राजस्थान

गाजियाबाद से उदयपुर तक निशाने पर हिन्दू! VHP अध्यक्ष आलोक कुमार बोले- ‘जिहादी मनोवृत्ति पर बुलडोजर एक्शन जरुरी’

राजसमंद में विहिप (VHP) अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने राजस्थान में UCC लागू करने और मतांतरितों को ST आरक्षण से बाहर करने की बड़ी मांगें रखीं

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Shivam Dixit



राजसमंद, (राजस्थान) |  विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने गाजियाबाद में नाबालिग हिंदू युवक सूर्य चौहान की ईद पर कुर्बानी के नाम पर की गई निर्मम हत्या सहित हाल के वर्षों में हिंदू समाज को लक्षित कर हुई अनेक हिंसक घटनाओं पर गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गाजियाबाद, दिल्ली और उदयपुर जैसी घटनाएं किसी सामान्य आपराधिक प्रवृत्ति का परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह एक ऐसी ‘जिहादी कट्टरपंथी मानसिकता’ की अभिव्यक्ति हैं जो हिंदुओं के प्रति घृणा और हिंसक मनोवृति को दर्शाती हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मनोवृत्ति के विरुद्ध शासन, सरकारों व समाज के जिम्मेदार लोगों को मिलकर पूरी तरह से लड़ना होगा और इसे मिटाना होगा।

धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा का नग्न प्रदर्शन

आलोक कुमार ने हालिया हिंसक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये केवल अलग-अलग अपराध नहीं हैं, बल्कि इन घटनाओं में एक समान प्रवृत्ति दिखाई देती है— धार्मिक पहचान के आधार पर वैमनस्य, असहिष्णुता और हिंसा का नग्न प्रदर्शन

हालिया लक्षित घटनाओं का उल्लेख:

  • गाजियाबाद (28 मई 2026): बकरीद पर मित्र के नाते बुलाकर खोड़ा क्षेत्र में 17 वर्षीय हिंदू युवक सूर्य चौहान की निर्मम हत्या।
  • दिल्ली (4 मार्च 2026): उत्तम नगर में होली के अवसर पर तरुण की हत्या।
  • उदयपुर: विद्यालय परिसर जैसे पवित्र स्थान में छात्र देवराज पर हुआ प्राणघातक हमला।
  • महाराष्ट्र: अमरावती में उमेश कोल्हे की जघन्य हत्या।

“स्कूली बच्चों तक पहुंच रहा कट्टरपंथी सोच का विष”

“यदि किसी युवक को केवल इसलिए मार दिया जाए कि वह हिंदू है, अथवा दोस्ती के रिश्ते और विद्यालय जैसे पवित्र स्थान में बच्चों के बीच भी कट्टरता और हिंसा प्रवेश कर जाए, तो यह पूरे समाज के लिए चेतावनी का विषय है। ऐसे घटनाक्रम संकेत देते हैं कि जिहादी कट्टरपंथी सोच का विष समाज के विभिन्न स्तरों तक पहुँच रहा है।”

विहिप अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक विश्व में हिंसा, आतंक और जिहादी कट्टरवाद की अवधारणा का कोई स्थान नहीं हो सकता। ऐसी गंभीर घटनाओं को केवल ‘कानून-व्यवस्था की समस्या’ मानना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि ये विश्व शांति और सामाजिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं।

सेक्युलर समूहों का चयनात्मक मौन है ‘नैतिक दिवालियापन’

आलोक कुमार ने उन लोगों पर भी तीखा प्रहार किया जो परोक्ष या अपरोक्ष रूप से ऐसी मानसिकता को पनाह देते हैं। उन्होंने कहा कि जितने दोषी ऐसे जघन्य कृत्य करने वाले लोग हैं, उतने ही दोषी वे भी हैं जो इन्हें वैचारिक संरक्षण प्रदान करते हैं या अपने अपराधों पर पर्दा डालते हुए सुविधानुसार मौन धारण कर लेते हैं।

उन्होंने समाज से सीधा प्रश्न किया, “जब पीड़ित हिंदू समाज का व्यक्ति होता है, तब तथाकथित सेक्युलर समूहों, मानवाधिकारवादियों और अनेक राजनीतिक दलों की आवाज़ क्यों बंद हो जाती है?” उन्होंने इस चयनात्मक मौन को नैतिक दिवालियापन और कट्टरपंथ को प्रोत्साहन देने का माध्यम करार दिया।

हिंदू समाज से आह्वान और सरकारों से 2 प्रमुख मांगें

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने संपूर्ण समाज, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और सरकारों से आग्रह किया कि वे ऐसी हिंसक मनोवृति का स्पष्ट और निर्भीक विरोध करें। उन्होंने चेतावनी दी कि कट्टरता के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी भविष्य में और बड़ी त्रासदियों को जन्म दे सकती है।

उन्होंने हिंदू समाज का आह्वान किया कि वह संगठित, सजग और आत्मरक्षार्थ पुरुषार्थी बने।

प्रेस वार्ता में रखी गईं बड़ी मांगें:

  1. समान नागरिक संहिता (UCC): राजस्थान सरकार से मांग की गई कि वह इसी वर्ष राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करे।
  2. आरक्षण नियमों में संशोधन: केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि वह अपने पुराने प्रेसिडेंशियल आदेश में संशोधन कर, धर्मांतरित लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) के सभी अधिकारों से वंचित करे।

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