नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बारे में राजनीतिक स्वार्थों के चलते अक्सर फैलाई जाने वाली भ्रांतियों पर करारा प्रहार करते हुए, संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने स्पष्ट किया है कि संघ किसी से द्वेष नहीं करता और न ही उसकी किसी से दुश्मनी है। संघ समाज के सभी वर्गों को अपना मानता है और सबसे संवाद स्थापित करने की प्रबल भावना रखता है।
नागपुर के सिविल लाइंस स्थित चिटनविस सेंटर (Chitnavis Centre) में पत्रकारों व संपादकों के लिए आयोजित एक विशेष मीडिया संगोष्ठी में श्री आंबेकर ने संघ के शताब्दी वर्ष के प्रवास, समाज से आत्मीयता और भविष्य की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रमुख उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में विदर्भ प्रांत संघचालक दीपक जी तामशेट्टीवार और नागपुर महानगर संघचालक राजेश जी लोया भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रांत के बड़े समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों के संपादक, ब्यूरो चीफ और सीनियर पत्रकारों ने मुख्य रूप से भाग लिया।
“हिन्दू मजबूत होंगे तो मुस्लिम-ईसाईयों समेत सभी का होगा हित”
संघ की मूल विचारधारा पर बात करते हुए सुनील आंबेकर जी ने कहा कि संघ का प्रारंभ से ही यह दृढ़ मत है कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है।
“अगर इस देश के हिन्दू मजबूत होंगे, तो यह समाज के सभी पंथों—जिसमें मुस्लिम और ईसाई भी शामिल हैं—के हित में होगा। इससे समाज और देश दोनों का लाभ होगा। अगर भारत का हित होगा, तो पूरी दुनिया का भी हित होगा। जो लोग केवल ‘जाति की राजनीति’ करना चाहते हैं, वे ही इस संकल्पना का विरोध करते हैं।”
कम्युनिज्म पर डॉ. आंबेडकर के विचार
वर्तमान राजनीति में गढ़े जा रहे नए गठजोड़ों और नारों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के मूल विचारों को याद दिलाया।
- आजकल कुछ राजनीतिक लोग ‘जय भीम-लाल सलाम’ जैसे नारे लगा रहे हैं, जो वैचारिक रूप से विरोधाभासी हैं।
- वास्तव में, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने खुद कहा था कि जब तक दुनिया में गौतम बुद्ध का दिखाया ‘शांति का मार्ग’ उपलब्ध है, तब तक कार्ल मार्क्स या किसी अन्य के मार्ग पर चलने की कोई आवश्यकता नहीं है।
- बाबासाहेब ने संविधान सभा में अपने ऐतिहासिक भाषण में स्पष्ट कहा था कि कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट ही संविधान के सबसे बड़े शत्रु हैं।
सांस्कृतिक स्मृतिभ्रंश को दूर कर रहा संघ: विदेशों में बढ़ा संवाद
श्री आंबेकर ने बताया कि विश्व के कई देशों में भारत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में अभी भी गलत धारणाएं व्याप्त हैं, क्योंकि वहां प्रामाणिक जानकारी का अभाव है। इसे दूर करने के लिए संघ अब विदेशों में वहां के बुद्धिजीवियों, समाज के नेताओं और पत्रकारों से संवाद करने पर विशेष ज़ोर दे रहा है।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हमारे देश में भी लोग अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भूल गए हैं। संघ समाज के बीच व्याप्त इस ‘स्मृतिभ्रंश’ को दूर करने और भारतीयों की मूल पहचान जागृत करने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
भारत के ‘GenZ’ है राष्ट्रप्रेमी, देश पर उनका परम विश्वास
दुनिया भर के कई देशों में जहां ‘GenZ’ (नई युवा पीढ़ी) सड़कों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं भारत की GenZ को लेकर आंबेकर जी ने सकारात्मक दृष्टिकोण रखा।
उन्होंने कहा- “भारत की GenZ का देश और लोकतंत्र पर परम विश्वास है।” यह पीढ़ी अत्यधिक आशावादी है, जो लगातार भारत के विकास के बारे में सोचती है और मानती है कि किसी भी जटिल मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सकता है।
“संघ शक्तिशाली होता तो नहीं होता देश का विभाजन”
इतिहास के पन्नों को पलटते हुए सुनील आंबेकर जी ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि “अगर उस कालखंड में संघ की शक्ति अधिक होती, तो शायद देश का विभाजन नहीं होता।”
विभाजन की उस विभीषिका में भी संघ ने हिन्दुओं की रक्षा और उनके पुनर्वास के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाजन के बाद स्वाधीनता के नायकों के विषय में एक नकारात्मक वातावरण बना। उस समय राजनीतिक कारणों और संघ को ‘राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी’ समझने की भूल के कारण ही संघ पर प्रतिबंध लगाया गया था।
पश्चिम बंगाल: डॉ. हेडगेवार जी से लेकर मोहन भागवत जी तक की कर्मभूमि
संगोष्ठी के दौरान पश्चिम बंगाल से जुड़े सवालों का बेबाकी से उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि आज पश्चिम बंगाल में संघ के सर्वाधिक प्रचारक (Pracharaks) सक्रिय हैं।
उन्होंने ऐतिहासिक जुड़ाव बताते हुए कहा कि संघ के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की शिक्षा कलकत्ता (अब कोलकाता) में ही हुई थी और 1939 में वे वहां कार्य के लिए गए थे। उसके बाद से सभी सरसंघचालकों ने बंगाल में कार्य किया है। वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भी जब सरकार्यवाह थे, तब तीन वर्षों तक कलकत्ता को ही अपना केंद्र बनाया था। आज बंगाल की भूमि पर प्रचारकों के इसी गहरे समर्पण से वहां व्यापक जन भावना जागृत हो रही है।
















