्रेन्स करते तीन कॉकरोच देखकर हंसिए मत। ये तो आइसबर्ग का टिप हैं। जहां तीन दिखता है, वहां सैकड़ों छिपे होते हैं। ये जब सक्रिय होते हैं, दीवारों की दरारों, नालियों, फ्रिज के पीछे, कैबिनेट में घर बनाते हैं। दिखेंगे दो-चार लेकिन पूरे घर में असुरक्षा का माहौल बना देंगे। घर के लिए आंतरिक खतरा है कॉकरोच। इसलिए समय रहते उससे निपट लेना ही सही विकल्प है।
भारत जैसे देश में जहां नमी और गर्मी है, ये तो स्वर्ग समझते हैं। इन्हें पलने देना मतलब परिवार को ‘बैक्टीरिया पार्टी’ में इनवाइट करना। इन्हें रोकना जरूरी है क्योंकि ये सिर्फ ‘कीट’ नहीं, बीमारी का वाहक हैं। एक बार फैल गए तो महीनों की जंग। घर में इससे निपटने के लिए अब पेस्ट कंट्रोल की तैयारी कर लेनी चाहिए।
इन्हें घर में पालने की सलाह जॉर्ज सोरोस का कोई एजेन्ट ही दे सकता है, इन पर तो ‘अतिथि देवो भव’ का सूत्र वाक्य भी लागू नहीं होता। क्यों? क्योंकि ये ‘देव’ नहीं, ‘देवता’ का विपरीत हैं। गंदगी लाते हैं, स्वास्थ्य बर्बाद करते हैं, और एक बार बस गए तो पूरे परिवार को ‘हॉस्ट’ बना लेते हैं। सफाई, सूखापन, खाने को बंद रखना – ये बुनियादी कदम हैं। इन्हें पलने देना मतलब खुद को और बच्चों को खतरे में डालना। कॉकरोच आपके घर का ‘फ्री मेंटेनेंस इंजीनियर’ बन जाता है, जो हर कोना चेक करता है लेकिन गंदा करके!
खत्म करने के नुस्खे
1. सफाई का ‘परमाणु बम’: रोज किचन साफ करें। बर्तन रात को मत छोड़ें। कचरा बंद डिब्बे में। दरारें सील करें। ये इनकी ‘होटल’ बंद कर देगा।
2. बोरिक एसिड का जादू: बोरिक पाउडर को चीनी या आटे के साथ मिलाकर स्प्रिंकल करें। कॉकरोच खाएगा, घर जाएगा, साथियों को ‘ट्रीट’ देगा और सब मरेंगे। बच्चों-पेट्स से दूर रखें।
3. बेकिंग सोडा + शुगर: बराबर मात्रा मिलाएं। ये खाकर पेट में गैस बनेगी और… गेम ओवर। सस्ता और सुरक्षित।
4. डायटोमेशियस अर्थ (DE): प्राकृतिक पाउडर। एक्सोस्केलेटन को काटकर डिहाइड्रेट कर देता है। जहां देखें छिड़कें।
5. पेपरमिंट ऑयल/नीम/लौंग: स्प्रे बनाकर छिड़कें। इनकी ‘परफ्यूम’ पसंद नहीं। बे लीव्स (तेजपत्ता) भी काम आते हैं।
6. जाल और स्प्रे: कमर्शियल बाइट्स बेहतर। लेकिन केमिकल सावधानी से।
7. प्रोफेशनल हेल्प: भारी संक्रमण हो तो एक्सपर्ट बुलाएं। एक बार क्लीनिंग + ट्रीटमेंट।
08.कॉकरोच को ‘रिस्पेक्ट’ दो : लेकिन बाहर! रात को लाइट जलाकर इनकी ‘डांस पार्टी’ बर्बाद करो। इन्हें मारने के बाद ‘फ्यूनरल’ मत करो, बस झाड़ू से बाहर फेंको।
कॉकरोच प्रकृति में डीकंपोजर है, लेकिन घर में तो ‘डिसीज प्रोड्यूसर’। इनकी विशेषताएं सराहनीय हैं (सर्वाइवल किंग), लेकिन कमियां (गंदगी फैलाना) इन्हें अनचाहा बनाती हैं। कॉकरोच से लड़ो, लेकिन हार मत मानो। क्योंकि ये हार मानने वाले नहीं हैं। सफाई अपनाओ, स्वस्थ रहो!















