नई दिल्ली। आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर लोकतंत्र सेनानी संघ ने केंद्र एवं दिल्ली सरकार के समक्ष तीन सूत्रीय राष्ट्रीय माँगें रखीं तथा 5 जून को दिल्ली विधानसभा के समक्ष एक दिवसीय सांकेतिक उपवास आंदोलन आयोजित करने की घोषणा की है। लोकतंत्र सेनानी संघ ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक अत्यंत दमनकारी कालखंड था, जिसकी स्मृतियाँ आज भी हजारों परिवारों के जीवन में ताजा हैं।
लोकतंत्र सेनानी संघ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित किया जाना स्वागतयोग्य कदम है, किंतु इसके साथ ही लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों के सम्मान, आपातकाल के इतिहास के अध्ययन तथा उससे जुड़े तथ्यों के सार्वजनिक परीक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।
पहली प्रमुख मांग
CBSE, ICSE तथा सभी राज्य शिक्षा बोर्डों के पाठ्यक्रम में कक्षा 8 से 12 तक आपातकाल (1975-77) के इतिहास को अनिवार्य अध्याय के रूप में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष एवं संवैधानिक मूल्यों के महत्व को समझ सके। संघ के अनुसार लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए उसके इतिहास का अध्ययन अनिवार्य है।
दूसरी प्रमुख मांग
लोकतंत्र सेनानी संघ ने आपातकाल से संबंधित घटनाओं की जाँच हेतु उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने की माँग की है। संघ का कहना है कि आयोग यह जाँच करे कि आपातकाल लागू करने, MISA एवं DIR के अंतर्गत गिरफ्तारियाँ कराने, प्रेस सेंसरशिप लागू करने तथा न्यायपालिका पर दबाव बनाने में किन व्यक्तियों एवं अधिकारियों की भूमिका रही। संघ ने कहा कि लोकतांत्रिक इतिहास के इस अध्याय से जुड़े तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है।
तीसरी प्रमुख मांग
दिल्ली के आपातकाल पीड़ितों को सम्मान निधि एवं आधिकारिक मान्यता देने की बात कही गई है। संघ ने कहा कि दिल्ली आपातकाल का प्रमुख केंद्र रही, जहाँ बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानियों को गिरफ्तार किया गया तथा अनेक परिवार प्रभावित हुए, किंतु आज तक यहाँ आपातकाल पीड़ितों के लिए किसी सम्मान योजना का संचालन नहीं किया गया।
दिल्ली सरकार से मांग
लोकतंत्र सेनानी संघ ने कहा कि उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा सहित कई राज्यों में आपातकाल सेनानियों को सम्मान निधि एवं विभिन्न सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं, किंतु राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अब तक ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है। यह भी उल्लेख किया कि 28 मई 2025 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान निधि देने एवं सम्मानित करने की घोषणा की गई थी, जिसकी विभिन्न समाचार माध्यमों में व्यापक चर्चा हुई थी, किंतु अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। संघ का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि सम्मान निधि एवं अन्य सुविधाओं को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए।
5 जून को उपवास
लोकतंत्र सेनानी संघ ने बताया कि 5 जून 2026 को दिल्ली विधानसभा के समक्ष आयोजित एक दिवसीय सांकेतिक उपवास में आपातकाल बंदी सेनानी भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान 10,000 हजार से अधिक हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। संघ के अनुसार ज्ञापन पर देशभर के आपातकाल पीड़ितों, उनके परिवारों तथा दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के परिजनों के हस्ताक्षर हैं।
कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओ पी बब्बर, राजन ढींगरा, राजकुमार सपड़ा, अशोक महाजन, सहित अनेक वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी उपस्थित रहेंगे। संघ ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों एवं नागरिकों से लोकतंत्र की रक्षा और आपातकाल के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए समर्थन देने का आह्वान किया है।

















