
बरेली | उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए डेढ़ साल के अपहृत बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दो आरोपियों के पैर में गोली लगी है, जिन्हें गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गैंग का मास्टरमाइंड एक नर्सिंग का छात्र निकला, जो पैसों के लालच में मासूमों का सौदा कर रहा था।
घटना की शुरुआत 24 मई को हुई थी। रमन नामक व्यक्ति, जो अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ मनौना धाम के पास किराए के मकान में रहते हैं, उनका डेढ़ साल का बेटा घर के बाहर खेल रहा था। सुबह करीब साढ़े 10 बजे जब अन्य बच्चे घर लौट आए लेकिन मासूम वापस नहीं आया, तो परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। काफी तलाश के बाद परिजनों ने बरेली के आंवला थाने में मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने जब इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो दो संदिग्ध युवक बच्चे को उठाकर ले जाते हुए साफ दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस की पांच टीमों ने जाल बिछाना शुरू किया।
बीती रात पुलिस को सूचना मिली कि दो संदिग्ध युवक बाइक पर बच्चे के साथ फुलासी गांव के पास छिपे हैं और उसे दिल्ली ले जाकर बेचने की फिराक में हैं। घेराबंदी के दौरान बाइक सवारों ने भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग झोंक दी।
पूछताछ में पकड़े गए आरोपी योगेश ने जो खुलासा किया वह तंत्र को दहला देने वाला है। योगेश शाहजहांपुर के मेडिकल कॉलेज से M.Sc नर्सिंग का कोर्स कर रहा है। उसकी मुलाकात अस्पताल में इलाज कराने आए पवन से हुई थी।
आरोपियों ने बताया कि लखीमपुर के एक मरीज ने उन्हें बच्चा चोरी करने के बदले 60 हजार रुपये देने का लालच दिया था। पुलिस के अनुसार, यह आरोपी पिछले कई महीनों से नवजात शिशुओं की तलाश कर रहे थे। ये एक ऐसे संगठित गैंग के संपर्क में थे जो निःसंतान दंपत्तियों को बच्चा बेचने का अवैध कारोबार कर रहा है।
बरेली पुलिस अब इस नेटवर्क की गहराई तक जाने के लिए अन्य आरोपियों और संभावित खरीदारों की तलाश में दबिश दे रही है।