हाल के दिनों में दुनिया भर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और संघर्ष की खबरों के कारण एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर कई देशों में पेट्रोल और ईंधन की आपूर्ति और कीमतों पर देखने को मिला। कहीं ईंधन महंगा हो गया तो कहीं उसकी सप्लाई में दिक्कतें आने लगीं। ऐसे समय में हर देश ऊर्जा बचाने और उसका सही उपयोग करने पर जोर दे रहा है। भारत भी इससे अलग नहीं है।
प्रधानमंत्री की ऊर्जा बचत अपील
इन्हीं हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे ऊर्जा की बचत करें। उन्होंने कहा कि बिजली और ईंधन का जरूरत के हिसाब से ही उपयोग किया जाए और अनावश्यक खर्च से बचा जाए। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि लोग गैर-जरूरी चीजें जैसे सोने की खरीद कम करें और विदेश यात्राओं को भी सीमित रखें, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संसाधनों पर दबाव कम हो सके। उनका मकसद यह है कि ऐसे वैश्विक संकट के समय देश आत्मनिर्भर बने और संसाधनों की बचत हो।
प्रधानमंत्री की इस अपील का कई लोगों ने समर्थन किया है। इसी बीच एमएनएम के अध्यक्ष और सांसद कमल हासन ने भी प्रधानमंत्री की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि देशहित किसी भी राजनीतिक विचारधारा से बड़ा होता है और ऐसे समय में सभी को मिलकर काम करना चाहिए। कमल हासन ने कहा कि भारत ने पहले भी युद्ध और आर्थिक संकट जैसे मुश्किल समय को एकता और सहयोग से पार किया है, इसलिए आज भी वही भावना अपनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के 60 से ज्यादा देशों ने पहले ही ऊर्जा बचाने के नियम लागू किए हैं। उन्होंने यह भी माना कि पिछले दस वर्षों में भारत में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अच्छी प्रगति हुई है। इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा, कोयला गैसीकरण और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ा है, जिससे देश की विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है।

















