राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राष्ट्र सेविका समिति के प्रशिक्षण वर्गों में केवल अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का ही पाठ नहीं पढ़ाया जाता, बल्कि समाज के साथ आत्मीयता के तार भी बड़ी गहराई से जोड़े जाते हैं। इसका एक बेहद खूबसूरत और भावुक नजारा हाल ही में शाजापुर और चित्तौड़ प्रांत में आयोजित प्रशिक्षण वर्गों में देखने को मिला।
यहाँ ‘मातृहस्ते भोजन’ (मातृशक्ति के हाथों से परोसा गया भोजन) कार्यक्रम के जरिए न केवल सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की भी एक प्रेरक मिसाल पेश की गई।
शाजापुर: 187 परिवारों की माताओं ने परोसा स्नेह, ‘रिटर्न गिफ्ट’ में मिले फलदार पौधे
शाजापुर के दुपाड़ा रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में इन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संघ शिक्षा वर्ग (व्यवसायी) चल रहा है। रविवार का दिन इस वर्ग के शिक्षार्थियों के लिए एक सुखद पारिवारिक अहसास लेकर आया। अवसर था ‘मातृहस्ते भोजन’ कार्यक्रम का, जिसमें नगर के करीब 187 परिवारों की मातृशक्ति ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

- माताएं और बहनें अपने घरों से बड़े जतन और स्नेह के साथ भोजन बनाकर लाईं और शिक्षार्थियों को अपने हाथों से परोसा।
- घर से दूर रहकर कड़ा प्रशिक्षण ले रहे स्वयंसेवकों के लिए माताओं के हाथ का यह भोजन किसी छप्पन भोग से कम नहीं था।
- साथ बैठकर भोजन करने से पूरे परिसर में पारिवारिक समरसता और अपनेपन का ऐसा माहौल बन गया, जिसने सभी को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम के समापन पर जब विदाई की बारी आई, तो शिक्षार्थियों ने भी अपनी कृतज्ञता जाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने भोजन लेकर आए सभी परिवारों को भेंट स्वरूप फलदार पौधे दिए, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति संघ की प्रतिबद्धता का एक सुंदर संदेश था।
चित्तौड़ प्रांत: ‘मातृहस्तेन भोजनम्’ बना कुटुंब प्रबोधन का उत्सव
इसी तरह का एक और मनमोहक दृश्य 25 मई 2026 को राष्ट्र सेविका समिति, चित्तौड़ प्रांत के ‘प्रवेश वर्ग’ में भी देखने को मिला। यहां भी ‘मातृहस्तेन भोजनम्’ का भव्य आयोजन हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज के सामान्य परिवारों को सेविका समिति के राष्ट्र निर्माण के कार्यों और उसकी कार्यपद्धति से रूबरू कराना था।
- इस विशेष दिन कई परिवार अपना और 2 से 3 अन्य सेविकाओं का भोजन लेकर वर्ग स्थल पर पहुंचे।
- सभी ने एक साथ बैठकर पूरी आत्मीयता के साथ भोजन किया।
- यह केवल एक सहभोज नहीं था, बल्कि कुटुंब प्रबोधन, स्व-संस्कृति बोध और सामाजिक समरसता की एक जीवंत पाठशाला थी।

कार्यक्रम के दौरान माताओं का वात्सल्य और पिता-भाई का दुलार देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा समाज ही एक विशाल संयुक्त परिवार में तब्दील हो गया हो।
समाज और संगठन के बीच मजबूत होता सेतु
आज के भागदौड़ भरे दौर में जहां समाज में एकाकीपन बढ़ रहा है, वहां ‘मातृहस्ते भोजन’ जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति की उस मूल भावना को पुनर्जीवित करते हैं जो पूरी दुनिया को एक परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम्) मानती है।
आयोजन के पीछे यह भाव है कि समाज के बंधु-भगिनी संघ और राष्ट्र सेविका समिति के कार्यों से परिचित हों। इस अवसर पर कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्व-संस्कृति बोध, माता का स्नेह, पिता-भाई का दुलार एवं अपार अपनत्व का सुंदर प्रवाह देखने को मिला।
शाजापुर और चित्तौड़ के इन आयोजनों ने यह साबित कर दिया है कि जब संगठन के संस्कार और समाज का वात्सल्य आपस में मिलते हैं, तो राष्ट्र निर्माण की नींव खुद-ब-खुद मजबूत हो जाती है।

















