नई दिल्ली | दिल्ली में लाल किले के निकट हुए बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए न्यायालय में साढ़े सात हजार पेज का आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है। इस विस्तृत आरोप पत्र में एनआईए ने विभिन्न अभियुक्तों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य संकलित किए हैं, जिनसे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
NIA की चार्जशीट में दर्ज हैं आतंकियों के खिलाफ साक्ष्य
दाखिल किए गए आरोप पत्र में इस बात के भी अहम साक्ष्य संकलित किए गए हैं कि आतंकियों की नजर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के भीड़भाड़ वाले और अति-संवेदनशील इलाकों में भी विस्फोट करने का भयानक षड्यंत्र रचा था।
आतंकियों के निशाने पर थे लखनऊ के ये प्रमुख इलाके:
- उत्तर प्रदेश विधानसभा और बापू भवन
- ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा
- व्यापारिक और भीड़भाड़ वाले केंद्र लालबाग एवं अमीनाबाद
जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी डॉक्टर मुजम्मिल एवं डॉक्टर शाहीन सईद पिछले वर्ष 25 से 30 अगस्त 2025 के बीच में फरीदाबाद से लखनऊ पहुंचे थे। इन लोगों ने इन इलाकों की गहन रेकी की थी और इन्हें आतंकी हमले के लिए बेहद उपयुक्त माना था। एनआईए के मुताबिक, कार में विस्फोटक पदार्थ रख करके घटना को अंजाम दिए जाने का षड्यंत्र रचा गया था।
टीएटीपी (TATP) विस्फोटक बनाने के लिए रसायनों की खोज
एनआईए की विवेचना में यह पाया गया कि डा. मुजम्मिल ने अपने मोबाइल से लखनऊ में उन केमिकल दुकानों की खोज की थी, जहां पर ट्रायएसिटोन ट्राइपेराक्साइड (टीएटीपी) बनाने के लिए जरूरी रसायन आसानी से मिल सकें। बता दें कि इसी खतरनाक टीएटीपी विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल 10 नवंबर 2025 को लाल किले के निकट हुए बम विस्फोट में किया गया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि मुजम्मिल के कहने पर ही शाहीन सईद ने इन केमिकल दुकानों के नाम अपने हाथ पर लिख लिए थे। इन दुकानों की पूरी सूची एनआईए को शाहीन के फोन से प्राप्त हुई है, जो इस साजिश का एक मजबूत तकनीकी साक्ष्य बन गई है।
सूत्रों के मुताबिक, रेकी और साजिश रचने के दौरान ये दोनों अभियुक्त लखनऊ में शाहीन के एक रिश्तेदार के घर पर ही ठहरे हुए थे। एनआईए इस मामले की आगे की कड़ियों को भी बारीकी से जोड़ रही है।

















