पंजाब में लोकतंत्र के नाम पर चल रही तानाशाही का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जिला होशियारपुर के टांडा उड़मुड़ नगर में एक युवक पर आम आदमी पार्टी के चुनाव चिन्ह झाड़ू की बेअदबी का आरोप लगाकर पुलिस ने उसे जेल में ठूंस दिया। शायद देश के लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहली घटना होगीै।
उड़मुड़ नगर परिषद चुनाव में वार्ड नंबर एक से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार की जीत के बाद हुए जश्न के दौरान चुनाव चिन्ह की कथित ‘बेअदबी’ हुई। अब इस आरोप में टांडा पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। खास बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है और कार्रवाई केवल एहतियाती आधार पर की गई है।
पुलिस थाना टांडा की डेली डायरी में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार अर्शदीप सिंह और कुछ अन्य व्यक्तियों ने जीत के जश्न के दौरान झाड़ू बिखेर कर आम आदमी पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘झाड़ू’ की बेअदबी की। हारने वाले उम्मीदवार के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। पुलिस का कहना है कि इस घटना से क्षेत्र में शांति भंग होने और राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी।
कोई एफआईआर दर्ज नहीं
थाना प्रभारी गुरिंदरजीत सिंह नागरा ने बताया कि अर्शदीप सिंह और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अर्शदीप को केवल एहतियाती कदम के तौर पर हिरासत में लिया गया था ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोका जा सके। उन्होंने बताया कि आरोपी को कार्यकारी मजिस्ट्रेट/तहसीलदार की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब उसे दो जून को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि पुलिस की रोजनामचा रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘झाड़ू’ की कथित “बेअदबी” का उल्लेख किया गया है। आमतौर पर ‘बेअदबी’ शब्द धार्मिक प्रतीकों या धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में प्रयोग किया जाता है, लेकिन इस मामले में इसका इस्तेमाल एक राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह के संदर्भ में किया गया है।
परिवार ने सिरे से खारिज किए आरोप
अर्शदीप सिंह के परिवार ने पुलिस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अर्शदीप के चाचा बलवीर सिंह और चाची परमिंदर कौर ने बताया कि वह केवल विजयी उम्मीदवार और उसके समर्थकों के साथ खुशी मना रहा था तथा उसके हाथ में लोगों में बांटने के लिए लड्डुओं के पैकेट थे। उन्होंने कहा कि अर्शदीप ने न तो कोई झाड़ू तोड़ी, न फेंकी और न ही किसी उम्मीदवार के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
परिवार का आरोप है कि पुलिस ने अर्शदीप को रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित उनकी पुस्तक दुकान से हिरासत में लिया। उन्होंने उसे एक शांत, सभ्य और कानून का सम्मान करने वाला युवक बताते हुए कहा कि उसे गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है। अब यह मामला 2 जून को अदालत में फिर सुनवाई के लिए आएगा।

















