पश्चिम एशिया में चल रही सैन्य संकट की आग अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है जिसकी आंच सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को झुलसा सकती है। लेबनान में इजरायल के बढ़ते हमलों का असर अब दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्गों पर पड़ने जा रहा है।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) में तेल और अन्य व्यापारिक गतिविधियों में आने वाली रुकावटों के बीच अब ईरान और उसके सहयोगी संगठनों ने ‘बाब-अल-मंदेब’ (Bab al-Mandeb Strait) जलमार्ग को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। यह संकरा समुद्री रास्ता यमन और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के बीच में है जो ग्लोबल कॉमर्स की लाइफलाइन माना जाता है। अगर यह मार्ग बंद होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।
ताजा विवाद जिसके बाद बिगड़ी बात
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने लेबनान में इजरायल के लगातार जारी सैन्य हमलों के विरोध में अमेरिका के साथ होने वाली परोक्ष वार्ता को पूरी तरह से स्थगित कर दिया है। ईरान का साफ कहना है कि जब तक लेबनान और गाजा में निर्दोष लोगों पर हमले नहीं रुकते तब तक अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि यह कूटनीतिक बातचीत पूरी होती है या नहीं।
इसी बीच अमेरिका और लेबनान की ओर से एक आंशिक युद्धविराम की घोषणा की लेकिन जमीनि स्तर पर इसका असर नहीं दिखा। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि उनका सैन्य अभियान दक्षिणी लेबनान में तब तक जारी रहेगा, जब तक वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर लेते। इसका साफ मतलब है कि यह संकट बाब-अल मंदेब तक पहुंच सकता है।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है ‘बाब-अल-मंदेब’ जलमार्ग?
‘बाब-अल-मंदेब’ को अरबी भाषा में आंसुओं का दरवाजा कहते हैं। यह जलडमरूमध्य लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर मौजूद है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। यह रास्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एशिया को स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप और भूमध्य सागर से जोड़ने वाला सबसे छोटा समुद्री मार्ग है। इस रास्ते से रोजाना लाखों बैरल तेल और अरबों डॉलर का जरूरी सामान यूरोप और अमेरिका जाता है। ईरान का कहना है कि अगर इजरायल लेबनान और गाजा पर ऐसे ही हमले जारी रखेगा तो वह ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ की मदद से बाब अल मंदेब पर भी पहरा लगा देगा। ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ ईरान समर्थित एक गुट है जिसमें यमन के हूती विद्रोही, लेबनान के हिजबुल्लाह और गाजा के हमास जैसे संगठन शामिल हैं।
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वैश्विकस्तर पर बढ़ जाएगी महंगाई
अगर ईरान अपनी इस धमकी पर अमल करता है तो इसके परिणाम घातक होंगे। जैसे:
- -सप्लाई चेन अचानक टूटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी और इससे माल ढुलाई भी मंहगी हो जाएगी, जिसका असर वैश्विक आम उपभोक्ता पर पड़ेगा।
- मालवाहक जहाजों को एशिया से यूरोप जाने के लिए लाल सागर और स्वेज नहर का रास्ता छोड़कर पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा। इससे सप्लाई चेन पर असर होगा और वक्त पर दूसरे देशों तक सामान पहुंचने में बाधा आएगी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज, दवाइयां, कारें और रोजमर्रा के इस्तेमाल की सभी चीजें अत्यधिक महंगी हो जाएंगी। नतीजन दुनिया भर के बैंकों को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ेंगी और वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा।
भारत के लिए भी है चिंता की बात
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इसमें से एक बहुत बड़ा भाग फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत आता है। इसके अलावा भारत का यूरोप और अमेरिका के साथ होने वाला अधिकांश निर्यात जैसे कपड़ा, मरीन प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग सामान इसी बाब-अल-मंदेब और लाल सागर के रास्ते से जाता है। अगर यह मार्ग बंद होता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके कारण घरेलू बाजार में फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। साथ ही भारतीय निर्यातकों को भारी घाटा उठाना पड़ेगा।

















