पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर हाल ही में बांग्लादेशी घुसपैठियों की भारी भीड़ देखी गई। बताया जा रहा है कि हकीमपुर बॉर्डर इलाके में पहुंची यह भीड़ बांग्लादेश जाने के लिए है। बंगाल में बसे ये अवैध बांग्लादेशी हैं जो अपने खिलाफ राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई जैसे गिरफ्तार होने या फिर डिपोर्ट करने से बचने के लिए ऐसा कदम उठा रहे हैं।
हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने संदिग्ध विदेशी नागरिकों (रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों) के लिए ‘होल्डिंग सेंटर’ (हिरासत केंद्र) शुरू कर दिए और अपनी नई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के तहत सख्त कार्रवाई की घोषणा की है। इसका नतीजा यह है कि बहुत से लोग जो असल में भारत नहीं पड़ोसी देश के नागरिक हैं, वह सीमाओं की तरफ बढ़ रहे हैं। इससे पहले राज्य की सीमाओं पर SIR प्रक्रिया शुरू होने के समय भी ऐसे ही दृश्य देखे गए थे।
अवैध विदेशी नागरिकों के लिए बनाया गया होल्डिंग सेंटर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मालदा अवैध विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर शुरू करने वाला पश्चिम बंगाल का पहला जिला बन गया है। इंग्लिश बाजार के चंदन पार्क में बनाए गए इस केंद्र में फिलहाल 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। इनमें 3 महिलाएं और 6 नाबालिग शामिल हैं। इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच गजोले के पांडुआ इलाके से यहां लाया गया था।
इस होल्डिंग सेंटर की सुरक्षा बेहद पुख्ता की गई है। यहां 24 घंटे सीसीटीवी (CCTV) निगरानी, भारी पुलिस बल और नागरिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। साथ ही हिरासत में लिए गए लोगों के भोजन और रखरखाव की पूरी व्यवस्था की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि यह होल्डिंग सेंटर उन विदेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से रखने के लिए बनाया गया है जिन्हें अवैध प्रवेश या वैध दस्तावेजों की कमी के आरोप में पकड़ा गया है। यह कदम राज्य के आदेश के बाद बनाया गया है।
सीमा पर मौजूद भीड़ के बीच एक बांग्लादेशी नागरिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मैं पिछले एक या दो साल से यहां दमदम (कोलकाता) में रह रहा हूं। अगर प्रशासन हमें यहां नहीं रहने देगा तो हम क्या कर सकते हैं? हमें वापस जाना ही होगा।’
क्या है ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति?
बता दें कि जब से पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनी है तब से उसने बार-बार यह कहा है कि वह अवैध घुसपैठ के खिलाफ बेहद सख्त नीति लागू करेगी। हाल ही में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा पकड़े गए घुसपैठियों को अब लंबी अदालती प्रक्रियाओं से गुजारने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दिया जाएगा। सीएम ने कहा था, ‘जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे से बाहर हैं, वे घुसपैठिए हैं। उन्हें राज्य पुलिस गिरफ्तार करेगी और उनको सीधे बीएसएफ के हवाले कर दिया जाएगा।’
उन्होंने कहा था कि इसके बाद बीएसएफ निर्वासन की औपचारिकताओं के लिए ‘बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश’ (BGB) के बात कर आगे की कार्रवाई जारी रखेगी। घुसपैठियों को अदालतों में पेश करने के बजाय सीधे उत्तर 24 परगना के पेट्रापोल और बसीरहाट जैसे सीमावर्ती इलाकों पर बीएसएफ चौकियों को सौंप दिया जाएगा।
केंद्र सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार हो रहा काम
प्रशासन की यह हालिया कार्रवाई संसद के द्वारा पिछले साल पारित किए गए आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 से जुड़ी है। इस नए कानून ने आव्रजन, पंजीकरण और निर्वासन से संबंधित कई पुराने कानूनों की जगह ली है और निगरानी तथा हिरासत के लिए एक तकनीक-संचालित ढांचा पेश किया है। इस नए कानून के तहत पुलिस विभाग को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। अब हेड कांस्टेबल रैंक और उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों को आव्रजन नियमों का उल्लंघन करने के संदिग्ध व्यक्तियों को बिना वारंट के गिरफ्तार करने की शक्ति मिली है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर एक विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया था। इन नियमों में होल्डिंग सेंटर स्थापित करने और संदिग्धों को 30 दिनों तक हिरासत में रखने का प्रावधान है। इस दौरान उनके नागरिकता दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में जिला मजिस्ट्रेट जिला कलेक्टर सत्यापन के बाद नागरिकता की स्थिति पर अंतिम फैसला लेंगे। जिन लोगों की पहचान घुसपैठिए के रूप में होगी, उनका बायोमेट्रिक डेटा निर्वासन की कार्यवाही शुरू होने से पहले केंद्रीय डेटाबेस में अपलोड किया जाएगा।

















