नई दिल्ली | बकरीद के अवसर पर मुस्लिम समाज के एक वर्ग द्वारा गौहत्या की जिद पर अड़े रहने और इसके पक्ष में नए तर्क गढ़ने पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने इसे हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संपूर्ण हिंदू समाज गाय को माता मानकर पूजता है, इसके बावजूद इस तरह की जिद पकड़े रहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अपने कृत्यों पर पर्दा डालने के लिए रोज नए कुतर्क गढ़े जा रहे हैं।
सनातन और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान पर उठाए सवाल
हाल ही में गौ माता को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग वाले तर्कों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विहिप नेता ने इसे एक छलावा बताया।
डॉ. सुरेन्द्र जैन ने कहा, “गौ माता को मात्र एक ‘पशु’ कहकर संबोधित करना, गौ माता और संपूर्ण हिंदू समाज का सीधा अपमान है। राष्ट्र और सनातन के प्रतीकों के प्रति इस कट्टरपंथी वर्ग का रवैया जगजाहिर है। अदालती व सरकारी आदेश जारी होने के बावजूद ‘वंदे मातरम’ का अपमान किया जाता है और आज भी कई मदरसों में राष्ट्रगान नहीं गाया जाता।”
उन्होंने कहा कि ऐसे में इस वर्ग की बातों पर कोई विश्वास नहीं कर सकता।
प्रेस वक्तव्य:
गौहत्या व सनातन प्रतीकों का अपमान असहनीय; गौ रक्षार्थ किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है हिंदू समाज : डॉ. सुरेन्द्र जैन
नई दिल्ली, 27 मई 2026। बकरीद के अवसर पर मुस्लिम समाज के एक वर्ग द्वारा गौहत्या की जिद पर अड़े रहने और इसके पक्ष में कुतर्क गढ़ने पर विश्व हिंदू… pic.twitter.com/5Rb77Zkzit— Vishva Hindu Parishad -VHP (@VHPDigital) May 27, 2026
विगत घटनाओं और कानून उल्लंघन का दिया हवाला
डॉ. जैन ने 2017 के पशु वध नियमन निर्देशों का जिक्र करते हुए पुरानी घटनाओं की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने नियम बनाए थे, तब केरल और बंगाल जैसे राज्यों में (जहाँ गौ हत्यारों के अनुकूल सरकारें थीं) सरेआम गायें काटी गई थीं। उन्होंने उस दौरान गौ माता का कटा हुआ सिर हाथ में लेकर किए गए भौंडे और बेहूदे प्रदर्शनों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय करार दिया।
‘हिंदू समाज किसी भी सीमा तक जा सकता है’
विहिप की दो-टूक चेतावनी:
- देश के आधे से अधिक क्षेत्रफल में गौहत्या विरोधी कानून लागू है, इसके बावजूद इस तरह की जिद करना पूरी तरह गलत है।
- हिंदू समाज गौहत्या को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
- इतिहास गवाह है कि हिंदू समाज ने गौ माता की रक्षा के लिए ही 1857 की ऐतिहासिक क्रांति की थी।
डॉ. सुरेन्द्र जैन ने दृढ़तापूर्वक चेतावनी देते हुए कहा कि अपनी आस्था और गौ माता की रक्षा के लिए हिंदू समाज किसी भी सीमा तक जा सकता है।
सह-अस्तित्व के लिए सम्मान है आवश्यक
बयान के अंत में डॉ. जैन ने एक कड़ा लेकिन स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि समाज में शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व (Co-existence) बनाए रखना है, तो दूसरे समाज की धार्मिक भावनाओं और आस्था का सम्मान करना कट्टरपंथियों को सीखना ही होगा। जिहादी जिद छोड़कर दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने में ही सबका हित निहित है।















