सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा के लिए गठित की 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति
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सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा के लिए गठित की 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा तय करने के लिए ICFRE डायरेक्टर जनरल की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jun 3, 2026, 08:43 am IST
inभारत
Aravali range Supreme court

प्रतीकात्मक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और रेंज की नई परिभाषा तय करने के लिए एक पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की है। इससे पहले वाली 100 मीटर ऊंचाई वाली शर्त को हटा दिया गया था, जो विवादास्पद रही थी। कोर्ट अब ज्यादा व्यापक और सही परिभाषा ढूंढ रहा है।

कमिटी में कौन-कौन हैं?

इस कमिटी की अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के डायरेक्टर जनरल करेंगे, जो पदेन (एक्स-ऑफिशियों) चेयरपर्सन होंगे। इसके अलावा इसके बाकी सदस्यों के तौर पर फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) के पूर्व डायरेक्टर जनरल सुभाष आशुतोष, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र के. शर्मा, पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी बृज मोहन सिंह राठौर और दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व बॉटनी विभागाध्यक्ष अशोक के. भटनागर शामिल हैं। इस समिति को 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी है।

इसे भी पढ़ें:  3 जून का राशिफल: आज किस राशि को मिलेगा लाभ, किसे बरतनी होगी सावधानी, जानिये 12 राशियों का भविष्यफल

क्या हैं याचिकाकर्ताओं के सवाल

कुछ पर्यावरणविद् और दो याचिकाकर्ताओं ने इस पैनल की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ब्यूरोक्रेट की अगुवाई वाली समिति, जो सरकार को रिपोर्ट करती है, कैसे निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन कर पाएगी।

समिति की क्या है जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय समिति का मुख्य कार्य पहले वाली 100 मीटर ऊंचाई और 500 मीटर गैप वाली शर्तों की पर्यावरणीय वैधता जांचना। नवंबर 20, 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्वीकार की गई उस रिपोर्ट की जांच करना, जिसे बाद में स्टे कर दिया गया था। राजस्थान में कुल 12,081 पहाड़ियों में से सिर्फ 1,048 ही 100 मीटर ऊंचाई वाली हैं, इस आलोचना की सच्चाई जांचना कि बाकी निचली पहाड़ियों को सुरक्षा से वंचित किया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच करना है।

खनन का असर भी देखेगी समिति

समिति को ये भी देखना है कि नई परिभाषा के तहत तय होने वाले अरावली इलाकों में ‘सतत’ या ‘रेगुलेटेड’ खनन से पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर कोई नुकसान तो नहीं होगा। साथ ही, नई परिभाषा के बाहर छूटने वाले इलाकों की विस्तार से पहचान करनी है, उनके इकोसिस्टम और जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए। कोर्ट ने कहा कि कमिटी को निष्पक्ष तरीके से ये आकलन करना है कि कोई भी नया कदम उठाने से बाद में उलटना मुश्किल न हो जाए। अरावली के प्राचीन पर्वतों और उनके इकोसिस्टम को बचाने के लिए सही कदम सुझाने हैं।

अन्य सदस्य

स्पेशल इनवाइटियों के रूप में शामिल होंगे: जे. कृष्णास्वामी (डीन, स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी, इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स) और लक्ष्मीकांत शर्मा (सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा)। पर्यावरण मंत्रालय का डायरेक्टर रैंक अधिकारी सदस्य सचिव होगा। फिलहाल अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।

Topics: सुप्रीम कोर्टअरावली समितिसुप्रीम कोर्ट अरावली परिभाषासुप्रीम कोर्ट अरावली 5 सदस्यीय समिति सदस्य सूची
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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