
कोटा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राजस्थान का नौवां प्रदेश महाधिवेशन शनिवार को प्रातः दस बजे कोटा में भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। इस महाधिवेशन का आयोजन तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा एकीकृत महाविद्यालय में किया जा रहा है। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत मां भारती और मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा परिषद् गान के साथ हुई।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में ओम कृष्ण बिरला उपस्थित रहे। उन्होंने रचनाकारों के पावन दायित्व का उल्लेख करते हुए साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि ओम कृष्ण बिरला ने कहा: “भारत की आत्मा भारत के साहित्यकारों में बसती है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की स्थापना का मूल उद्देश्य भारतबोध और राष्ट्रभक्ति से युक्त भारतीयता रहा है, जो अब ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ जैसे उदात्त वैश्विक मानवीयता के मापदंड पर पूरी तरह खरा उतर रहा है।”
सत्र के विशिष्ट अतिथि डॉ. पवनपुत्र बादल ने भारतीय साहित्य के मानवीय मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत भूमि महान साहित्यकारों और विचारकों की भूमि रही है। उन्होंने महाकवि कालिदास और गोस्वामी तुलसीदास के काव्य में निहित विराट मानवीय मूल्यों का भी विशेष उल्लेख किया।
इस सत्र का कुशल संचालन परिषद् के प्रदेश महामंत्री डॉ. केशव शर्मा ने किया।
दोपहर के भोजनावकाश के पश्चात महाधिवेशन के विभिन्न सत्रों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया।
महाधिवेशन का पंचम सत्र ‘संभागशः बैठक, दायित्व घोषणा और दायित्व बोध’ पर केंद्रित रहा। इस दौरान संगठन को मजबूत करने के लिए विविध दायित्वों की घोषणाएं की गईं और आगामी रूपरेखा तय की गई।
दिवस के अंत में, संध्याकाल के समय एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश भर से आए हुए कवियों ने ‘संघ’ विषय पर केंद्रित अपनी कविताओं का पाठ किया। कविताओं के माध्यम से पूरा वातावरण राष्ट्रीयता और देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया। इस शानदार काव्य संध्या का संचालन प्रख्यात कवि योगीराज योगी ने किया।