देवभूमि उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में बुक्सा, थारू, राणा और राय सिख जनजातियों के बीच ईसाई मिशनरियां कन्वर्जन करने में जुटी हुई हैं। इस संबंध में सरकार के पास हिंदू संगठनों की तरफ से शिकायत भी दी गई है। इस विषय पर दायर जनहित याचिका का नैनीताल उच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लिया है और सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया गया है।
शिकायत मिलने के बाद राज्य ने निर्देश दिए हैं कि कन्वर्जन से जुड़े मामलों पर सख्ती बरती जाए। गदरपुर, नानकमत्ता, खटीमा और सितारगंज जैसे तराई क्षेत्रों में जनजातीय समाज के गरीब और भोले-भाले लोगों को लालच, प्रलोभन और भय दिखाकर कन्वर्जन कराया जा रहा है। स्थानीय निवासी अरविंद सैनी की शिकायत पर अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ नंद मिश्र ने जांच कराई। जांच में पाया गया कि सुरेंद्र सागर ने आवासीय भूमि पर अवैध रूप से ईसाई प्रार्थना सभागार का निर्माण कराया था।
गदरपुर तहसील के बुढ़िया कॉलोनी मजरा शीला और रामजीवनपुर में अवैध रूप से प्रार्थना सभाएं संचालित किए जाने तथा कन्वर्जन कराने के आरोपों पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। प्रशासन ने उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह को सुरेंद्र सागर और उनके सहयोगियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
नानकमत्ता क्षेत्र के जादोंपुर गांव में भी इसी प्रकार का मामला सामने आया है। अंकित सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि पास्टर दान सिंह राणा और उनके सहयोगी गांवों में प्रार्थना सभाएं आयोजित कर जनजातीय समाज के लोगों को कन्वर्जन के लिए प्रलोभन दे रहे हैं।
प्रशासनिक जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई। इसके बाद मुंडेला निवासी रामपाल, द्रोपदी राणा और सुनील जार्ज के खिलाफ भी कन्वर्जन से संबंधित मामला दर्ज कराया गया है। तराई क्षेत्र के लगभग 80 गांवों में 152 जनजातीय लोगों द्वारा कन्वर्जन किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे मामलों की जांच के लिए जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। जिला प्रशासन ने एक स्क्रूटनी कमेटी भी गठित की है, जो कन्वर्जन कर चुके लोगों के जाति प्रमाणपत्रों तथा अनुसूचित जनजाति समुदाय को मिलने वाले आरक्षण और अन्य सरकारी लाभों की समीक्षा कर अपनी संस्तुति प्रशासन को देगी।
प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार सुरेंद्र सागर को वर्ष 2019 में अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। अब उसे निरस्त करने की संस्तुति की गई है। उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह के अनुसार, जांच संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 और उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई है। अंतिम निर्णय जिला स्क्रूटनी समिति द्वारा लिया जाएगा।
पंजाब से जुड़े तार
तराई क्षेत्र में सक्रिय मिशनरी नेटवर्क के तार पंजाब के अमृतसर से जुड़ने की आशंका भी प्रशासनिक जांच में सामने आई है। पुलिस विदेशी फंडिंग और आर्थिक स्रोतों की भी पड़ताल कर रही है।
एसएसपी अजय गणपति का कहना है, “एसआईटी यह जांच कर रही है कि कौन लोग धर्मांतरण कानून और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। कन्वर्जन के लिए प्रार्थना सभाएं आयोजित करने वाली संस्थाओं के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं तथा संबंधित लोगों के खातों की भी जांच की जा रही है।”
बता दें कि नानकमत्ता और सितारगंज क्षेत्र में बड़ी संख्या में राय सिख समुदाय निवास करता है, जिनके बीच मिशनरियों की गतिविधियां बढ़ी हैं। इनमें कई केशधारी और पगड़ीधारी सिख परिवार भी शामिल हैं, जिनकी पृष्ठभूमि पंजाब से जुड़ी बताई जाती है। उल्लेखनीय है कि पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर कन्वर्जन की घटनाएं सामने आती रही हैं।

न्यायालय ने दिखाई सख्ती
सनातन धर्म छोड़कर ईसाई मत अपनाने के बाद भी आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के मामलों पर नैनीताल उच्च न्यायालय ने गंभीर रुख अपनाया है। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ निवासी दर्शन लाल द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनेक लोगों ने कन्वर्जन करने के बाद भी अनुसूचित जाति-जनजाति से संबंधित सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ लेना जारी रखा है, जिससे वास्तविक पात्रों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से ऐसे लोगों की सूची प्रस्तुत करने को कहा है, जो कन्वर्जन के बाद भी दोहरा लाभ ले रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से पिथौरागढ़ जिले में कन्वर्जन कर चुके लोगों की सूची चर्च अभिलेखों के आधार पर कोर्ट में प्रस्तुत की गई है। न्यायालय ने इसी प्रकार के अन्य मामलों का ब्यौरा भी मांगा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नानकमत्ता और सितारगंज में आयोजित जनसभाओं में कहा, “उत्तराखंड में सख्त धर्मांतरण कानून लागू है और जो भी कन्वर्जन करेगा या कराएगा, उसके लिए जेल की सलाखें तैयार हैं। लालच और प्रलोभन देकर कन्वर्जन कराने की शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच प्रशासन कर रहा है। जनजातीय संस्कृति मूलतः सनातन संस्कृति का हिस्सा है और सरकार इसे समाप्त नहीं होने देगी।”
विरोध हुआ तेज
तराई क्षेत्र में बढ़ती मिशनरी गतिविधियों को लेकर विभिन्न हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने भी विरोध तेज कर दिया है। थारू विकास परिषद के सुरेश राणा का कहना है, “मिशनरियों द्वारा गरीब जनजातीय लोगों को लालच देकर कन्वर्जन कराया जा रहा है और उनकी संस्था लगातार समाज को जागरूक कर रही है।”
विहिप के प्रखंड अध्यक्ष अजय भगत ने कहा, “फिलहाल प्रतीकात्मक विरोध किया गया है, लेकिन आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।”
वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े श्रीपाल राणा ने कहा, “चंगाई सभाएं आयोजित करने वाले समूह अब जनजातीय समाज को प्रभावित करने के लिए मांस और मदिरा तक परोस रहे हैं।” उनका कहना है कि थारू, बुक्सा और राय सिख समुदायों में कन्वर्जन की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में मिशनरियों को विदेशी फंडिंग मिल रही है। इसकी जांच होनी चाहिए।

















