इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मोहम्मद अहसान ने याचिका दायर की थी। वे इस्लाम मजहब छोड़कर सनातन धर्म में घर वापसी करना चाहते थे। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने याचिकाकर्ता के घर वापसी के आवेदन पर अपनी सहमति दे दी है। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार करते हुए मोहम्मद अहसान को अनिल पंडित बनने की स्वीकृति दे दी है।
विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए याची ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के अंतर्गत 27 मई 2022 को इस्लाम धर्म से सनातन धर्म में घर वापसी करने के लिए आवेदन किया था। इस आवेदन को खारिज कर दिया गया। इसके बाद याची ने उच्च न्यायालय में उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनका आवेदन खारिज किया गया था। याची के अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने न्यायालय में कहा कि याची ने सभी विधिक औपचारिकताएं पूरी की हैं। याची ने बिना किसी दबाव, प्रलोभन के सनातन धर्म अपनाया है। याची के आवेदन को स्वीकार किया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी ने मांगी पुलिस रिपोर्ट
न्यायालय में कहा गया कि प्रयागराज जनपद के उप जिलाधिकारी ने इस प्रकरण की जांच के लिए पुलिस रिपोर्ट मंगाई थी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि याची ने बिना किसी दबाव या लालच के स्वेच्छा से घर वापसी की है। याचिकाकर्ता पर घर वापसी के लिए किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया था और न ही उसे किसी अनुचित तरीके से प्रभावित किया गया था।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पीएचडी करते समय अनिल पंडित की मुलाकात अपर्णा बाजपेयी से हुई थी। कुछ समय बाद दोनों लोगों ने प्रेम विवाह कर लिया था। अपर्णा बाजपेयी ने न्यायालय को बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से सनातन धर्म के रीति-रिवाजों के अनुसार अनिल पंडित से शादी की। अपर्णा के पिता इस विवाह के खिलाफ थे। इसके बाद अपर्णा के पिता ने अनिल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दिया था। अपर्णा, बलिया के इंटर कॉलेज में अंग्रेजी की शिक्षिका हैं।
याची है असिस्टेंट प्रोफेसर
उल्लेखनीय है कि याची, प्रयागराज जनपद के एक डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पीएचडी करने के दौरान उन्होंने एक हिंदू युवती अपर्णा वाजपेयी से प्रेम विवाह कर लिया था। उसके बाद उन्होंने विधि विधान से सनातन धर्म को अपना लिया। उन्होंने आर्य समाज मंदिर में सनातन धर्म अपनाया और अपना नाम अनिल पंडित रख लिया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि अनिल पंडित ने गत 12 जनवरी 2022 को जिला मजिस्ट्रेट के सामने यह घोषणा की थी कि वह अपनी इच्छा से सनातन धर्म स्वीकार करना चाहते हैं। गत 14 मार्च 2022 को आर्य समाज मंदिर में विधि-विधान से उनकी घर वापसी कराई गई। घर वापसी के बाद नया नाम ‘ अनिल पंडित ‘ रखा गया। पुजारी की ओर से घर वापसी की सूचना जिला मजिस्ट्रेट को दे दी गई थी। याची का झुकाव सनातन धर्म के प्रति छात्र जीवन से ही हो गया था। याची के परिवार में कभी नमाज पढ़ने की परंपरा नहीं थी। उच्च न्यायालय के आदेश पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने आदेश पारित कर याची के घर वापसी के आवेदन को स्वीकार कर लिया।

















