3 महीने से ज्यादा नहीं रुकेगा फैसला, सुप्रीम Court ने हाई कोर्टों को दिया सख्त आदेश
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3 महीने से ज्यादा नहीं रुकेगा फैसला, सुप्रीम Court ने हाई कोर्टों को दिया सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्टों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी मामले में आदेश सुरक्षित रखने के बाद अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए।

Written byMahak SinghMahak Singh
May 29, 2026, 03:08 pm IST
inभारत

देश की अदालतों में मामलों की लंबी सुनवाई और फैसलों में होने वाली देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्टों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी मामले में आदेश सुरक्षित रखने के बाद अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए। अदालत ने कहा कि न्याय में देरी से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है और कई बार उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी प्रभावित होती है।

जमानत में देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

यह अहम टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों का सबसे बड़ा दायित्व समय पर न्याय देना है। यदि फैसले लंबे समय तक सुरक्षित रखे जाते हैं, तो इससे आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। सुप्रीम कोर्ट ने खासतौर पर जमानत से जुड़े मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि जमानत याचिकाओं पर आदेश उसी दिन सुनाए जाने चाहिए। यदि किसी कारणवश आदेश सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन तक जरूर जारी और वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की आजादी से जुड़ा मामला अधिक समय तक लंबित नहीं रहना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि अगर किसी आरोपी को जमानत मिलती है या उसकी सजा पर रोक लगाई जाती है, तो संबंधित जेल अधिकारियों को तुरंत इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कैदी को उसी दिन या अधिकतम अगले दिन तक रिहा कर दिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, तकनीकी कारणों या प्रशासनिक देरी की वजह से किसी व्यक्ति को जेल में अतिरिक्त समय तक रखना गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि यदि किसी मामले में फैसले का केवल मुख्य हिस्सा यानी ऑपरेटिव भाग सुनाया जाता है, तो पूरा विस्तृत फैसला 15 दिनों के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे संबंधित पक्षों को फैसले की पूरी जानकारी समय पर मिल सकेगी। इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई हाई कोर्ट चार महीने तक फैसला सुरक्षित रखने के बावजूद निर्णय नहीं सुनाता है, तो संबंधित पक्ष उस हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से संपर्क कर सकता है। ऐसे मामलों में चीफ जस्टिस चाहें तो उस केस को किसी दूसरी बेंच को सौंप सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इससे लंबित मामलों में तेजी आएगी और न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जब किसी फैसले को खुली अदालत में सुनाया जाए, तो उसका पूरा लिखित आदेश 24 घंटे के भीतर अदालत की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को फैसलों की जानकारी जल्दी मिल सकेगी।

Topics: SuryakantJoymallya BagchiIndiaSupreme CourtHigh Court judgmentsjudgment delayjudicial reformpersonal liberty casesbail applications
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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