ओडिशा : रथयात्रा 2026 की तैयारियां तेज, 42 पहियों का निर्माण पूरा; ओडिशा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की
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ओडिशा : रथयात्रा 2026 की तैयारियां तेज, 42 पहियों का निर्माण पूरा; ओडिशा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की

विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा 2026 की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
May 22, 2026, 01:57 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा 2026 की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। एक ओर पुरी के रथखला ( रथ तैयार किये जाने का स्थान) में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों भव्य रथों के निर्माण कार्य में तेजी आई है, वहीं दूसरी ओर ओडिशा पुलिस ने इस विशाल धार्मिक आयोजन के लिए व्यापक सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन व्यवस्था को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। आगामी 16 जुलाई से आरंभ होने वाली रथयात्रा को लेकर प्रशासन और सेवायत समुदाय दोनों पूरी सक्रियता के साथ तैयारियों में जुटे हुए हैं।

रथ निर्माण प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए तीनों रथों के लिए आवश्यक सभी 42 पहियों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही रथ निर्माण कार्य अपने अगले चरण में प्रवेश कर गया है। दूसरी ओर, लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु व्यवस्थापन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कटक स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

रथ निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार
पुरी के रथखला में महाराणा सेवायतों द्वारा तीनों रथों के निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। पहियों के निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद अब रथों के धुरों (एक्सल) के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तीनों रथों के लिए कुल 21 धुरों की आवश्यकता होती है। इनमें से पारंपरिक ‘चका डेरा’ अनुष्ठान के लिए आवश्यक तीन धुरों का निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष 18 धुरों पर कार्य जारी है।

रथ निर्माण से जुड़े एक महाराणा सेवायत ने बताया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर संपूर्ण लकड़ी संरचना तैयार करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानसूनी वर्षा के कारण कार्य की गति पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन रथ निर्माण निर्धारित समय पर पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम यथाशीघ्र लकड़ी से जुड़े सभी निर्माण कार्य पूरे करने का प्रयास कर रहे हैं। बारिश के कारण थोड़ी बहुत देरी संभव है, लेकिन रथ निर्माण समय पर पूरा होगा।”

पारंपरिक अनुष्ठानों का भी हो रहा निर्वहन
रथ निर्माण केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह धार्मिक परंपराओं और विधि-विधानों से भी जुड़ा हुआ है। इसी क्रम में मुख्य महाराणा सेवायत द्वारा मंदिर परंपरा के अनुसार तीनों रथों के लिए 12-12 चौपटा भूई चौता बंधनों की स्थापना हेतु अनुकूल पूजा संपन्न की गई। पूजा-अर्चना के उपरांत सेवायतों ने प्रत्येक भूई चौता पर चार-चार पखुड़ा बंधन लगाने का कार्य प्रारंभ किया। इसके साथ ही दोनों ओर खांबी बंधन भी स्थापित किए जा रहे हैं, जो रथ की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

इन कार्यों के पूर्ण होने के साथ रथ निर्माण का एक और महत्वपूर्ण चरण सफलतापूर्वक आगे बढ़ा है। यही विशाल लकड़ी के रथ वार्षिक रथयात्रा के दौरान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक लेकर जाएंगे।

नक्काशी और अलंकरण कार्य भी जारी
रथों की मजबूत संरचना तैयार करने के साथ-साथ उनके सौंदर्यीकरण का कार्य भी समानांतर रूप से चल रहा है। रूपकार सेवायत विभिन्न हिस्सों पर पारंपरिक कलात्मक नक्काशी और सजावटी कार्य कर रहे हैं।यह कलाकारी ओडिशा की समृद्ध शिल्प परंपरा, मंदिर स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करती है। रथों की संरचनात्मक मजबूती और कलात्मक सजावट दोनों क्षेत्रों में एक साथ हो रही प्रगति से स्पष्ट है कि इस वर्ष की घोष यात्रा (रथयात्रा) की तैयारियां पूरी गति से आगे बढ़ रही हैं।

ओडिशा पुलिस ने तैयार किया व्यापक सुरक्षा खाका
जहां पुरी में रथ निर्माण कार्य जारी है, वहीं ओडिशा पुलिस भी रथयात्रा के दौरान सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए विशेष रणनीति तैयार कर रही है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को कटक स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक योगेश बहादुर खुरानिया की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा की।
डीजीपी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि रथयात्रा जैसे विशाल आयोजन के दौरान सुरक्षा के प्रत्येक पहलू पर विशेष निगरानी रखी जाए तथा विभिन्न स्तरों पर समन्वित ढंग से कार्य किया जाए ताकि आयोजन निर्विघ्न संपन्न हो सके।

उन्होंने अधिकारियों को किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए।

पुरी के रथखला में रथ निर्माण कार्य पूरे उत्साह और गति के साथ जारी।

महत्वपूर्ण अनुष्ठानों की तिथियां घोषित
श्रीजगन्नाथ मंदिर की परंपरागत पंचांग व्यवस्था के अनुसार इस वर्ष रथयात्रा से जुड़े प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में 29 जून को देवस्नान पूर्णिमा, 14 जुलाई को नवयौवन दर्शन, 16 जुलाई को मुख्य रथयात्रा, 20 जुलाई को हेरा पंचमी, 23 जुलाई को संध्या दर्शन, 24 जुलाई को बाहुडा यात्रा, 25 जुलाई को सुनाबेश, 26 जुलाई को अधरपण तथा 27 जुलाई को नीलाद्रि बीजे का आयोजन किया जाएगा।इन धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने का निर्णय लिया है।

नई भीड़ प्रबंधन एवं यातायात व्यवस्था
इस वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा और सुचारु यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुलिस प्रशासन कई नई व्यवस्थाएं लागू करने जा रहा है। पुरी शहर और उसके आसपास यातायात दबाव को कम करने के लिए आठ अतिरिक्त पार्किंग जोन चिन्हित किए गए हैं। इससे वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने और जाम की समस्या कम करने में मदद मिलेगी।

रथ खींचने के दौरान मार्ग को बाधामुक्त बनाए रखने के लिए रथों के आगे विशेष क्लियरेंस पार्टियां तैनात की जाएंगी। इसके अतिरिक्त अत्यधिक भीड़ वाले क्षेत्रों में क्रैक टीमों की तैनाती कर सुरक्षा निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। बैठक में प्रमुख स्थलों पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने, सड़क विभाजक एवं डिलिनेटर स्थापित करने, विशेष यातायात जोन विकसित करने तथा समग्र ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर भी चर्चा की गई।

अपराध नियंत्रण और आतंकवाद-रोधी तैयारियों पर विशेष जोर
रथयात्रा के दौरान सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डीजीपी ने पुरी जिले के सभी थाना क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर अपराध नियंत्रण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। होटलों और लॉजों की नियमित जांच करने का भी आदेश दिया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
बाहरी राज्यों से आने वाले आदतन अपराधियों की संभावित गतिविधियों को रोकने के लिए उनके फोटोग्राफ एकत्र कर रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर लगे एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित किए जाएंगे।
पुरी समुद्र तट क्षेत्र में भी पुलिस गश्त बढ़ाने और अस्थायी पुलिस चौकियां स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।


आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की होगी तैनाती
व्यापक सुरक्षा योजना के तहत ओडिशा पुलिस द्वारा के-9 डॉग स्क्वाड, एनएसजी प्रशिक्षित स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के जवानों तथा विशेष खुफिया इकाइयों की तैनाती की जाएगी। ये दल श्रीजगन्नाथ मंदिर और अन्य संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। भगदड़ जैसी किसी भी संभावित स्थिति को रोकने के लिए वैज्ञानिक तरीके से बैरिकेडिंग, नियंत्रित भीड़ संचालन तथा समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र विकसित किया जा रहा है। बैठक में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। साथ ही किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना के समय विभिन्न सरकारी विभागों के बीच त्वरित समन्वय सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की गई।

बैठक में अपराध शाखा, खुफिया विभाग, रेलवे पुलिस, तटीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, परिवहन, संचार और विभिन्न जिला पुलिस इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

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